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Tuesday, August 11, 2020

कानुबा देव chhaya pardhi

कानुबा देव

मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।ध्रु।

सावलो सलोनो मोरो देवकी को बार 
लहानपन नहीं मिलेव मायबाप को प्यार
कंस को भेव लका गोकुल मा जासे
मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।१।

गोकुलमा यशोदा न पालन करिस
नंदबाबा न ओका नखरा झेलिस
गोकुलको टुरा संग खेल मंडावसे
मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।२।

गोकूलमा दहिदूध की करसे चोरी
गोपी संग खेल खेलसे नानापरी
गोफन लका गौळणीकी हांडी फोड़से
मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।३।

बालपन कि सखी ओकी होती राधारानी
रास रच गोकुलामा संग नाचती गौळणी
गोड गोड आवाजमा बंसरी बजावसे
मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।४।

घर घर मा पूजा तोरी अष्टमीला होसे
टेठला मटली चना लाही खुशी लका खासे
डेढ़ दिवस रहस्यानी गोकुळमा जासे
मोरो कानुबा देव बाई मचुर मूचुर लाही खासे।५।
सौ छाया सुरेंद्र पारधी

Thursday, July 30, 2020

पोवार chhaya pardhi

      पोवार

या धरती से अलबेली जहां वैनगंगा की धार
हवा मा गुंजायमान सेती यहा शौर्य का गान।
अग्निवंशीयको शौर्य की गाथा गावसे हर पात
माता गढ़कालिकाको से आशिर्वादको  हात।।

आबूपर यज्ञ करीन मुनिन् प्रगट्या क्षत्रीय पोवार
अग्निकुंड लक प्रगट भया नाव उनको परमार।
शस्त्रधारी क्षत्रिय प्रतापी चमकसे हातमा तलवार
वध करसे दृष्टो को जनजीवन को बनेव आधार।।

उज्जैनी महान विक्रमादित्य भृतहरी लक विख्यात
दसवीं सदीमा बसाइस बैरीसिहन् सुंदर नगरी धार।
मालवामा मूंज भोज न करिन साम्राज्य  विस्तार
भोजशाला बनाइस करिस ज्ञान को प्रचार प्रसार।।

विदर्भपर राज करीन मालवाधिस पोवार सरदार
आया धारलक जगदेव पोवार चालुक्यको दरबार।
विरयोद्धा जगदेव पोवार बन्या चांदा का महाराज
शासनमा उनकी जनता होती बड़ी सुखी खुशाल।।

मालवा पर आक्रमण करीन मुगल न जनता बेहाल
संकट आयेव भारी बिखऱ् गया मालवा का पोवार।
वैनगंगा किनारा पर आया सोड देईन नगरी धार
बंजर भुमी मा खेती करस्यार बन गया  किसान।।

सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

पोवारी सत्याग्रह chhaya pardhi

पोवारी सत्याग्रह

आब पोवारी सत्याग्रह करन कि आईं पारी
पवार न पोवार परा चलाईस कुटील कटारी।।

आमला नहीं लगी भनक *पोवारला* पवार करीन
एकताको नावपर पहचान मिटावनकी बाट धरिन।।

आमरो पुरखाईनं कभी पवार नही लिखिन कहीं
उधारीको नाव आमरोपर आबं होय रहीसे हावी।।

उनको कारनामा की सजा भुगत रहीसे पोवारी
जात करीन पवार त कसी रहे तूमरी पोवारी बोली।।

छत्तीस कुल वाला आमी वैनगंगा तटीय निवासी
चलो जागो आता मोरा पोवार भाऊ ना भगिनी।।

साहित्य अना उत्कर्ष की करो मिलके तयारी
भाषा को सृजन अना संवर्धनकी करबीन वारी।।

नवीन साहित्यसृजन की जत्रा भरे मंग यहानी
पोवारी सत्याग्रहला  कलमकी धारदार वाणी।।

उबाल आमरॊ खून मा क्षत्रिय की या ललकारी 
अमर होये पोवार ना अमर आमरी मिठी पोवारी।।
सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Saturday, July 11, 2020

पोवारी स्वागत गीत chhaya surendra pardhi

     पोवारी स्वागत गीत

हर कली कर रही से तुमरो स्वागतम्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।ध्रु।।

        बड़ों सुंदर सुहावन समय आयी से्
        अतिथि आया यहां,सबको स्वागत से्
भगवान् सरिसो पूजन,करबी अज सब्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।१।।

         शब्द सुमन् का मालामा पिरोया मनी
         श्रद्धा लका बनाया ,या माला आमि
करसेजन् अर्पित मिलकर श्रद्धा सुमन्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।२।।

          पोवार समाज को मेळावा यहाँ अज् से
          अतिथियों लका सजी या फूलबाग से
करसेजंन अर्पित उनला शब्द सुमन्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।३।।

सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

Friday, July 10, 2020

बरसात chhaya pardhi

        बरसात

अवचित आयेव वू रुणझुणत
मृदंग वा ढगकी बजावत
रूप श्याम भयेव अंबर को
बिजली कड़कड़ कडकावत।।१।।

धूल्ला उडेव परकर धरके
खिडकी खटखट लगी बजन
जूही की बेल बड़ी शरमाई 
देखन बसी ढूक ढुक कन।।२।।

सज्ज भई अवनी प्रिया
बरसात को स्वागत करण
बुड़गो बड़ उभो खट रहेव
तरा भी सज्ज भयेव भरण।।३।।

आयेव आब टप टप पानी
जोरदार जलधारा बरसी
भिजेव धरनी को रूप सुंदर
सुगंध फुटेव अत्तर सरिसि।।४।।

पशु पक्षी सब हरसाया
अंकुर मातिला फुटेव
नवांकुर की नवी गाथा
कण कण ला हास्य फुटेव।।५।।

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

महाराजा भोजदेव chhaya pardhi

महाराजा भोजदेव

मोरो खून मा बडो उबाल से
मोरो धार मा बसेव प्राण से
मोरी बोली मोरी पहचान से
मोरी अलबेली नगरी धार से

एक राजा होतो बडो विद्वान
संपूर्ण होतो ऊ शस्त्रकलामा
पारंगत भोज वेदोको ज्ञानमा
भक्त वूं लीन वांग्देवीको भक्तिमा

राजाभोज की राजधानी धारमा
मालवा की महाराणी वा शानमा
बड़ो शूरवीर महाप्रतापी शौर्यमा
कई राजाला धूल चटाईस रणमा

बहत्तर कलामा होतो पारंगत  
चौरयाशी ग्रंथ को रचियता 
भोजशाला सरस्वतीसदन बन्या
ज्ञान को प्रचार प्रसारमा

पंडित छिटपला होतो महाज्ञान
*कालिदास* उपाधि कोओला मान
रोहंतक बुद्दिसागर दुही बड़ा विद्वान
राजाको दरबार होतो नवरत्नों की खान

कर्णदेव न चालुक्य राजा भीम संग 
करिस मालवा पर  आक्रमण मंग
वृद्ध राजा घातक बीमारी होती संग                                    हार गयेव लूट गयेव मालवा को रंग

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

Monday, May 18, 2020

प्रार्थना

मातृ-पितृ

प्रार्थना मोरी मातृ चरणोमा
नव महीना ठेइस उदरमा।
यातना कठिन झेलिस
फुकिस प्राण मोरो शरीरमा।।

दुनिया देखाइस मोला
मोती संस्कार का देइस।।
माया को पदर झाककर
मोठो मोला करीस।।

प्रार्थना मोरी पितृ चरणोमा
धिर खंबीर ओकों बाणा।
वरर्या लका कडक नारेन
अंदर पीरम को खजाना।।

दुनिया मा जगन साती
शिक्षा पिता की कड़क।
मारेत भी वय कभी मोला
पाठपर मोरो उमटत नहीं बर।।

प्रार्थना मोरी गुरु चरनोमा
ज्ञान की बाराखड़ीको दाता।
हरिदुन येकी महिमा अपार
नमाओ गुरु चरणोंमा माथा।।

सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Friday, May 1, 2020

कामगार

काम साती बनबन फिरसेत
जासेत कमावन शहरमा
कारखानों मा काम करसेत
रवसेत लहानसो खोलीमा

एक कमरा कि वा खोली
संसार करसेत आसमा
भविष्य को सपन देखसेत
पगार बढ़न को ध्यासमा

कम रवसे पगार तरिबी
जीनगी करसे ठाठमा
टुरू ला भी सिकावसेत
अच्छो अच्छो स्कुलमा

कामगार कि कमाल रवसे
ओको दुय् मजबूत हातमा
केतो भी मेहनत को काम
कामगार करसे बात बातमा

धुरा देश की येवच् कामगार
मेहनत को  पुतला
नमन से मोरो इनला
अज कामगार दिनला

✍️सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Wednesday, April 29, 2020

पंवारी


बहुत दिन बादमा आयेव उनको फोन
मी क़येव उनला तुमि बोल सेव कोन

नाव आयेक कर दूर भयेव भ्रम
विदेशमा से मुन मोला भूल गयेव

विदेश वालो की छोडो भाऊ बात
देश वालो न भी सोडीन मोरो साथ

पहले त दरारा होतो मोरो खास
आब  खेडामा से थोडो मोरो नाव

बची सेव थोडी सी मी आता
बोली जासेव खेडा मा  खास

दुसरी तिसरी कोणी नोहोव मी
पोवरी भाषा तुमरी मी आव 

जगाओ मोला बोलो घरघरमा 
तबच फुलुन फलुन समाजमा

तबच बढ़े मोरो मान सम्मान
करो नवो नवों साहित्य निर्माण

तुमि पोवार मोरा पुत्र खास
मोरो मान बढ़े असो करो प्रयास

- सौ छाया सुरेंद्र पारधी 

Saturday, April 25, 2020

काव्य प्रकार: हायकू


रामनवमी
आज्ञापालक जन्म
सुखदायक

राम को नाम
समंदर गहरो
मोक्ष को रस्ता

सत्य  पालन
रामजी को चरित्र
सुखदायक

दुर्गुण  वध
जीवन को कल्याण
नहीं दूसरो

मन को भाव
दशानन अंदर
करे बर्बाद

✍️सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Thursday, April 23, 2020

भानी


                                                                           यादसे मोला सायनी मायकी भानी।
भानी सिवाय जेवत नोहती वा कबी।

भानी की याद आब बी से ताजी।
एकच भानी मा जेवत होता आमी।।

अजी बी आलनी परा मंडावत भानी।
निगरा परा जनावत अग्नि पहलो मानी।।

बीह्यामा बेटी को पायधोवन कासो की भानी।
पूर्वाजला बिरणी टाकणं कासोकी बटकी।।

कासो पितर की भानी अना टमान भारी।
भरता की गिलास ना रवत होती अत्तरदानी।।

आता सब कसार को दुकान की भई शान।
मोड़ मा गई भानी अना मोठा मोठा गंगार।।
 
- सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Wednesday, April 22, 2020

गंगार

पोवार को गंगार मा
साक्षात गंगा समाई से
जेन हात न बनाइस गंगार
वोको हातकी भी वाहवाही से

माती को बनेव गंगार 
शीतलता वोको गुन से
उन्हारो मा मस्त ठंडो पानी
हातपाय धोवनोमा सुख से

बड़ो काम को येव गंगार
धोवो ऐको पाणी लक आंग
आंदी की बाई पानिमा देखकर
भरत होती लाल कुकु की भांग 

पोवार को बिह्यामा मान गंगारला 
मथनी, गंगार रवसे कुंभार को बानमा
नवरी सार होसे,ना बहु घर आवसे
नांदळ को दिवो ठंडो करसेती गंगारमा

आता ईट सीमेंट को जंगलमा 
गंगार भी कही  दवड़ गयेव
पक्षी को पानी पिवन को साधन
आता भूतकाल किं याद भयेव

✍️-सौ. छाया सुरेंद्र पारधी.

व्यसनमुक्ती

कसो सांगु तोला? शरम् आवसे मोला
पोटमा से गोला, तोरो मोरो            ।। ध्रु।।

नोको रोऊ असी? का कहेत सकी
जिनगी से कसी, मोरी सोना            ।।१।।

रोज पिवसेव् दारू?आता कसी करू
रोज काहे मरू,  तुमरो साती             ।।२।।

दारू की लत्, करसे गत्
गयेव आता थक, मोरी सोना            ।।३।।

आता फुट्या करम् ,कायको धरम्
दूर भयेव भरम् , मनमा को              ।।४।।

आऊ तोरो संग् , व्यसनमुक्ती डंग्
सुटे दारू मंग्, मोरी सोना               ।।५।।

मन् भयेव् खुश,  बित जायेत दिस्
नई रवनकी टिस् , भविष्य की।         ।।६।।

✍️- सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Wednesday, April 15, 2020

विषानू

अरे! कहान गयात तुमि सब भारतवाशी।
 एकटो यहांन बडो फड़फड़ाय रही सेव।।

अज् रस्ता परा हिडंता काहे नहीं दिसत।
सजधज कर तुमरोसाती तैयार भई सेव।।

मोला नई ओरख्यात अज्ञानी लोक  तुमि।
आव कोरोणा विषाणु मजा लेय रही सेव।।

सबको मनमा बसेव मोरो केत्तो मोठो भेव।
तबाई मचाएकर हाहाकार खुब मचाई सेव।।

मोरा अदिक सेत लगीत रंगींला भाई बन्धु।
जिनला तुमरो मणमा लुकायकर ठेई सेव।।

व्देष, अहंकार, ईर्षा, जलनखोरी लालच।
इनला सदा सदा साठी धरती पर ठेई सेव।।

जसो आब कर रहया सेव तुमि मोरो खात्मा।
अहंकार को विषाणु ला काहे ठेय रह्या सेव।।

सैईतान बनकर दूसरो को जिनगी संग।
काहे तुमि हर जाग् खेल,खेल रह्या सेव।

गलि गलिमा बनकर बहिन बेटी को  क़ाल।
काहे तुमि नरभक्षी बन्या फिर रह्या सेव।।

मी विषाणू कोरोना अज़ सेव सकारी नहाव।
पर तुमि काहे विषाणू बनकर फिर रह्या सेव।।

-सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Tuesday, April 14, 2020

तिरंगा

तीन रंगों को रंग रंगीला  वस्त्र नको समजो येला
भारत की आंगन बान  भारतवासियों को अभिमान

खादी को येव बनेव तिरंगा तीन रंग मा रंगेव तिरंगा
एक किसान वैक्काया पिंगली न करिस अभिकल्पना

देखो येको तीन रंग की तुम्ही सब भारतवासी महिमा
सबसे वरत्या बलिदान को प्रतीक रंग सुंदर  केसरिया

श्वेत शुभ्र रंग से सच्चाई पवित्रता शांती को रंगमा
अखंड भारत मा शांती को संदेश देसे संगमा

बीच मा शोभसे चोवीस आरी को अशोक चक्र संगमा
आत्मरक्षा शांती समृद्धी  विकास को संदेश देसे आमला

समृद्धी को हिरवाे रंग समृद्धी दर्शावसे भारतमा
सम्मानलका लहर लहर लहरावसे तिरंगा अंबरमा

देश को मान सन्मान तिरंगा सबसे प्यारो तिरंगा
भारत की आन बान भारतवाशियो को अभिमान

- सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

खेल

याद आवसे मोला गम्मत गुम्मत की कट्टी।
घड़ी भर मा मंग होय जात होता बट्टी।

लगोरी को खेल मा रोनटी बी खाजन।
गण देन को घनी खेल बिचकावजन।।

चंगा अस्टा को खेल मा नजर चुकावजन।
एक पर एक बिजी ठेयश्यार अष्टा आंनजन।।

बावला बावली को खेल खेलजन मिलकर।
नवरा बायको को खेलमा जाजन घुलकर।।

गम्मत गुम्मत को नवरा मंग बजारला जात होतो।
कहा गइस सोन्या कि माय चिल्लात आवत होतो।।

खेल होतो आमरो गंमत गम्मंत को बाई।
पर ससारखो खेलला भी वोत्ती मज़ा नहीं।।

आब त सोनों ना पित्तर वोतोंच चमकसे।
ससार  को माणूस ओरखन फजिती होसे।।

वरत्या वरत्या मानुस मिठो बोल बोलसे ।
अंदर लक मनामा  कपट ,अहंकार रवसे।।

मनुष्य वरत्या लका ससार को दिससे।
पर अंदर लक मन कारो कुचकुचो रवसे।।

मनुन सब चमकीली चीज सोनो नहीं रव्।
गम्मत गुम्मतला ससार की सर नहीं आव।।

✍️ सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

सावधान

सावधान सब होय् जाओ तुमि
पोवारी मी भाषा सेव् खतरा मा।
शहर वालो न भुलाय देईन मोला
सिर्फ बोली जासु आता खेड़ामा।।

हिंदी, अंग्रेजी बोलसेत् फर्राटालका
लाज लगसे उनला पोवारी बोलनला। 
बोल्या कोनी उनको संग पोवारी मा
देखसेत एकमेक करा टकामका ।।
  
येत्ती का लाज लगसे तूमला बोलनला 
लग्यासेव मोरो अस्तित्व मिटावनला।
मी सेव त् तुमरी से पहचान समाजमा
मी मिट गई त् कसो सांगो नवो पिढीला।।

गल्ड्या गडू, सळ गयेव् ना पेट गयेव्
लुप्त होय जायेत् समय को पेट मा।।
झुंझुरका,माहतनी बेरा,भानी, बटकी
सुंदर शब्द सब् उडाय जायेत गतकालमा।।

आपलो अस्तित्व बचावनो रहे, होंवो तैय्यार
देव मोला नवनवो साहित्य लक जीवन दान।
नवी नवी रचना की रक्तसंजीवनी बूटी लक
देय देवरे आपलो माय पोवारीला जीवनदान।।

- सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

नवनिर्मान


शिक्षित नई सुशिक्षित  बनो
माय का संस्कारी सपूत बनो
देखो जब भी असहाय् टुरी
भाई बनकर तुमि रक्षा करो
 नवो नवनिर्माण की मेढ़ बनो।।   
               
रोज मारी जासेत गर्भ मा टुरी
रोज मरसेती दहेज साठी टुरी
बदल जाय इंसान तू आता
जननी को सम्मान करो
आदर्श समाज नवनिर्माण की मेढ़ बनो।।

बारही मास् पानी  पडसे
ठंडी मा भी बरसात से
वातावरण को चक्र बदलेव
झाड़ लगाओ झाड़ जगाओ
जनजागृति की मेढ़ बनो ।।  
       
सांगों नोकों दूसरोला 
पोवारी बोले पाहिजे
पोवारी बोलन् की सुरुवात
घर पासुंन तुमि करो
पोवारी नवनिर्माण की मेढ़ बनो।।

- सौ छाया सुरेंद्र पारधी

रांधनखोली


कोंनटो मा पडेव् पारोला,हांडी कव् 
काहे बसेस् असो  चुपचाप
पारो रोयेव्  सिसक सिसकर
देखकर आपलो कारो रूप

सांगु तोला पहले को राजमा
आपली जोड़ी होती अटूट
आता दुरलकच तोला देखकर.
झुरसे मोरो लहानसो जीव

याद से का तोला पयले की 
पोवार की रांधन खोली
रांधनखोली मा दिमाखदार 
माती को चूल्हों तीन अवली 

मी अना तू ,चाटू,ताई, रई, सरूता
मलोकी, मलोका संगमा जगरा 
सिल बट्टा त् आपलो तोरामा रव् 
काम नोहोतो वोला आरामच कर्

दही, दूध, मही , घीव की 
काही रवत नोहति कमी
जगरा भर दूध की साय पड़् 
पीठ को हातोडी रोटी वानी

   - सौ छाया सुरेंद्र पारधी

हिरोती


आयेकलेव भाऊ तुमि सब गुणीजन
मी करूसु हिरोती को गुणगान गा ।
बड़ी गुणकारी वा पिवरी धमक
रूप सुंदरी सोनो की खान गा ।।

पहले माता मायला चढ़ावसेत् हिरोती
पोवार को बिह्यामा येला बड़ो मान गा ।
मग् नवरी बाईला लगावसेत् हिरोती
तबच चमकसे रूप की खाण गा ।।

पाचगाठी लगिंनडेरला नेंगदस्तूर को आगाज
लगींन लगन् को पहले पलटावसेत गाठ गा ।
नवरा नवरी पर पडे करस को पानी  
 बन जायेत पिरम की खाण गा ।।

सर्दी मा पियो ओवा हिरोती को हरारा
लगायलेव  चंदन हिरोति को लेप गा ।
निखर जाए येव गोरो सुंदर मुखड़ा
कांति सोनो की बन जाए ख़ाण गा ।।

आमरो भाजीमा जादा हिरोती को तड़का
मनुनंच से पवार की कांति गोरी पान गा ।
रोज चाय, दूध बनाओ, टाको हिरोती
पराये मुख को ‌मुरूम की खाण गा ।।

- सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...