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Monday, July 27, 2020

कोरोना पर चर्चा sharda chaudhary 03



कोरोना पर चर्चा

  चंदू  :    (नहानी घर मा आंग धोवता-धोवता गाना कय रही से )थंडो थंडो पानीलक आंग धोवनं ला पायजे गाना आवं या नोको आवं गावंन ला पायजे .
 कारंजा  :  कायला बोंबलं  सेस  तं रे लहानस्या? अना कायला ईस्तो मा हात देत रहेस कसू. रोज पोंगा फिरसे तरी माहीत नहाय का?सतगरम पाणी लक आंग धोवनं.
चंदू    :   हट शायनीमाय! आंग धोवंन साती पाणी मा हात टाकनो पडंसे, ईस्तो मा थोडाकच. 
कारंजा  :  आपलीच नोको हकालुस.करुणा का फरूना से तं थंडो चीज पासून बचों असो सरकार कसे खर्रा...
चंदू   : खर्रा नही शायनीमाय. ….खरा कवनं. अना कोरोना कवनं. सांग अणिक का सांगसे सरकार?
कारंजा   :   मोला तोरो सारखी अक्कल नहाय भाऊ,अप्पड सेव .पर लागुट से कसेती.  आमने-सामने रहेलक होसे खरा. मुन तोला कसू बकसा पर वोनं लंबू को सिनेमामा  देखू नोको मुन. 
चंदू   :   तसो नही शायनीमाय, बकसा नही टी व्ही कवनं अना लंबू नही अमिताभ कवनं.  अना तसो नही होय कोरोना.
कारंजा  :  आपलीच टेरी जुपसें,भयेव गियेव का नही तं चिरकत लं पराजो. बुरखा पांघरं सेती मंग ,ना कारो पाणी वानी सजा काटनो पडसें.
चंदू   :   मूनच शायनो हिजराय तोरं पर. बुरखा नही पीपीई किट कसेत वोला. पर गीता बाचेलक फायदा नहाय तोरं सामने. भेजा पर मार से  माय को.
कारंजा  :   का कयेस?मुस्कट मा हाणून. एक बारचं तोरो शायनो  नं ढकलीतीस तं गोटा पर आदळी होती मी.
चंदू: हा हा हा (बाहेर जान साती निकलंसे)
कारंजा  :  कहान जासेस तं मुस्का बांधस्यानी ? 
चंदू : मुस्का नही मास्क कवं सेती येला. गावं मा जासू. घुसेव भेजामा. 
कारंजा :   अना जासेस गावला घनचक्कर लगावंन पर हातला शेण ट्री लागायकर जाजो. नही तं तोरो अजी जवर कम प्लेट करून. मंग नोको कवजो मोला.
चंदू  :   घनचक्कर नोहोय गावमा चक्कर लगावन जासू. शेण ट्री नही सॅनिटाइजर कवनं.  डोकसा चाट टाकीस. कम् प्लेट नइ कम्प्लेन्ट कवणं.
कारंजा  :   बंदरा वानी कायला कीचासेस तं मोरो पर. डोरा नोको बटारुस, कालको कोल्ह्या अक्कल बाटसे .आमरो जमानोमा आम्ही मोठोईन को सामने चडीचूप रवजन.अन आता का चेंडक्या टर टर करं सेती. का करणं आता? अस्सल दुन सूद को लोबच लगं से.
( असो कयकर कारंजा माय ताटला भर भात खायस्यांन खटला पर सोय गयी. )
शारदा चौधरी 
भंडारा

कोरोना को दिन की बात lata patle 03


   कोरोना को दिन की बात
      

       आम्ही सब संग जेवन करन बस्या होता तब (लता) मीन कयो अवंदा कहीं जानो आवनों नहीं भयो,ना काहीं लेनो देनो भयो बस घर माच रह्या,

   येकों परा कल्याणी को बाबुजी कसे का करबीनत अवंदा कोरोना गुन कमाई भी नहाय अना काम भी नहात,
    
          मीन कयो (लता) मोला लगसे १०,२०, हजार रूपया रवतात मी नवा कपड़ा लेयके आनती, सब डाकता अना कहीं घूमन जाता,

          तब कल्याणी का बाबुजी कसेत तु आब काहीं लेन देन को बार मा बिचारच नको करूस,
 
         तब मी (लता) चुपचाप काम करन बसी. काम भयो पर बहार निकाली त का सांगु मला रोडपर २०००० हजार रूपया दिस्या, मी परात गई अना वय पैसा उठाय के आन्यो, मी बहुत खुश भय गई, मीन कयो पैसा ठेय देवू का?पर मीन सोच्यो इनला पैसा दिस्या त कहेती का ठेय दे, कमाई नहाय काम मा आयेती,
तब मीन सोच्यों चली जासु चुपचाप ना खरेदी करके आन लेसु मी गई अना सबसाठी कपड़ा लेयके अान्यो अना सबला कपड़ा डाकन लगायो, सब न नवा कपड़ा डाकीन सब नवा कपड़ा देखके खुश भय गया, सब नवा कपड़ा डाकके फोटो निकालन बस्या  कोनी डोरा तीरपा करके, कोनी जीभ निकालके, कोनी दुय बोट देखायके फोटु निकालत होता,
    
     फोटु निकालता निकालता जे हात  मा लक मोबाइल पद्यो त मोरी झोपच उघड़ गई, देखुसु त का यो सब सपनच होतो  काहीच सच नवतो.

              सौ.लता पटले
              दिघोरी, नागपुर

फुपा ना भजी D P Rahangdale 03


         फुपा ना भजी
                            
भजी :- फुपाबाई फुपाबाई, काहां चलीस घाई घाई,
           जरा उभी त रव.
फुपा:- भजो मोरो होय नवरदेव, कव मोरी बात 
          खयाल मा ठेव,दुय दिवस पयले        
          आवजो कव,मणुन जावुन कसु.
भजी :- बीहया त चार दिवस बादमा से येतरी जलदी   
           कायकी सेत?
फुपा :- मोला भी मालुम से, पर भाई साठी पच्या 
          की घऴी ना  भोवजी साठी जरीकी साऴी 
          लेवुन कसु.
भजी :- मोला भी बिहया ला जानो से पर कोरोना 
          से ना लगीन लगावन क बेरापरच जावुन 
          कसु.
फुपा:-तोरोत ठीक से बाई, कोरोना रव नही फोरोना
         रव, पर पयले काकन बांधनला जानो पऴेना.
भजी:- तोर संग मी भी आयजावुन तबत तु काकन    
          बांधजो ना मी गाना गावुन..............
           चलवो चलवो फुपाबाई काकन बेरा भई
फुपा :- काकन क बादमा अहेर भी होयती ओको 
           गाना भी कवनो पऴे,
भजी:- कहुनना.......
  तराक पारपर झाल-या आंबा,ओका कोवरा पाना,  
  भाईकी बहीन डोमनबाई, चल बाई मंजुना राती,
  नही आवु नही आऊ मंजुना राती,
  आवुन दिवक जोती,हातमा धरुन  पच्या की घऴी
    तोर मांडोमा शोभा दिसे भारी.
फुपा:-  चांगलो से बाई. आपुन दुही जनी संगज
            जाबीन. बिहया मा ज़ास्त लोक नही 
           पाहीजे काहेकी कोरोनाको भेव लगसे. 
           लाहान टुरुपोटु ना बुऴगा इनला लवकर 
           दऴपसे खरा.
भजी :- ओक साठी उपाय भी सेना. 
          बिहया मा पाच पन्नास च पाहीजे बराती
          ज़ास्त नोको बुलावो नहीत होयत घाती।।
          संगमा ठेवो मास्क नाकतोंड झाकन साती
          सुरक्षित अंतर ठेवो कोरोना से भारी अती।।
          कोरोना पासुन सबला मिल जाए मुक्ती 
          पार पऴे बिहया ना मण ला मिले शांती।।
                            
डी पी राहांगडाले 
     गोंदिया

समजदारी y c chaudhary 03


           समजदारी
(राधको प्रवेश हातमाको झाड़ू जमीनपर फेकत बससे)
राधा- मरगयी वो माय ,योव टोंगराको दुखनो  काही कमी नही होय. कायकी दवाई देसेती डाँक्टर बध्या .रती भरको फायदा नाहाय.

श्रीधर-काजक भयोव तवो ,काहे तोंड बजावसेस.

राधा-आता डाँक्टर बदबिन कसू, येन डाँक्टरकं हतमा बिमारी नही भेटी.तसोच दुखसे मोरो टोंगरा.

श्रीधर-आता डाँक्टर काजक करे तवो.प्राणायाम सांगी होतिस  ना .सकारी सुर्य प्रकाशमा बसजो कव.त तू... बससेसका कसू मी.

राधा-आता बस हद भय गयी तुम्हरी.डाँक्टर को नाव लेयव का काराका पिवरा होसेव.

श्रीधर-आताका डाँक्टरला प्राणायाम ना आसन की गोली देये. .एक एक गोली खात जाजो ना प्राणायाम भयोव कवजो.दुसरी गोलीमा लोमविलोम.सुर्य खाटपरा निगसे.

राधा-का कयात.गोलिभी मांगती परं , काजक करू भेटतं नही. ना सकारी झोप नही खुलं .

श्रीधर -कशी खुले ,मंग डी विट्यामिन कसी भेटे कसू मी.

राधा -तुम्हला कासे ,सकारी उठेव का योव एकच काम. नाक दाबनको .पडे़ काड़ीला हात नही लगावो.काही कयीस त मीरची झोंमसे.

श्रीधर-वारे वा !एक से कामवाली ,अखीन दुसरी ठेवना .पर तोंड नोको बजावू.चल तयारी कर ,आपलोला कासे तू कवजो वू डाँक्टर ,पर डाँक्टर सांगे तसो करजो का ?
राधा-चलोत सही.
(आपली तयारी करसेती दवाखाना जासेती)

वाय सी.चौधरी
गोंदिया

एक पत्र असो बी shekharam yedekar 03

एक पत्र असो बी
पत्ररुपी विनोदी संभाषण
(यव् पत्र मी मोर् मालुटोलावाल् जीजाजीला १९/९/९६ ला लिखेव होतो वु उनकच घर् भेटेव, वको पोवारी अनुवाद) 
                                       सिंदीपार  
                                  १९/९/१९९६
आदरणीय जीजाजी,
तुमला, शेखराम भाऊ येळेकर, करलका सा. न. वि. वि. 
मी पोराला तुमर् गाव् जावु कयेवत् इत् मोर् बाबुजीकी पोराक् दिवस मनमाने तब्येत बिघडी होती. जर क् माऱ्या(ताप क् माऱ्या) मोरो बाबुजी *बाबा गा बाबा गा* तसोच मोर् मायला *अ, बाब्या की माय, अव् कहान गयीस व्, अव् कहान गयीस व्* कयकन मनमाने कनावत होता. मोरी माय ना मी उनक् खाटजवरच बसकन रवत होता. तुमलात् मंग मालुमच से, मोर् बाबुजीला काही भयेवत् पुरो घर हिलाय टाकसेत.  मी खरी खुरीच सांगुसु, *मी खोटो नही बोलु, खोटो बोले वको पोट दुखे*
यन हालातमा मी तुमर् गाव् मी नही आयेव पन तुमी काय नही आयात, आमर् गाव्? तुमी त् आवनला पायजे होतो. आमी सप्पाई तुमरी कावरावानी बाट देखत होता. तुमर् साती आमी कटराई भेंडी, लवकी, बारमासी लसुन का पान ना कोहरा तोडकन ठेया होता. इतन बढीया *भेंडीकी कळी ना कोचईकी बळी* खानकी मनमाने मज्या आवसे.
 *जो बोले खोटो, वकी खराब निकले फोटो*
इतन पयले त (रोवणाक् बेरा) मनमाने पानी आयेव पन आब् त् पानीन् आवनको नावच् सोड देयीस. वको कारो टोंड भयेव. वऱ्याक बांदीको धान पोटऱ्या आय रही से, पन पानी नाहायत् मर रही से. वन् मारबतला, राई रोग, मासी मोंगसा लिजाय टाक गे मारबत मनुन गावका सप्पाई जन मनमाने बोंबल्या पन वा बी कारटोंडीच निकली, वन् रोगराई त् सोडो, मासी मोंगसाबी नही लिजाईस ना पानी बी नही पटाईस. कारटोंडी कहान की. 
*खोटो बोले वको पोट दुखे*
पानी आये पायजे मनुन मोरो कानोबाला नारेन कबलकन भयेव. मोर् मायन् त् पाच नारेनको फुलोरा बांधनको कबलीस. तुमला त् मालुमच से काही कबलनसाती मोरी माय बिलकुल कुचराई नही कर्. यतरो कबलकनबी वन् कानोबाला आमरी दया नही  आयी, रही रहे कहान बी, आपली पाऊल बजावत. काजरतीजला बी पाच नारेनको फुलोरा कबलकन भयेव तरी पानीको नावच नही. *खोटो बोले वको पोट दुखे*
गणपतीबाप्पा ला बी दया नही आयी, वु बी आपल् उंदीरपर बसकन रिकामोच आयेव. 
अशी बात से, तरी इतन गावकन मनमाने मज्या आवसे. जोर जोरलका बोंबलनला भेटसे, बंडरा खेदाळनला भेटसे, तरामा पोवनला भेटसे, जंगलमा हिंडनला भेटसे, हिड्डा(हिरडा) खानला भेटसे. मंग मज्या मज्या. तुमीच आव मनुन सागुसु, *जो खाये हिड्डा वको नही दुख नड्डा*, *खोटो बोले वको पोट दुखे* 
बडेगाववाल् बडोबाऊकी बी तब्येत बहुत दिसपासून खराब से कसेत. उनक् मुलाकातला जाऊ कयेव त् पिंडकेपारक् जंगलमा बाघको भेव सांगसेत, बाघसाती पिंजरा बी मंडाईसेन कसेत. साकोली करलका जाऊ कयेवत् साकोलीक् जंगलमा आस्वलको भेव सांगसेत. जीतन उतन भेवच भेव. काहीच समजमा नही आव्. का करसेव जान देव. 
आमर् खेतक् धुरा ला भेंडी त् मनमाने फरी सेत पन बंडराइनला झोमाळा झाेमी से. मनमाने आवसेत ना बुर बार करकन जासेत. एक दिवस त् बंडराक् भक्क्याइनको करप आयेव. मी उनला गारी देकन  *सुले रे सुले* कयकन उनला  खेदाळन गयेव त् , सप्पा बंडरा त मोर भेवलका पराया पन  एक भक्या दातकाळा काहाळकन खेकसेव ना मोरोच रगदा काहाळीस, मी त वक भेवलका पँटला पाय लगायकन मनमाने परयेव, ना पराता पराता खऱ्यानवाल् बांदीक खांडपरा पाय घसरकन झोडपासारको पळेव. मोरो टोंगराबी फुटेव. का सांगु, मनमाने रोयेवजी, मोरी गत मोलाच मालुम. जानदेव, का सांगु तुमलाआपली करम कहानी. अशी गोष्ट से जीजाजी. *खोटो बोले वको पोट दुखे*
जानदेव जो भयेवत् भयेव, पन पानी नही आयेव. 
*असी गोष्ट से मनुन, बंडराइनला पुष्टी से*
बडीबाईला ना तुमला नमस्कार
जय सिंदीपार, जय मालुटोला
तुमरोच
शेखर
शेखराम परसराम येळेकर नागपूर १९/९/१९९६ अनुवाद २७/७/२०२०

Monday, July 20, 2020

बारमासी mahendrakumar patle 02


 बारमासी

(राधाको घरमा वोकी बहू खाटपर सोयी रव्हसे वोन् समय शेजारीणबाई मांदी बसनला आयेवपरकी बातचित)

कमला:- अवो राधे कहा सेस त् वो? तोला त् बाई घडीभरकी फुरसत नही भेट्?

राधा:- का करू कमले, "आपला नशिबच गांडू त् का करे पांडू".

कमला:- तू ना बाई कभी सिधो ढंगलक सांगजो त् कसम! 

राधा:- मंग का सांगू तोला टुराको बिह्या करके आनेव तबी मी बन्यारीन सारखोच काम कर रही सेव म्हुन.

कमला:- जान दे बाई, सांग तोरी बहू कहा गयी से त्? डोराला काही चोयी नही से दुय दिन पासून.

राधा:- पडी रहे पाठा....नही त् काम काजक से वोला, "डेडरा भर खानको ना टेटनसा रव्हन को."

कमला:- असी कसी बाई तोरी बहू? कायी सिकायीसेस का नही त् वोको मायन्? वोन्  कुनबिंकी, बहू बाई रच रच काम करसेत तबी हाय नही कव्हत.

राधा:- अना आमरी बहू देखो, जरासो काम करीस का फुटेव बोका. तसी बारमासी बिमारच से. अजकालको बहूइनला कामको मोठो नेट लग् से बाई.

कमला:- सही बात से बाई तोरी. आबकी बहू शेनमाकी इल्लीच रव्ह सेत. आमरो राजमा असो नोव्हतो बाई.

(वोतोमाच राधाको घरवालो सखाराम खेतलक आव् से)

सखाराम:- अवो राधे, घरकी बात बाहेर सांगके तोला का भेट् से वो. जब तू खटलापर पडी होतीस त वा बहूच धायी होती ना तोरी....वोनच सब सेवापानी करीस.

राधा:- तुम्ही ना हमेशा बहूकोच पक्ष लेसेव.

सखाराम:- मी सिरिप सत्यकोच पक्ष लेसू. कालपासून बहूबाईला अच्छो नही लग्. त् वोकी जरासी खबर बात ले. इत का गोष्टी करत बसिस? ध्यानमा ठेव हमेशा आपलाच धावसेत दुजा नही.

राधा:- तुमरी बात बी बरोबरच से जी, पर मीच एकटी कहा कहा देखू.

सखाराम:- तू आब् आपलो बहूको तब्येतकर देख, बाकी मी देख लेवू.

कमला:-(आपली दाल गलन की नही यव समजेव पर घर जान बसी.) जासू बाई आपलो घर, बहुत भयी मांदी.

महेंद्रकुमार ईश्वरलाल पटले(ऋतुराज), किडंगीपार 
ता. २०/०७/२०२०

नोको रोवु माय मोरी shekhramji yedekar 02



नोको रोवु माय मोरी

लेखक:- डॉ. शेखराम परसराम येळेकर
अंक पहिलो

(उनारोका दिवस, रातक १०बजे की बेरा, बंडू भाऊ आंगणमा खाट टाकस्यानी लेटेव होतो. वोतमाच रामु काकान टवकारा देईस)
बंडू:- कहान जासेवत् काकाजी
रामु:- जेवन भयोवत् पाय मोकरा करनला आयेव गा.
बंडू:- आवो ना काकाजी बसोनाजी. 
रामु:-  नही गा, सकारी आंबा उतरावनका सेती, कोनी उतरावनेवाला भेटसेती का मनुन देखुसु. 
बंडु :- मोडकुकाका उतरावसे पन वु बियायी क् गाव् गयी से. 
रामु:- जानदे बटाला गयेव त्. केताक बज्या गा बंडु. 
बंडू:- १० बज्या ना काकाजी. 
रामु:- जेवन भयोव का त? 
बंडु:- हो आबच भयेवना काकाजी. 
रामु:- काजक मालपाणी होतोत्
बंडु:- अं होतो असोच. बाल्याक मायन्  मस्त आंबाको रस ना घीवारी बनायीस, डटके जमायव मनुन  यन खाटपर लेटी सेव. अभारकन देखकन बुडगीकी खाट देखुसु. रातभर या बुडगी चीच का पाला हतरावत रवसे असी मोरी स्यायनी माय कवत होती. मनुन देखुसु येन् बुडगी जवर मोरी स्यायनी चोवसे का त् ? मनुन एकदुय दिवस आड अभारमा देखत रवुसु
रामु:- देख बुगी, तोर् स्यायनीला,  चोयीत् मोरीबी रामरामायी सांग देजो. मी जासु, कोनी आंबा उतरावनेवाला भेटसेती का त् देखुसु गावमा.
*(रामु गावमा गयेव ना बंडु ला गयरी निंद लग गयी. बंडुला सपनमा वक् स्यायनीन दर्शन देयीस, हाका मारन बसी.)*
स्यायनी:- बंडु अ बंडु, का करसेस त. 
बंडु:-  आयीस का व् मोरी स्यायनी, कसोटी से व् कुबड तोरो, टेकनकी काडी बी नही चोव् तोर् हातमा, आव बस मोर् जवर. मी जरासो पोवार समाज ना संस्कृतीक् बारामा लिखुसु. 
स्यायनी:- अरे व्वा, मोरो नाती त आब् समाजसुधारकच भयेव. 
बंडु:- मोरो सोड दे , जरासी करनो पडसे समाजसेवा. तू कशी सेस त व् स्वर्गमा. वन् अभारमाक बुडगी संग तोरी मुलाकात भयी का नही त? वा बुडगी रोज रोज रातमा चिचकोपाला हतरावसे कसेत, या गोष्ट खरी सेका? स्यायनी तू असी करजो, वक् खाटजवर  आपली खाट पाडजो ना जांबुरका पाला हतरावजो, मनजे वक् दुन तोरी खाट लवकर हतरायकन होये. स्वर्गमा बहुत पॉवरफुल होल्टवाला बल रवसे कसेत. वहानलक बल चालुबंद करजो मंग मी समज जावु या मोरी स्यायनी आय मनुन. पन तोरी टेकनकी काडी नोको फेकजो वऱ्यालक, नहीत् फोडजो मोरो डोस्का.
स्यायनी:- (मुसुर मुसुर हासन बसी) 
ह ह ह.. 
बंडु:- कायला मुसुर मुसुर हाससेस त् व् स्यायनीमाय. 
स्यायनी:- पयले दुन आब् तोरो दिमाक ज्यादा चलसे मनुन, तसोच मोरो नाती समाजसुधारक बन रही से मनुन मोला खुशी होसे. 
(अंक दुसरो)

बंडु:- काव् स्यायनी, समाजसुधारक बननो का बुरी बात से का? 
स्यायनी:- नही मोर् नाती, बिल्कुल बुरी बात नाहाय. समाजसेवा सारखो साजरो काम दुनिया मा कोनतोच नही. पन तू कोणतो समाजसुधारणा को काम करसेस मोर् नाती. 
बंडु:- मी समाज जनक् मनमा प्रेरणाकी ज्योत जगावनसाती हातमा प्रेरणा की ज्योत धरनको बिडाच उचली सेव.
बुडगी:- बंडु तू सबक् मनमा प्रेरणाकी ज्योत जलावनसाती हातमा ज्योतच धर, मोठो टेंबा नोको धरुस, मनजे भयेव.
बंडु:- अव स्यायनी, समाजहितसाती हातमा टेंबा बी धरनो पडसे. 
स्यायनी:-अरे बेटा, तोरो गलत वापर होय रही से. तोला लगसे घरघरमा ज्योत जलावनसाती हिंडुसु पन तू ज्योत जलावनसाती नहीत् घर जलावनसाती हिंडसेस. 
बंडु:- बयी भयीस काव्,अशी कशी कसेसव स्यायनी? तोरो गलत से. 
स्यायनी:- नही मोर् नाती नही, तोरो मन साफ से बेटा, तू दुसरोक घरमा प्रेरणा की ज्योत जलावसेस  या बात बराबर से पन आपल् मायको दिवो कायला बुजावसेस, मोर् सोन्या. तोरच सरीका टुरु पोटु ला सामने करस्यानी आपलच मायको अस्तित्व मिटावनको षडयंत्र रच रही सेस. पोवारी मायको  अस्तित्व मिटाय रही सेस. 
बंडु:- नही स्यायनी असो नही होय सिक. 
स्यायनी:- तू पोवार तोरी माय पोवारी बोली पोवारी पन तोला पोवारी लिखनकी उजागरी नाहाय. पवार लिखो कसेत ना तोला! तू हो मा हो मिलावसेस. धिक्कार से तोरो जिंदगानीपर. तोरा साथी आमला काही फरक नही पड कसेत, संस्कृतीक् अस्तित्व पर आघात सबदुन मोठो आघात रवसे बेटा. चारपाच जनन मिलस्यारी पोवार को पवार करस्यानी *नवपवार* अशी जात बदलायीन  बदलायीनत बदलायीन किताबमा पोवारी नावला जराशी जागा नही देयीन.पवारी ना पवारीच लिनक्स कोशिश करीन. पोवारका  बेटा बी मोरो का जासे? असो सोचकन चुपच बस्या. अस सोच न् साजर् सागुनक् लाकुडला उधयी को किडा लगेव असोच भयोव. पयले बी इतिहास संग छेडछाड भयी आब् होय रही से. 
तोर् मायको गुणगान वय नही करत, तेरा तथाकथित नेता बी नही करत.  पोवारी शब्द को पोवारइनक मनमा नफरत फैलावनकी साजीस होय रही से. एक लिखा सौ बखा, कयकन      तुमीच गलत संभ्रम मा पड जावो बेटा. 
जेला माय को नाव गलत लगसे वला का कये पाहिजे? यवच समजमा नही आव्.
बंडु:- स्यायनी माय, तोरी बात सोळाना सही से. तुन् मोरा डेरा खोलेस. मी बी त् उनक टोलीमा रयकन बाजा बजायेव. आपल पोवारी संग गलत व्यवहार करेव असो मोला लगसे. आब मी का करु. मोरी पोवारी माय मोला माफ नही करनकीव् स्यायनी. 
स्यायनी:- असो नोको सोचुस मोर् नाती. मोरो जीव दुकसे तोर् साती. तसो मोला मालुम से तोर् पोवारी माय मोठ मन की से, वको हृदय डगर से. वा तोला माफ करे, सिर्फ वको अस्तित्व नोको मिटावु ना मिटावन् वालोको साथ बी नोको देवु, मनजे भयेव. 
बंडु:- स्यायनी मी का कसु, मोर हातलका मोठी गलती होत होती. दुसर् क् माय की सेवा करनो साजरी बात से पन,  आपलच मायक सातीपर लात मारस्यानी आपलच मायको अस्तित्व मिटावनो यक् सारखो पाप यन दुनियामा कोणतेच नही. या बात मोला आब समजी. पोवारीको अस्तित्व मिटायकन पवार करनको कारस्थान आबबी मोर समजमा नही आय रही से. 
(वोतमाच नाराज नाराज पोवारी माय रोवत रोवत् आपल पदरलका डोरा पुसत प्रकट भयी) 
पोवारी माय:- बेटी तोरी स्यायनी कसे वा बात सोळाना सच से. मोरो संग सौतेलो व्यवहार होय रही से. मोर् बेटाइनला पोवारी नाव कायला खटकसे यवच समजमा नही आव. बेटा बंडु, तू बी त् बयकेव होतोस , मोलाच भुलस्यानी मोरचा आंगनमा दुसरोक् मायको दिवाना भयेव होतोस. दुसरा मोर् पोवारी नावकी नफरत करसेतच पन मोरा बेटा बेटी बी नफरत करसेत यकोच मोला दर्द से. पैसावाल् जवर पैसा मोजनला टाईम नाहाय, कास्तकारला काम धंदालक् फुरसत नाहाय, ड्युटीवालला ड्युटीक् नावपर फुरसत नाहाय, यको फायदा कारस्थानी  उठावसेत. लुगडावाली माय शहरमा आयी त वक् संग मोलकरीन सारखो व्यवहार नोको करो, बेटा. 
बंडु:- माय माय मोरी पोवारी माय, नोको रोवुस मोरी माय, तोरो अस्तित्व मीटावनक कारस्थानमा मी कबच सम्मिलीत नही होवु , यव बचन देसु. 
पोवारी माय:-बेटा मोरी लाज रख, तोला मोरो आशीर्वाद से. 
स्यायनी:- सोन्या मोरो बी तोला आशीर्वाद से. 
(पोवारी माय ना स्यायनी माय अंतरध्यान भयी. तसीच बंडु की निंद खुली.) 
बंडु:- (बंडु जोरलका नारा लगावसे) 
माय मोरी नोको रुसु, 
तोरा आसु त् मोरा आसु, 

माय बढावबिन तोरो मान
खतम करबीन कारस्थान
(पडदा पडसे)
डॉ. शेखराम परसराम येळेकर (सिंदीपार) नागपूर
२०/७/२०२०

मुसर D.P.Rahangdale 02


          मुसर
( हरबा नावको एक कुणबी होतो, वू मोठो भाविक 
होतो, ओक बायको को नाव होतो सुंदरी वा बऴि 
कनका डाईन होती, एक दिवस ऊनक घर एक 
साधु बाबा आयेव  तब.................................)
हरबा' :- आवो माहाराज जी, बसो. बहुत दिवस 
           भया  तुमरा दर्शन भयाच नही. अरे कांहा
            गयीस रे  माहाराज आया सेती. पाय 
            धोवन पाणी आण. 
(पायपाणी भयेव,आसन देईस ना लाहानांग गयेव)
हरबा :- अरे बहुत दिवस मा माहाराज आयी से 
           काही  तरण पुरण बनाय ले कसु.
सुंदरी :- कायको माहाराज, उन्हाळो का दिवस 
           सेती.यतर  गर्मीमा चुलो कोन पेटाए कसु,
           पर तुमी  कसेव त दुकान परलक काही    
           मालमसाला  ना सामान आनदेव कसु.
हरबा :- ठिक से, दे झोरा दुकान पर जासु.
   (हरबा दुकान पर जासे, सुंदरी मोठांग जायशान )
सुंदरी :- तुमी कायला आयात माहाराज,आमर 
           घरको मुराट्‌या ढिवर घर मुसर आनन गयी   
           से,आमर  घर कोणी आया त उनला मुसर
          लक मारसे ना उनकी मालमता हिसकसे.
साभु :- वायह्‌याद से, मी पराय जासु बाबा.
सुंदरी :- वए गली करलका आयेती, तुमी लाहांनाग
           लका पराय जाव तुमरो जान बचजाए.
(साधु माहाराज परासे हरबा सामान लेकर आवसे )
हरबा :- अरे या सामान धर, ना काही बनाए ले 
           कसु पर माहाराज काहां गयेव दिस नहीना.
सुंदरी :- काय को माहाराज आय. मोला मुसर च   
           मांग.नाहाय कहेव त  पराय गयेव.
हरबा :-देयदेन को होतो जसो खराट्‌या माहाराज 
          ला   खराटा, गाडगे बाबाला गाडगा,तसो 
          एव  मुसर्‌या महाराज होए.
सुंदरी :-  तुमला गरज रहे त लेयदेवना मुसर. 
हरबा :-  दे ऊ मुसर लेयदेसु.
(मुसर माहाराज ला देखायशान जोरलक कसे, 
माहाराज मुसर धरो, मुसर ला देखशानी माहाराज भलतोच समजसे ना सुटमुंडा करसे.)

डी पी राहांगडाले
    गोंदिया

मतदान chiranjiv bisen 02


                मतदान
                  
         बात तब की आय जब मतपत्र (बायलट पेपर) ल् मतदान होत होतो. असोच एक लोकसभा क् चुनाव मा तीन दोस्त वोट देयकर आया.अना आपस मा चर्चा करन लग्या. 

१ लो दोस्त - अबे, इमानदारी ल् सांगो कोण कोणला वोट देईस त्? 

२ रो दोस्त - मी सांगू का, मोला पंजा वोलो न् १०० रूपया, घडी वालो न् १०० रूपया अना फूल वालो न् ५० रूपया देई होतीन. मी सोचेव कोणी को फुकट नही खाये पायजे. मून मीन् तीनही झनला एक एक वोट देय कर आयेव. 

३ रो दोस्त- तोरी त् चांगली २५० रूपया की कमाई भय गई. मोला नही भेट्या भाऊ एकबी पैसा. तसा मी वोट का पैसा लेव बी नही. 

१ लो दोस्त - पर वोट कोणला देयेस ऊत् सांग? 

३ रो दोस्त - कोनला मंजे. कोणीकाच पैसा नही भेट्या त् कोणीलाच वोट नही देयेव. कोरोच पेटीमा टाक देयेव. 

२ रो दोस्त - चांगलो करेस कोणीलाच नही देयेस त्. तसो वोट देयेव ल् काही फायदा बी नाहाय. आता तू सांग भाऊ, कोणला देयेस त् वोट? 

१ लो दोस्त - मोला बी दुय झन करल पैसा भेट्या. पर मीन् बिचार करेव सब झन चुनकर आवन साती उभा भया सेती. कोणीको अपमान नही करें पाहिजे. मून मीन् ७ उमेदवार होता उनला सबला एक एक वोट देय देयो. 

            चिरंजीव बिसेन 
                     गोंदिया.

आबं जासू y.c. Chaudhary 02



       आबं जासू

राधा-अहो आयक्यात का?कन्हारकं पारपरको आंबा फरी सेना.आंबा हो-या खासेती,वय तोड़लेता कसू.
 
श्रीधर-मग का कवनो से.
राधा-बाईघर पठाय देता  ,गोड़ कड़ी, आमटी बनाया रव्हता कसू.

श्रीधर-मी बापकं राजमा आंबाक झाड़पर चगेंव नही ,आता चंगू कसेस,

राधा-आयको नही ना आपलीच जुपसेव.

श्रीधर-ना पड़ेव झाड़परलं त, चारानाको आंबासाठी बाराआना खर्च करू कसेस.
 
राधा-तसो नही कव्ह मी.गणू सेना,ओला पठावता कसू.

श्रीधर-उ झखड़पर चंगे कसेस.
सिड़ीपर चंगसेत खाल्या देख नही.

राधा-मग तुम्ही आनोका?जरासो सेंग तोड़नला स्टुलपर उभा होसेव त लवर -लवर कापसेव.
गणूच आने झोड़श्यानी.

श्रीधर-सांगजो पर लक्षपुर्वक चंगजो ना उतरजो कवजो नहीत लेनकं देनमा पड़ जाय .
(ओतमाच गणू टंग्या धरश्यानी आवसे)

राधा-टाईमपरच आयेसरे.
गणू- कोनतो काम करनको से तजी.

राधा-कन्हारपरका आंबा तोड़नका होता.ना तुभी लिजाय रव्हतोस.

गणू-आब जासू ना आनुसूजी.

श्रीधर-जरा हिसाबलं चंगजो ,बांभुड़ा सेती झाड़पर.

गणू-असा केतरा झाड देखेवजी .बटाला झोड़श्यानीच आणुसू.

राधा-हो हो कसाहि आण पर आण.
(गणू जासे थोडो टाईममा धावत आवसे)

श्रीधर-काजक भयोव तगा. बाघ मंग धायवानी परात आयेस.

गणू-का सांगूजी आंबाको खादाच पड़ेव ईलेक्टीकं वायरपर ईसतोको भपका भयव ना वायर टुटेव.

श्रीधर-हट बटा अटबैल्या तोरो काम असोच से.आता आयी ना पंचाईत.येलातं बस बाईघर पठाय देता ना आमटी खाय लेता.
आता दंड भरनो पडे़. 

राधा-खरीच तोला नाव शोभसेरे 
बेकारच सांगेव तोला.बजारमाका 
लेया रव्हतात बेस भयोव रव्हतो.
(कार्य कुसलता ओळखश्यानी
काम सांगो.नहीत पसतावनकी
पारी आवसे)

वाय सी चौधरी
गोंदिया
दि.२०/ ०७/२०२०

Monday, July 13, 2020

कसी बनी मामाजी mahendrakumar patle 01


   कसी बनी मामाजी

(शुक्रवारको आमगाव बैल बजारलक आयेवको बादमा तीन बिहाईको जेवणको पंगतपरको संवाद..... 
स्थान:- चतुरजीको टुराकी ससराल )

रामाजी:- अज कयी दिवसको बाद कटारकी श्याक खायके असी आत्मा तृप्त भयी.

गोमाजी:- बरोबर कह्यात बिहाई, अज त् खानोमा मज्या आय गयी. 

चतुरजी:- मोरो बहूको हातमा जादुच से बिहाई, मोला त् इनको हातकी श्याक खायके मोरो मायकी याद आय जासे.

रामाजी:- कायी बी सांगो बिहाई, पर असी झक्कास श्याक तुमरी टुरी भी नही बनाव्. 

गोमाजी:- बिहाई तुमरी भी त् टुरी भी तसीच से जी, कभी श्याक खारी बनाय देसे, त् कभी अलोनी.

चतुरजी:- बिहाई खोट त् तुमरोमाच से जी. कभी बजारलक कायी चांगली भाजी आनो नही, ना बहू इनला खोट देसेव.

गोमाजी:- खरी कह्यात बिहाई, ये रामाभाऊ त् बजार सरेव परच बजार करनला जासेत; ना आनसेत दुय रूपयाका चार किलो भेदरा.

रामाजी:- येती बढाई सांगो नोको बिहाई, तुम्ही त् शुड्डू  का पैसा बच्याच त् आनसेव बजार, नही त् दुकानदारको सडेव पडेवच सही.

चतुरजी:- तुम्ही दुही बिहाई ना,  एक नंबरका पैसा का चोचल्या सेव.

रामाजी:- जान देयेव बिहाई, तसी आमरीच टुरी शहानी से. म्हुन तुम्ही येतरी मोठी मोठी बात् सांगसेव.

बहूबाई:- त् सांगो, "कसी बनी मामाजी पिकेव कटार की श्याक......?"

सब बिहाई:- बडी मिठी, बडी मिठी.
********************************
महेंद्रकुमार ईश्वरलाल पटले (ऋतुराज)
ता. १३/०७/२०२०

टूरा टूरी ला देखन गयो पर kalyani patle 01


 टूरा टुरी ला देखन गयो पर

माय: चलो जल्दी जल्दी तयारी करो तूमला टुरी देखन जानो से नहीं त मोटर निकल जाये.

फुफा: हव मी अच्छी तयारी करूसू, मी टुरा की फुफा आव ना काही मोरो भी रूबाब पड़े पाहीजे.

टूरा: तुम्ही कांता मावसी आव ना, तुम्हारा केस कारा कसा भया.

मावसी: मीन अजच केसंला वू का कसेत रे वोला........  टाय लगायो.

टूरा: मावसी टाय नहीं डाय.

    (टुरी को घर आवनो पर)
(टूरी को माय ला आय क नो मा दिकत रवसे)
माय: आवो बाई बसो आवो

फुफा: भाऊ गीन कहा गया त.

माय: नहीं बाई मी कहीं नहीं जाव मी घरच रवुसू.

फुफा: टुरी कहा सेत बुलावोना.

माय: नहीं बाई आमला एकच टुरी से.

मावसी: (जोर लक) टुरी ला बुलावो कयो.
           (टुरी आवसे)
फुफा: काजक नाव सेत बाई

टुरी: दार भात खाई.

मावसी: कहातक पढ़ी सेसत बाई.

टुरी: अर्धो दिन तक पढ़ी.
 (अर्धो दिन=१२ वरी)
टूरा: तोला गाना आव से.

टुरी: हव.

टूरा: गायके देखाव.

टुरी: (कारो चश्मा लगायके) गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा...........
  
     कु.कल्याणी पटले
      दिघोरी, नागपुर

समझदारी hirdilalji thakre 01


               समजदारी 
एक बरबसपुरा गाव मा एक वकील साहाब
रव्हसेत ,,,,वकील साहाब ला एक अटर्णी की आवश्यकता रव्हसे,,,,, इतवार छुट्टी को दिवस वकील साहाब अटर्णी को तलास मा गाँव गाँव फीरत रव्हसेत,,,, ,फीरता फीरता भजियापार को आखरपर पंहुँच जासेत,,,,, भजियापार को आखरपर चाँय खर्रा की दुकान सुरू होती ,,,,,,एक दुकानपर हिरदीलाल नाव को एक आदमी ऊभो होतो,,,,,, कारो प्यांट पांढरो शर्ट, बाल हिप्पीकट, कव्हन को मतलब, बेलबांटम हिप्पीकट अमिताभ बच्चन चकाचक,,,,, वकील साहाब समज गया येव माणुस आपलो काम को से,,,, अटर्णी को काम बिलकुल सावधानी लक कर सकसे !!
           वकील साहाब हिरदीलाल जवर गया दुही हात जोडकर भाऊ राम राम जी,,,,,, हिरदीलाल दुही हात जोडकर जय राजा भोज जय माहामाया गडकालीका,,,,, हिरदीलाल कसे सांगोजी भाऊ कसो आवनो भयेव,,,, वकील साहाब कसे मोला एक अटर्णी की आवश्यकता से अना येन काम साती तुम्ही बिलकुल परफेक्ट सेव तुम्ही काम करो का जी,,,,,, हिरदीलाल कसे भाऊ आपलोला पैसा कमावनो से,,,,, काम करनला कायकी शरम ना लाँज काम रे भयी काम,,,,,, दुहीजन मा बातचित भयी पर महत्वपूर्ण बात वकील साहाब न हिरदीलाल ला पढाई लिखाई नही खबर लेईस,,,,, हिरदीलाल सोमवार पासून डिवटी पर सुरु!! 
           सोमवार ला बरोबर 9 बजे वकील साहाब को घर् जायकर हिरदीलाल कसे सर नमस्कार मी डिवटी पर हाजर सेव तुम्ही हुकूम करो जी,,,,,,, वकील साहाब कसे हिरदीलाल आब आता कचेरीला टाइम से बाजु को दुकान लक 10 रु की चिल्लर आणले,,,,,, वकील साहाब न 10 रु की नोट देईस हिरदीलाल दुकानपर गयेव दुकानदाराला चिल्लर मांगीस,,,,,, ,दुकानदार कसे 1 2 का सिक्का देऊका 5 5 का दुय देऊ, हिरदीलाल ला समज नही आयेव 5+5 दस होसेत,,,,, वकील साहाब ला खबर लेसे 5 5 का दुय आनु का?  ,,वकील साहाब कसे आणले,,,,,
         दुसरो दिवस वकील साहाब अटर्णी ला कसे ,,,,,, हिरदीलाल तोला मोरो एक काम करनो पडे करजो का,,,,, हिरदीलाल कसे साहाब सिर्फ काम सांगो जी,,,, वकील साहाब कसे मोला एक टुरी से जी भाऊ वोको बिह्याको टेंनसन से जी भाऊ,,,, टुरी बहुत लीखी पडी से त मगं आपलोला टुरा भी लिखेव पडेवच पायजे,,,,,  अना महत्त्वकी बात टुरा 30 साल को पायजे असो काम से जी भाऊ,,,,, हिरदीलाल कसे साहाब टुरा गुणवान बुद्धीमान शीलवाण देखु जमत पावत लक 30 साल को देखु अना नही मीलेव अगर नही मिलेव 30 साल को त मगं,,,,, वकील साहाब कसे वापस आय जाजो सकारी देखबीन,,,, हिरदीलाल कसे साहाब एकच कामला दस गंन जानो ऊचित नाहाय,,,, मोरो हिसाब लक गुणवान बुद्धिमान देखु जमत पावत लक 30 साल को भी देखु अगर 30 साल को नही भेटेव त बटाला 15,15 ,साल का दुय टुरा जमाकर आऊ पर वापस नही आव जी,,,,,, वकील साहाब कसे 15,15 ,साल का दुय नही चलत,,,, हिरदीलाल कसे साहाब जब 5,5, का दुय सिक्का चलसेत त मंग 15 ,15 ,साल का दुय जवाई काहे नही चलत?  वकील साहाब समजगयेव की हिरदीलाल पुरो अठ्ठया को अठ्ठयाच से जी येला काही समजदारी नाहाय असो मोला लगसे!!
           येकोपर लक मोला असो बोध होसे,,,,, जसी स्थिती आहे तशा परि राहे कौतुक ते पाहे संचिताचे,,,,, बुद्धिको अना बेलबांटम हिप्पीकट अमिताभ बच्चन चकाचक को काही संबध नाहाय,,,,, चांगला ऊच्चो श्रेणी का कपडा डाकने वालो आदमी बुद्धिजीवी रहे येव अनुमान लगावनो गलत होय सकसे,,,,,,, अना फाटेव कपडा टाकनेवालो अणपड रहे येव अनुमान लगावनो भी गलत से जी भाऊ माहामाया गडकालीका सबको कल्याण करे जय राजा भोज 
                  
       श्री हिरदीलाल नेतरामजी ठाकरे 
पोवार समाज एकता मंच परिवार पुर्व नागपुर

आंबा को भाव chiranjiv bisen 01


             आंबा को भाव
               
(सिताराम बजार मा आंबा लेन जासे) 

सिताराम - भाऊ, आंबा का भाव देयात? 

दुकानदार - दस रूप्या मा बीस लिजाव. 

सिताराम- असो करो, मोला २५ रूप्या का ५० देय देव. 

दुकानदार - नही भाऊ, दस रूप्या का बीस मिलेती. वोक् दुन कम या जादा नाही. 

सिताराम - वुचत् कसू, १० का २० वोक् मानल् २५ का ५० देय देव. 

दुकानदार - मोला उल्लू समझसेव का? १० का २० म्हणजे १० का २०. एक कम नही ना जादा नही. 

सिताराम - अच्छा ५ रूप्या का केतरा आहेती? 

दुकानदार - १० का २० त् ५ का १०. 

सिताराम - ठीक से. तू असो कर १० - १० रूप्या का दुय जागा अना ५ रूप्या का १ जागा आंबा दे? 

दुकानदार - ठीक से. ये १० का २० ये दुसरा १० का २० अना ये ५ का १०. धरो. 

सिताराम- आता तोला केतरा रूप्या भेट्या. 

दुकानदार - १० ना १० भया २०. अना २० ना ५ भया २५. 

सिताराम- मोला आंबा केतरा देयेस? 

दुकानदार - २० ना २० भया ४०. अना ४० ना १० भया ५०. 

सिताराम - देख २५ रूप्या का ५० आंबा भया. असोच त् तोला कव्हत होतो. 

दुकानदार - अजी, मोर् दिमाख माच् नही बसेव. 

                चिरंजीव बिसेन 
                     गोंदिया

रोज की कहानी sharda chaudhary 01


             
                     रोज की कहानी
                  
रखमा:  अजी कहान गयात तं, आयक्यात का  मी का           सांगूसू तं.
रघु : जोर लक कायला  चिल्लासेस  तं, बयरा समजसेस का मोला ?
रखमा: का कहेव तं तुमला, एक दिवस चांगली गोष्टी नही सांगो.
रघु: मी का पागल सेव तोरो संग गोष्टी सांगनला?
रखमा: मी न असो कहा कहेव तं, तुमीच खुदला  पागल कसेव.
रघु: तोंड तं मार चलावसेस.
रखमा: मी तं तोंडच चलावुसू, तुमरो सारखा हाथ तं नही चलावू, दिवसभर मोबाइल पर चीपकेव रवनला पाहिजे पोवारी कविता लिखन साठी.
रघु: तं मंग तोरो पर लिखु कविता? मोठी अप्सराच सेस का नही.
रखमा: मीनं कहा कहेव तं मी अप्सरा सेव मनुन, पर तुमरो पेक्षा चार हाथ सरस सेव.
रघु: हे भगवान! कोण येको तोंड ला लगे... शेरी वानी चर चर कातंसे.
रखमा: तुम्ही बी काही कमी नाहाव, हिंडसेव रोज मरद-माना को संगं, बाई को नाव बदनाम से,  पर कमी गोष्टी नही सांगत मरद माना.
रघु: कोण तोरो तोंड ला पुरे... जान दे.सांग का सांगत होतीस तं.
रखमा: आता आयात नही रस्ता पर. मी कहेव आपलो बिह्या लगाइतीस वू पंडित मरेव मनुन सांगं सेती.
रघु: अच्छो भयेव बटा मरेव तं, आपलो करम का फल भोगीस वोनं.
रखमा: कोण घडी मा येको संग नसीब को पाला पडेव तं कोण जाणे!  या रोजकीच कहानी बन गयी से.【रखमा डोक्सा पर हात मारस्यान उगी-मुगी रय गयी】

     शारदा चौधरी
     भंडारा

नवीन पिढी D P Rahangdale 01


                    नविन पिढ़ी
                    
एक गावमा रघु नावको एक मुशाफिर आयेव, 
आखरपरा काही टुरा खेलत होता रघु न एक 
टुराला हाकलीस तब ....................
रघु :- अरे बापु इतन त आव, ओन्ज्या का करसेव?
टुरा:-{ धावत रघु जवऴ आयशान } अंधरा सेव का
       दिस  नही आमी खेल सेजन त.
रघु :- बापरेबाप तु कोण को टुरा आस त?
टुरा :- आपल मायको.............बापको काहे नही?
        .............मोला जनम देईस वा माय ना ओंन     
         जेको नाव  सांगीस ऊ बाप मणुनच पयले
          मायको नाव.
रघु :- मोला आपल घर लिजाजो का?
टुरा :- नही,मी तुमरो वजन नही धर सकु तुमला 
         आपल पायलकाच चलनो पऴे. 
रघु :- तुमरो घर कांहा से त.
टुरा :- मंदिर क सामने...... ना मंदिर.? ...... 
         ऊ आमर घरक सामने च से.
रघु:- एव रस्ता तुमर घर ला जासेका?
टुरा :- नही, रस्ता जाहां को वाहाच रव्हसे, आपलो 
        लाच जानो पऴसे.
रघु :- तुमर घर केतीक भसी सेती, वय केतोक दुध      
         देसेती?
टुरा :- पाच सय भसी सेती, पर वय दुध देत नही, 
         दुध आपलो लाच काहाऴनो पऴसे , 
         बहयाऴा कहींको.
रघु :- हं हं ज़ास्त नोको सांगुस, उर्मट च से बापा.
                        
डी पी राहांगडाले
     गोंदिया
9089216540                     

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...