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Monday, October 26, 2020

दसरा chhaya pardhi 01

दशहरा / विजयादशमी

     `दश’ को अर्थ से दस अना हरा मंजे हार गयेव, पराजित भयेव । आश्विन शुक्ल दशमीकी तिथिपर दशहरा मनाव सेती । दसरा को पयले नव दिवस नवरात्री मा दस दिशा देवी माता की शक्ति लक आवेशित होसेती । दशमीकी तिथिपर सब दिशा देवी माता को नियंत्रण मा रवसेती।मंजे दस दिशाओं पर विजय प्राप्त होसे । मुन येला `दशहरा’ कसेती । दशमी को दिन विजयप्राप्ति होनको कारण येन दिनला `विजयादशमी’ भी कवसेती । विजयादशमी साढेतीन मुहूर्त मा लक एक से । येन दिन कोनतो भी कर्म शुभफलदायी होसे।

दसरा को इतिहास

भगवान श्रीराम का पूर्वज अयोध्या को राजा रघुन विश्वजीत यज्ञ करीस । सब संपत्ति दान करके वय एक पर्णकुटी मा रवन लग्या । वहां कौत्स नावको एक ब्राह्मणपुत्र आयेव । उननं राजा रघुला सांगीस कि, ओला अापलो गुरुला गुरुदक्षिणा देन साती  १४ करोड स्वर्ण मुद्राओंकी आवश्यकता से । तब राजा रघु न कुबेरपर आक्रमण करन की तैयारी करिस । कुबेर राजा रघु को शरण मा आया अना उनं अश्मंतक मंजे कोविदार मंजे कचनार अर्थात ऑरकिड ट्री (Orchid Tree) मंजे शमी को वृक्षपर स्वर्णमुद्राकी वर्षा करीस । वाहन लक कौत्सन केवल १४ करोड स्वर्णमुद्रा धरीस । जे स्वर्णमुद्रा कौत्सन नहीं धरिस, वय राजा रघुन बांट देईस । तब पासून दसरा को दिन एकदूसरे ला सोनो को  रूप मा शमी का पान देनकी प्रथा से। 

       त्रेतायुग मा प्रभु श्रीरामन दसरा को दिन बलशाली रावण को वध करिस, सीतामाताला असुरों को बंधन मा लक मुक्त करितिस । प्रभु श्रीराम न दसरा को दिनच रावण को वध करितीस । द्वापारयुग मा अज्ञातवास समाप्त होयेपर, पांडव न शक्तिपूजन कर शमी को झाड़ को पोखर मा ठेया आपला शस्त्र पुन: कहाड़ीन, वू भी दसरा को दिवस होतो। 
 
 विजयादशमी को महत्त्व

विजयादशमीको दिन सरस्वतीतत्त्व प्रथम सगुण अवस्था प्राप्त कर, बादमा सुप्तावस्थामा जासे मंजे अप्रगट अवस्था धारण कर से । मुन दशमीको दिवस सरस्वतीको पूजन अन विसर्जन करसेती । 
 
पोवार समाज ना दसरा

   आमी छत्तीस कुलीन क्षत्रीय पोवार धार लक आयकर वैनगंगा माय को कोऱ्या मा बस गया। आमरी एक विशिष्ट संस्कृती से। दसरा को दिवस पासून आंगणमा सडा रांगोळी टाकसेती। सकारी उठकर सडा रांगोळी ना ओकोपर दस इंद्रिय का प्रतीक सेन का बडा बनावसेती। ओको परा घरका लग्यां दोडका, झुणकी, करुला का फुल लगावसेती। महातनि बेरा घर का लोखंड का सब सामान, गाडी अना घर का पीढो चौकी धोवसेती।  संध्याकारी सडा रांगोळी करके दरवाजा पर आंबा को पान की तोरण बांधसेती। मयरी अन कोचई को पाना की बड़ी बनावसेती।

        पूजा साती चवरी जवर मयरी की हांडी ठेवसेत। ओको पर केरा को पान ला बाघ को दोरी लक बांधसेती। ओको पर कोचई को पाना की पांच बड़ी मंडावसेती। टिकास, पावडा साबर,इरा, पावसी ना अन्य लोखंड को सामान की पूजा काम्या शेंदुर ला तेल मा खालश्यानी सब सामान ला लगायकरा पूजा करसेती। मयरी को हांडी ला पांच टिकली चंदन ,कुकू, हरदी की लगावसेत। कापुर, अगरबत्ती लगायकर पांच घन परी लक मयरी काहड़सेती। पीठ का दस दिवा बनायकर आंगणमा को शेन को बड़ा की पूजा करी जासे। बादमा एकमेकला शमी का पाना सोनों को प्रतीक मा देयकर सबकी मंगल कामना करके पाय लगसेती। सब घरमा जेवन करसेती। यहां पयले एक बात को विशेष ध्यान ठेयेव जात होतो की कोनी सितारों पानी बाहर नहीं फेकत होता । चूरू लेनको बाद सब सितारों पानी गड्ढा करकर घरमाच गड्ढा मा टाकत होता। पोवार समाज की एक विशेषता से की मयरी दूसरों समाज मा दसरा को दिवस नहीं बनावती, अना शेन का दस बड़ा भी!!!

✍️सौ छाया सुरेंद्र पारधी

दसरा, अहंकार दहन Y. C. chaudhari 01

        भारत की संस्कृति जग मा 
निराली से.धार्मिकताकं अनुसंगलं, ना धरतीक परीभ्रमनकं स्थितीलं शास्त्र
नुसार त्योहार की निर्मिती करनोमा आव से.आर्यका
दुय महाकाव्य रामायण ना महाभारत.रामायण येन महाकाव्यमा ,राम -रावण युध्दकी कथा भारतवासी
सबला मालुम से ,प्रभु रामचंद्र भगवानकी विजय ,
 सत्यकी- असत्यपरं विजय,सुबिचारकी-कुबिचारपरं  विजय,  अच्छाईकी-बुराईपर विजय,ना दस सीर कं रावणला युध्दमा हरायीस मुहुन "दसरा "कोनी येला दसहरा सुध्दा कसेती, अना योव आनंद उत्साह रुपलं मनायोव गयोव विजय दिन .मुहुन विजयादशमी मनायोव जासे.अशी कथा सत्ययुग पासुन आजतागायत  सबला मालुम से.
          महाभारतमा कौरव- पांडव चौसरमा  हा-या उनला बारा सालको बनवास ना एक सालको अज्ञातवास भयोव.तब पांडव अज्ञातवासमा राजा विराटकं दरबारमा कोनी ओळखे नहि पाहिजे मुहुन रूप बदश्यानी रह्या ,आपला शस्त्र ना कपळा शहाराकं झाळकं पोखरमा लुकायश्यानी ठेयीन,मुहुन शहाराको झाड़ पुजनिय से .मुहुन शहाराका(आपटा)पान
 सोनो मुहून एक मेकला बाटसेती. 
     रावणतं मरगयो ओकी सोनोकी लंकाहोती वहाको
सोनो लुटो असोही भाव रहे कदाचित . मुहून दसराला
शहारा को झाड़ रावण को प्रतिक ना ओका पाना म्हनजे लंकामाको सोनो असोही अर्थ होय सकसे.
          आध्यात्मिक दृष्टिकोन लं देखीसतं दस इंद्रिय को योव मानव शरीर ,पाच ज्ञानेद्रिय,(डो,ना,का, का,जी )ना पाच कर्मेद्रिय इनकपर विजय मिलायीस वा विजयादशमी ,ना अहंकार  म्हनजे रावण. येन अहंकार रुपी रावणला हरन करनो दिवस म्हनजे दसरा.
          पर यवअहंकार रुपी रावण मानुसको नाश करसे. मीच मोठो, मी सेवा मुहून सब काम होसे,मीच 
जास्त राबुसू.मी सेव तबवरी देखलेव? मीच सर्वगुनी सेव. दुसरा करं नहीं शकत?.मीच होतो मुहून काम भयोव,मी का समजुसू. या" मी"की भावना म्हनजे .रावण को अहंकार .मानुषला रावण बनावसे.यन रावणको दहन करनको दिवस म्हनजे "दसरा,"जब य़व अहंकाररूपी रावण पर विजय मिळे ऊ दिवस  म्हनजे विजयादशमी. तबचं सबको विकास ,समाजको विकास  होय.रावणला जरावो म्हनजे अहंकारको दहन करो ,रावण आपोआप मरजाये .जिवनमा सुख समृद्धी आये. "दसरा "को दिवस सफल होय जाये.उज्वल भविष्य स्मरणमा रहे.

""जय राजा भोज जय माँ गड़काली""
"""जय पोवार जयपोवारी बोली"""
वाय सी चौधरी
गोंदिया

दसरा chiranjiv bisen 01

            हिन्दु लोकईन क् प्रमुख त्योहार माल् एक त्योहार से दसरा. तसा त् हिन्दु इनका अनेक त्योहार सेती पर दसरा बहुत महत्वपूर्ण से. दिवारी क् बाद मा येव एक असो त्योहार से जो पूरो देश मा मनायो जासे. दसरा क् दिवस ला शुभ भी मान्यो जासे. गुढीपाडवा, अक्षय तृतीया अना दसरा ये तीन शुभ मुहूर्त मान्या गया सेती. 

                 पुरानो आख्यान पर ध्यान देनो पर येन दिवस देवी दुर्गा न् महिषासुर को वध करी होतीस. तसोच भगवान राम न् रावण को वध करी होतीस वोक् यादगार क् रूप मा येव त्योहार मनायो जासे. दसरा क् पहले नव दिवस देवी दुर्गा को नवरात्र उत्सव रव्हसे. पांडव इनन् बी अज्ञातवास क् बाद मा आपला शस्त्र शमी क् झाड परल् दसरा क् दिवसच् काहाडी होतीन. 

               दसरा क् दिवस मुख्य रूपल् दिवस बुडता गाव को बाहेर रावण को वध क-यो जासे. येला उत्सव क् रूप मा मनायेव जासे. येन दिवस सीमोल्लंघन (आपल् गाव की सीमा क् बाहेर जानो) को बी महत्व से. निलकंठ पक्षी को दिसनो येन दिवस शुभ माने जासे. दिवस बुडता आपटा का पाना सोनो क् रूप मा एक दुसरो ला देयस्यारी येव त्योहार मनायो जासे. काही काही गाव भसी बी खेलाई जासेत. असो प्रकार ल् येव त्योहार हर्षोल्लास ल् मनायो जासे. 

                  पोवार समाज मा बी येव त्योहार आनंदपूर्वक मनायो जासे. येन दिवस पोवार समाज मा घर का सब औजार जसो- टंग्या, बसला, कुदरी, पावडा, इरा, पावशी इनला धोयस्यार साफ करसेती. तसोच सायकल, मोटर सायकल, कार ला धोवसोती. तथा सबकी पूजा करसेती. 

                  दसरा क् दिवस पोवार समाज मा दिवस बुडता (राती) विशेष व्यंजन बनायो जासे. वोला *मयरी* कसेती. मयरी खिचडी वानीच् बनायी जासे पर वोको मा दही टाकस्यारी खट्टी बनावसेती. मयरी संग कोचई क् पान की बडी बी बनावसेती. दिवस बुडता मयरी ना बडी की पूजा करसेती. वोक् बाद मा आरती करस्यारी घर का सब लोग मयरी ना बडी खासेती. तसोच मयरी क् पूजा क् बाद एक दूसरो ला सोनो क् प्रतिक क् रूप मा आपटा का पाना देसेती. सब लोग आपल् दून मोठो इनका पाय लगकर आशिर्वाद लेसेती. तसोच दसरा ला पीठ का दस दिवा बनायकर घर क् सब दरवाजो इनपर तसोच फाटक अना चवरीपर मडावसेती. 

                असो प्रकार ल् दसरा को त्योहार पोवार समाज तसोच हिन्दु लोक हर्षोल्लास ल् मनावसेती. 

                   चिरंजीव बिसेन
          परमात्मा एक नगर, गोंदिया. 
         विजयादशमी, दि. २५.१०.२०२०

दसरा sharda chaudhari 01

आज सें सण उल्हास को
आपटा रुपी सोनो लुटन को
पुराना दुःख बिसरकर
ऐकमेकला खुशी बाटनको

अश्विन शुद्ध दशमी मंजेच दसरा आय."दसरा सण मोठो । नही खुशी को तोटो"असो काही उगोच नही कवत.जगत जननी दुर्गा माता नं महिषासुर राक्षस को वध येनंच दशमी को दिन करीतीस मुन येनं दिवस ला विजयादशमी असो नाव पडी सें.दसरा पौरुषत्व को  सण आय.चार वर्ण को मिलाप येनं सण मा सें. प्रभू श्रीरामचंद्र येनंच दिवस रावण संग युद्ध करन निकल्या होता.पांडव अज्ञातवास मा जेनं बेरा मा राजा विराट को घरं गया तबं  आपला अस्त्र-शस्त्र  आपटा को झाडपर लपायकर ठेई होतींन.अज्ञातवास सरे पर आपला शस्त्र निकालकर आपटा को झाड की पूजा करीन वू  येवच दिवस आय.

अज्ञान पर ज्ञान नं, शत्रूपर पराक्रम नं, वैर पर प्रेम नं विजय प्राप्त करन को सें.खुशी, समाधान, यश,कीर्ती  प्राप्त करन को सें.ज्योतिष नुसार साल मा तीन शुभ तिथी रवं सेत. एक चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, दुसरी कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा ना तिसरी
दसरा असो कहेव जासे. कोणतोही शुभ काम की सुरुवात दसरा को दिवस करे लक लाभ होसे असो माननो सें.मुन सीमोल्लंघन, नवो कार्य, कपडा को लेनदेन, सोनो खरेदी, घर, गाडी बंगला खरेदी येनं दिवस करेव जासे.

दसरा को दिवस आमरो जात मा सकाळी आंगण मा शेण को सडा टाककर रांगोळी भरं सेत. रांगोळी पर शेण का दस बडा बनावं सेत. वोनं बडा पर फुल सजावं सेत. घर ला सरावं सेत. दरवाजाला आंबा को पान अना गोंदा को फुल की तोरण लगावं सेत. मरदमाना गाडी-मोटारसायकल अना घर का सब औजार धोवं सेत.औजार ला  कुंकूम लगायकर ना गाडी ला हार चढायकर पूजा करं सेत. प्रसाद बाटं सेत.

दिवसबुडता को बेरा नवो कोरो हांडी मा मयरी ना गावठी कोचई को पान की बडी बनावं सेत. रावण को पुतळा बनायकर सारो  गाव मा फिरावं सेत ना गाव को शिव पर वोको दहन करं सेत. येको कारण असो का आदमी मा को बुराई को दहन करनो आय. उतं लक आये पर  सब घर को लहान मोठो इनला आपटा रुपी सोनो देयकर पाय लगं सेत. वोको बाद मा देवघर मा केरा को पान पर मयरी की हांडी, बडी  मंडायकर पूजा कर सेत. घर का सब लोक अंदर बसकर जेवण कर सेत.मयरी  सिर्फ घर का लोक खासेत. मयरी मंजे लक्ष्मी को स्वरूप मानं सेत.  संध्याकाळी चउक पर दिवो की टवरी मंडावं सेत.
असो दसरा सण साजरो करेव जासे.

राम नं मारीस लंका को रावण ला
वूच विजय दिन आय आज को
आपण बी मारबं दुष्ट प्रवृत्तीला
साजरो करबं सण विजयादशमी को

                                           शारदा चौधरी
                                               भंडारा

दसरा lalit gautam 01


• दसरा यव दश हरा को अपभ्रंश आय। दसरा ये को सही शब्द से दश-हरा। ये को अर्थ हो से स्त्री का ५ अना  पुरुष का ५ विकार मिलकर १० विकार ला हरायकर येकोपर विजय प्राप्त करनो। म्हणून ऎला विजया दशमी भी कवनोमा आवसे। येला विष तोड़क पर्व भी कवनोमा आव से।
• दस-हरा तसा त् हिन्दुओंका अनेक त्योहार सेत पर दसहरा बहुत महत्वपूर्ण से.
• हिन्दु ओंको प्रमुख त्यौहार मा लक एक अधिक त्यौहार से दिवारी को पर पहले  दशहरा मनायव जासे। बगैर दश हरा को दिवारी नहीं मनाय सिको। मनायाव पहीजे । (ऑफिशियली) वास्तव मा ये को हक सिर्फ  उनला भेट से  जे न येको पर जीत पाई से। पर आता कोंनला कोन कहे,.. चल से, म्हणून सबच मनाव सेत। दर असल स्वर्ग मा जनसाथी कोशिश कर सेत।
• येव एक असो त्योहार से जो पूरो देश मा मनायो जासे. भलेही ये को रहस्य कोनिला भी नहीं मालूम। वास्तव मा यव सिर्फ हिंदुओंको त्यौहार नो होय, यव एक आध्यात्मिक त्यौहार आय। मनुष्य जाति को उत्थान करनला...कोनी एक धर्म को नहीं। ... पर आता का कहूं, गुड गोबर एक कर देई सेन। ज्यादा लिखूं त ये को मा भी कोनी आपत्ति लेय सिक से। म्हणून सोड़ देसू। 
• दश हरा मा दरवाजों पर शुभ लाभ लिख्यव ज़ासे वोको मतलब से पहले साजरा शुभ काम करो तब च लाभ होए। लाभ करनला शुभ नहीं करो, ये को मा स्वार्थ देखत से।  म्हणून ये न दिवस ला शुभ भी मान्यो जासे.  ये को वास्तविक अर्थ से आब कलयुग मा साज़रा शुभ काम करो त, स्वर्ग सतयुग मा जनको लाभ मिले।
• महाराष्ट्र मा गुढीपाडवा, अक्षय तृतीया अना दसरा ये तीन शुभ मुहूर्त मान्या गया सेती. 
• दसरा को पहले नव दिवस अलग अलग ९ देवीमा लक,  एको मा एक दिवस दुर्गा माता को भी से। नवरात्र उत्सव का ९ दिवस मा सात्विक भोजन, उपवास अना पवित्र रव्हसेत. भगवान को याद मा नाच सेती, गर्भा गाव सेत। भगवान की याद मा रह्यव लक अंदर का पाप ख़तम होसेत, मनुष्य पावन बन से, तबच देवी देवताओं को दुनिया मा जान लायक बन सेत्। तबच्च त स्वर्ग मा जाय सकेत, ये को साठी हर एक मनुष्य पुरुषार्थ कर से। नहीं त शॉर्ट कट त सबलाच पसंद रव से। फक्त कवन ला कसेत स्वर्ग सिधार्यव। पर असो नहीं होय।
• पर  पुरानो मा आख्यानो मा येन दिवस देवी दुर्गा न् महिषासुर को वध करी होतीस. 
• तसोच भगवान राम न् रावण को वध करी होतीस वोको यादगार को रूप मा येव त्योहार मनायव जासे.  असो लिखी से। वोला आपुंन काई नहीं कर सख जन।

ये न दिवस का काही  अधिक भी यादगार सेत । जसो के
१.दसरा को दिवस मुख्य रावण को वध क-यो जासे. जरायव जासेे। येला उत्सव क् रूप मा मनायेव जासे. पर हर साल मो ठओ च  होत जा से, ये को अर्थ से पाप / दुख दिवस न दिवस बढ़तच जासे।
२. येन दिवस सीमोल्लंघन (आपल् गाव की सीमा क् बाहेर जानो) को बी महत्व से. 
३.निलकंठ पक्षी को दिसनो येन दिवस शुभ माने जासे. 
 ४. काही गाव भसी बी खेलाई जासेत. असो प्रकार लक येव त्योहार हर्षोल्लास लक मनायो जासे. 
५. पोवार समाज मा बी येव त्योहार आनंदपूर्वक मनायो जासे. येन दिवस पोवार समाज मा घर का सब लोहा का औजार जसो- टंग्या, बसला, कुदरी, पावडा, इरा, पावशी इनला धोयस्यार साफ करसेती. कहे का पोवारोंको मुख्य धंदा कास्त कारी से। एको मा काम मा आवने वाली वस्तु आती म्हणून येकी पूजा कर्यव जासे।   सायकल, मोटर सायकल, कार ला धोव सेती. अना सबकी पूजा कर सेती. वो को अर्थ से ...लोह् युग (कलयुग) मा थी सोना की दुनिया (सतयुग) मा जानो। 
६. दसरा को दिवस पोवार समाज मा दिवस बुडता (राती) विशेष व्यंजन बनायो जासे. वोला मयरी कसेती. मयरी खिचडी वानीच् बनायी जासे पर वोको मा दही टाकस्यारी खट्टी बनाव सेती. मयरी संग कोचई की पान की बडी बी बनाव सेत. दिवस बुडता मयरी ना बडी की पूजा करसेती.  बाद मा आरती करस्यारी घर का सब लोग मयरी ना बडी खासेती.  
लहाना सब लोग आपल् दून मोठो का पाय लगकर आशिर्वाद लेसेती. 
७. तसोच दसरा ला पीठ का दस दिवा बनायकर घर का सब दरवाजो पर तसोच फाटक अना चवरीपर मडाव सेती. 
८. पांडव इनन् बी अज्ञातवास क् बाद मा आपला शस्त्र शमी क् झाड परल् दसरा क् दिवसच् काहाडी होतीन. म्हणून वोको भी गुणगान हो से। ये ला च मराठी मा आपटा का पाना कसेत। दिवस बुडता आपटा का पाना सोनो को रूप मा एक दुसरो ला देयस्यारी  सोना लेव अना सोना सरखा बनो असो कसेत।  ये को च मतलब स्वर्णिम दुनिया कहो सतयुग कहो का स्वर्ग कहो जान ला भेटे असा बनो त। असो येव त्योहार मनायो जासे.       
• असो प्रकार लक दश हरा को त्योहार पोवार समाज तसोच हिन्दु लोक हर्षोल्लास लक मनाव सेती. 

 • ललित गौतम, अनूमाला, सूरत (गुजरात)  फूलचुर, गोंदिया को रहवासी।
         दिनांक. २५.१०.२०२०

दसरा D.P. Rahangdale 01

            हिंदु संस्कृती मा दसरा को खुप महत्व से. पोवार  जातीमा  दसरा को सण मोठ  धूमधाम  लका मनाय ज़ासे. त्रेतायुगमा दसरा क दिवस श्रीरामजी न  रावणला मारशान माता सीताला सोळायशान आणी होतीस .
            रावण की पत्नी मन्दोधरी या दानव का शिल्पी मयासुर की बेटी होती. ओला कौंच ऋषी न आशीर्वाद देई होतीस की तोरो घरवालो जिवंत रहे तबवरी तुमरो घरको भात अम्बानको नही. जब रावण मरेव  त भात अम्बाय गयेव वाच मयरी आय. ना कांच ऋषि न आशीर्वाद देई होतीस मणुन मन्दोधरी न भात की मयरी ना कोचहीक पानाकी बळी बनाई होतीस. रावण यव बामन कुलको होतो मणुन मयरी ला बामनीन कसेती,ना राम क्षञिय होतो ना रामका वंशज पोवार आत मणुन मयरी पोवार घरच बनाई ज़ासे.
            त्रेता युग मा राम को पूर्वज राजा रघु.ओन विस्वजीत  यज्ञ करीस खुप दान करीस. ओकजवळ कौत्स नावको गुरु पुत्र आयेव ना ओन गुरु दक्षिना देनसाती चौदा करोड  स्वर्ण मुद्रा की मांगणी  करीस तब राजा रघू ना कुबेर परा आक्रमण करीस. कुबेर हारेव तब औन शम्मी का झाळपरा स्वर्ण मुद्रा की बारीस करीस. जेतरी ओला लगत होती ओतरी लेगीस बाकीकी बाट देईस.महाभारत मा पांडव अज्ञातवासमा गया तब ऊनन आपला अस्त्र शस्त्र शम्मी  क झाळ परा ठेई होतीन ना अज्ञातवासक बादमा दसरा क दिवस अस्त्र शस्त्र की पूजा करी होतीन मणुन शस्त्र पूजा करे ज़ासे ना शम्मी का पाना सोनोको प्रतीक मणुन बाटे ज़ासे. 
          दसरा क दिवसच माय दुर्गा न महीषासुर राक्षस मारी होतीस. दसरा क दिवस आंगण मा दस इंद्रिया का शेन का दस बळा  (असत्य) ना दस दिवा की ज्योति (सत्य ) ठेयशान पुजा करे जासे.मणजे सत्य की असत्य् परा ना सच्चाई की बुराई पार जीत को त्योहार मनजे दसरा आय. सब न आपल अंदर को दसेन्द्रीय रुपी दसानन ला काबुमा आनसान *षड़रीपु (काम,क्रोध, मद,मत्सर,,लोभ, काम, क्रोध, मद, मत्सर,,लोभ,माया ) रुपी रावण ला मारे पाहिजे.*
                            ***
✍️✍️श्री.डी पी राहांगडाले गोंदिया
                         

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...