Monday, May 4, 2020

काव्यस्पर्धा क्र. 8 विषय-कास्तकार

(चाल-अंजनीच्या सुता तुला------)
माती मालं सोनो पिकावसे कास्तकार।
पोट भरसे सबको, तोला त्रिवार नमस्कार।।धु।।

पिकावसेस धान अना भाजिपाला।
सबला मिळसे रोज ताजो ताजो खानला।।
भारतकी अर्थ व्यवस्था , तुच लगावसेस पार।।१।।

दिवस भर काम करके गाळसेस घाम।
कारी कारी माती तसो दिससेस तू शाम।।
धरतीपुत होयशानी,तू जगको तारनहार।।२।।

आण बाण शाण आता किसानीपर तोरी
यज्ञरुपी फसलं तोरी भरसे तिजोरी
काहे आत्महत्या तु जगको पालनहार।।३।।

आधुनिक यंत्र ठेव आपल संग
टेक्टर ना सरजा राजाको संग
बळिराजा तू सबको, कर भवसागर पार।।४।।

वाय सी चौधरी
गोंदिया

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