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Sunday, May 17, 2020

नारी तू नारायनी (varsha patle rahangdale)


नारी तू नारायणी झेप ले आकाशमा
तडजोड करू नोको आपलो सपनाको
तू दुर्गा,तू काली,तूअंबिका,अना सरस्वती
तुनच लेईस का ठेका ,पुरो त्याग करनको।।

समाज की  परंपरा अना कलूषित रूढींको
तोलाच कायला से उनको  बंधनकारक घेरा
कायला तूच उचलजो संसार को भारो
समय भयेव आता देखाव स्त्रीशक्ती को तोरा।।

लेय ले तू आता गरूड की झेप संसारमा
दुय हात करके पुरूष को संग संगमा
स्पष्टीकरण देनकी काही गरज नाहाय तोला
भले ही रव्ह पुरुषप्रधान संस्कृती येन देशमा।।

तु कमजोर अबला नाहास,कोमल सबला सेस
तू जगकी माता,माऊली अना जगतजननी 
घबरावू नोको आता यन समाजला  कभी
संकट को सामना करनो मा तू आता अग्रणी।।

जसी भाषा मा से पोवारी भाषा महान
नारी मी तोरा केतरा करू मी गुणगान
कभी बहिण, कभी बायको,कभी बेटी होयके
समाज मा बढावसेस नारी तू सबकी शान
समाज मा उची करसेस तू सबकी मान।।

✍ वर्षा पटले रहांगडाले

नारी तू नारायनी (chhaya surendra pardhi)


नारी तू नारायणी, विश्व जन्मदायनी माय।
देवी रुप सकल नारी,नारायणी रूप आय।।

गर्भ मा ज्योति तू नव महीना जगावसेस।
मरणककर सहस्यानी नवजीवन तू देसेस।।

सुंदर तू, नाजुक तू ओजस्वीता की मूर्ति।
कुटुंब आधार तू ,त्याग की अमर कीर्ति।।

बहिन तू ,माय तू, रिस्ता को तू आधार ।
येन रिश्ता बिना आदमी अधुरो लाचार।।

समय आये पर धारण कर चंडी अवतार।
नहीं घबराय नारायणी करसे दस पर वार।।

आदि शक्ति माय, शिवकी प्रिया पारबती ।
दुर्गा रूप शक्ति, सरस्वती ग्यान बरसावती।।

महिमा तोरी वेद पुराण मा सकल वर्णी।
अनुसया तू त्रिदेवला दुग्धपान करावती।।

सावित्री तू सत्यवान की, सिया तू रामकी ।
जानकी बन उद्धारीस दुही कुलको मानकी।।

माय गढ़कालिका को रुपमा तू कल्याणी।
आशीर्वाद तोरो माय पोवार की पोवारी ।।

दुनिया येरिच नहीं कव तोला नारी नारायणी ।
हर सफल आदमी को मंग रवसे एक नारी।।

✍️सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

नारी तू नारायनी (D. P. Rahangdale)


निंदा  नोको  करु नारीकी नारी रतनकी खान ।
नारी पासुनच पैदा भया राम लखन हनूमान ।।
नारी ममताकी मुरत से नारी माया को आगर ।
काली,दुरगा,पारबती से नारी ममताको सागर ।।
नारीच से माय,टूरी,बहीन से घरकी रानी  ।
घरमा ओको सनमान करो वाच आय नारायणी ।।

डी-पी- राहांगडाले
गोंदिया
९०२१८९६५४०

नारी तू नारायनी (chiranjiv bisen)


जग निर्माती,सब सुख निर्माती,
नारी तू परम प्रतापी बलीदानी।
हर क्षेत्र मा हुनर देखायकर,
सामने सेस, नारी तू नारायणी।

राम कृष्ण ला जनम देयकर
उनको लालन पालन करीस।
वीर शिवाजी,राणा प्रतापला
तूनच् बलवान करीस।

भर्तृहरि, विक्रमादित्य,राजा भोज
जगदेव सब तोरीच संतान।
गांधी महात्मा, लालबहादुर सब
तोरच् कारण बनाया महान।

जीवन कर हर क्षेत्र मा
तू सामने अग्रेसर सेस।
घर का सारा काम काज बी
तोरच् माथो पर रव्हसेत।

तूच अबला, तूच सबला,
तूच जगत कल्याणी सेस।
तूच दुर्गा, तूच काली
तूच आदिशक्ति भवानी सेस।

घर ला स्वर्ग बनावनो,
तोर करम का शामिल से।
टुरू पोटू साती तूच
नैय्या अना साहिल सेस।

तूच अहिल्या,तूच सावित्री
तूच झांसी की रानी सेस।
तोर् बीना पुरूष से अधूरो
तू वोकी अर्धांगिनी सेस।

             रचना- चिरंजीव बिसेन
                             गोंदिया.

नारी तू नारायनी (Y. C. Chaudhari)

कुलवंत नारी

नर-नारी हे जीवनरूपी रथका चाक।
समकार्यलं योव रथ चलसे बिनधाक।।

नारी पुजनिय जगमा सेती देविको रुप।।
लक्ष्मी काली सरस्वती दुर्गा भयी कार्य अनुरूप।।

सब कार्य मा कार्य दक्ष सब नारी सेती।
माय मावशी काकी फुपा सब हे नारीच आती।।

घर आवसे लक्ष्मी रूपमा घरला करसे स्वर्ग।।
आपलं प्रेम भावलं देखावसे सुखी प्रगत मार्ग।

भारतमा सीता सावित्री देवी रनमा झासीकी रानी।
हात मा  होती तलवार असी सुरविरांगनी।।

नारी तू नारायनी अशी भयी सेव भारतमा।
चरीत्र कुलवंत नारी तब विकास से जीवनमा।।

वाय सी चौधरी
गोंदिया

नारी तू नारायनी (hirdilal thakre)


हमेशा कसेती बेटी बचाओ बेटी पढाओ, 
येव कायला लगावसेव भाऊ तुम्ही नारा! !
एक बेटीला बेआब्रु करके साला अज, 
बाइज्जत बरी होयजासेत सब हत्यारा!!

सत्य मर्यादा संस्कृति को से देश आमरो ,
याहा महिला को काहे होयरहीसे अपमान !
याद करो जी  झाँसी की राणी लक्षमीबाईला 
भाऊ भयगयी आपलो भारत देशपर कुर्बान!!

बेटी चाहे हिन्दू की होय या होय मुस्लिम की, 
चाहे होय कोणी ख्रीष्चण या होय ईसाई!! 
सबको शरीर मा खुन धावसे मानवता को, 
साधु महात्मा सन्याशी सब देसेती गव्हाई!!

भाऊ एक बेटी को दुख देखकर रुहु कापसे, 
सदमा मा पडगयी से भारतदेश की जनता !!
भासी पर लटकायदेव वोन बल्तकारी ला, 
खुशी लक गद गद होयजाहे जी भारतमाता!!

भारत देश की नारी तुम्ही बनो नारायणी ,
सबजन न धरो आपलो हातमा तलवार !!
बिच चौराहा पर काटो सीर पापी दरिदां को, 
जे करसेती आमरो महिला पर अत्याचार !!

                    !!! कवी  !!!
              दास हिरदीलाल ठाकरे 
         भ्रमणध्वनी 7020144588
       मु, भजियापार , पो, चिरचाळबांध 
    ता आमगाँव जिल्हा गोदिया माहाराषट्र 

नारी तू नारायनी (chhaganlal rahangdale)


सारो जग की जग जननी नारी तु नारायणी
धरती को गर्भ लक जनम भयेव जानकी रानी.
द्वापार मा बन जासे स्याम की राधारानी
अधर्म को विनाश करन होय जासे महाकाली.
सत युग द्वापार मा मर्यादा पुरुषोत्तम ला
धर्म मानव रक्षन साती अवतरीत कर से नारी.
क्षत्रीय भरतरी विक्रम मुंज भोज पोवार की जननी 
सती सावित्री मीरा जलन कुंड की नारी तु नारायणी.
नारी ला तीनही लोग मा कोनी नही जान सकेव
आयी आंग पर त बन जासे झासी की रानी.
आब बादर मा भ्रमण कर आव से नारी
 जग मा कोणी लक कम नही रव्ह नारी.
जब बहीन भौवजी मा रूप धारण कर से नारी
पेरम की मुरत रव्ह से यशोदा माय रानी.
जब खुद समर्पण मा पत्नी रव्ह से नारी
होसेस जिनगी साती नारी तु नारायणी.
मामी मावशी फुफा बाई बन से नारी
त वा पेरम की सत्कार मूर्ति बन जासे नारी.
संसार का सारा धाम अवतारी चरन माय को
कर्तव्य की साधना साक्षात जगजननी नारी तु नारायणी.

श्री छगनलाल रहांगडाले,,, खापरखेडा
दि. 17 /05 /2020 
9158552860

नारी तू नारायनी (raksha hirdilal thakre)

 
महिला जगत की जननी से, 
बचाव से कुटुंब की लाँज ,,,!!!
येन धरती पर सदा गरजत रहे, 
सावित्रीबाई की आवाज,,,,!! 

महिलादिवस पर करो प्रतिज्ञा, 
अज नहीं  कोणी अबला ,,,!!
समाजहित साती तळमळ करो, 
येव अधिकार से सबला,,,!!

नोको समजो तुम्ही अबला नारी, 
दुर्गा काली को से अवतार ,,!!
आत्मरक्षा मा तलवार उठाओ, 
अगर करसे कोणी अत्याचार,,!!

नामर्दो तुम्ही येव बंद करो रे ,
बलात्कार जसो दुश्हास,,,! 
अज लेया सेजन शपद आम्ही, 
आम्हीच करबिन तुमरो सर्वनाश!

प्रामाणिकपण लक साथ देव, 
महिला को तोडो नोको विश्वास! 
महिलाशक्ती लक पुरो विश्व तरसे,
नारी मा रव्हसे नारायणी को वास,!!

                     !!! कवीत्री  !!!
        !! कु, रक्षा हिरदीलालजी ठाकरे !!

नारी तू नारायनी ( Dr. Sekhram yelekar)


नारी, तू सदा कर्तव्यमा तत्पर रवसेस
सदा सुख दुख भरी रवसे, तोरी कहानी
आव्हान झेलनला बी तू तत्पर रवसेस
तुच सेस माता, तुच नारायणी।। १। । 

तू महाभारत को एक हिस्सा सेस
दु:ख भरी तोरी रामायणकी कहानी
विश्व कल्याण मा तुच पुढ  रवसेस
तुच सेस लक्ष्मी, तुच नारायणी।। २।। 

दया को तू महान सागर सेस
नही अटाय तोर् डोराको पानी
एक रुप तोरो प्रलयकारी बी से
तुच सेस काली, तुच नारायणी।। ३।। 

तोला कवसेत एक अबला नारी
देखस्यानी तोरी दर्दभरी जींदगानी
आब् देखाय दे सबला, तू कम नाहास
तुच सेस दुर्गा, तुच नारायणी
                     तुच नारायणी।। ४।। 
*****
डॉ. शेखराम परसरामजी येळेकर नागपूर १७/५/२०२०

नारी तू नारायनी (Dr. Hargovind tembhre)

त्यागमुर्ती नारायनी

मांय बनके जन्मदात्री रूप मा,
आव से सृष्टि रचयिता रूप मा ll

त्याग करें पत्नी को रूप मा,
दिसे प्रेम भाई बहिन रूप मा ll

रूप धरे नारी संसार की छाया मा,
पूजन होये देव लोक माया मा ll

धरती को श्रृंगार, प्रकृति रूप मा,
ममता की छाया, भारतमाता को
रूप मा ll

अर्धांगिनी को रूप मा,
शिव शक्ति रूप मा ll

आदि शक्ति को रूप मा,
लेईस अवतार माता को रूप मा ll

वेद पुराण को गाथा मा,
आदिकाल को कथा मा ll
 
नारी बनी से नारायणी को रूप मा,
जगमा जेकी गाथा से मातारानी
को रूप मा ll

भाषा जसी से मांय पोवारी मा,
किर्ती से तसी नारी की येन धरती मां ll
********************
प्रा. डॉ. हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु पो दासगाँव ता. जि. गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४

Sunday, May 10, 2020

चारोली (माय)

विषय: माय
दि - १०/०५/२०२०

माय मंजे का ममताको आगर /
लोनी जसी मऊ दयाको सागर //
माय मंजे का झाड की सावली /
करूणा मयी वाच माय माऊली // 
माय की माया ना बापको पयार /
यकदून नही सुखी रहे संसार| //

मा- धनलालजी राहांगडाले
गोंदिया

चारोली (माय)

आपरो आशीष, आपरो हेम, मोरो  लाईच ठेव से!
मोरी माय को पाय खाल्या, मोला जन्नत चोव से!
दुनिया का सब दुःख त सह लेसे हाँसत-हाँसत ही,
पर मोला जरा सो दरद होसे त, माय बड़ी रोव से!

तुमेश पटले "सारथी"
दिनांक- १०/०५/२०२०

चारोली (माय)


माय मोरी ममता की छाया,
निराली से जगमा येकी माया ll

येन देईस नवीन काया,
देख्या सबन जग की माया ll
********************
✍🏼डॉ. हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु. पो. दासगांव ता.जि.गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४

चारोली (माय)

1)
रेहका आमर पोवारी की शानसे
चालीरीती संस्कृती की पहचान से
गाडी घोडी आयी मनुन का भयेव
एकघन तरी रेहकापर बसनको से
 2)
मोला मोर् मनमा जरासी आस से
बईल जरा रेहकाला जुपनको से
घर बइल नाहात मनुन का भयोव
एकघन तरी रेहकापर बसनको से
3)
यव लॉकडाऊन खतम होयेपर
लगसे मोला बियाबरला जानको से
रेहकाक् धुरकरीला व्वा व्वा कवनको से
एकघन तरी रेहकापर बसनको से
4)
लगसे हातमा धरु दुय बईल का कासरा
नवा नवा कपडा टाकु चेहरा करु हासरा
अस हालातमा मोला फोटु निकालनो से
एकघन तरी रेहकापर बसनको से
****

डॉ. शेखराम परसरामजी येळेकर नागपूर
१०/५/२०२०

चारोली(माय)


     
  
माय दुय अक्षर 
पर गहन से अर्थ।
वोक सामने सब 
अक्षर सेती व्यर्थ।
(१)
माय आदमी को 
सबसे पहिलो गुरू।
वोक बिना जीवन को
सफर नहीं होय सुरू।
(२)
माय से उन्हारो मा
थंडी थंडी साऊली।
बच्चाईन साथी माय
जसी  विठ्ठू माऊली।
(३)
आदमी क् जीवन मा
माय मंदीर की मूर्ति।
करो वोकी सेवा सब
इच्छा की होये पूर्ति।
(४)
कोणी नाहाय जगमा
मायदून मोठो।
मायला कभी नोको
पड़न देव तोटो।

रचना- चिरंजीव बिसेन
                  गोंदिया।

चारोली(माय)


तोरो हर शब्द माय मोला
जगनसाठी प्रेरना देसे जीवनमा
तोरा लहानपणका देया संस्कार
काम आय रह्या सेत मोला भविष्यमा

✍वर्षा पटले रहांगडाले

चारोली(माय)

(१) 
जिंदगी शर्तों की मोहताज नहीं होय 
दर्द होये त आवाज नहीं होय !!
सब रूसेत रूठ जायेत जमाना वाला
मोरी माय कभी नाराज नहीं होय!!
(२)
 जब मोरी कलम लिखे मोरी माय
निडर बनकर सच लिखू मोरी माय!!
पोवारी सभ्यता को मान बढ़ाऊ माय।
येव लहानपन लक सीखायीस मोरी माय!! 

श्रीं छागनलाल रहांगडाले, खापरखेडा .       

चारोली(माय)


(१)
बांधुन कयेव शब्द मा माय को पिरमला
शब्दमोती भी कम पड्या ओकों महतिमा

माला बनावन बसी माय को उपकार की
फूल भी हासकर बिछ गया मायको चरनमा।।

(२)
दुनिया की सबदून साजरी मूरतला देखूसु
माय तोरी ममतामयी सूरत याद आवसे।।

तोरा उपकार सेत मोरोपर अनंत कोटी
पूजामा तोरो आरती मोरो मन रोज गावसे।।

✍️सौ. छाया सुरेंद्र पारधी.

Monday, May 4, 2020

काव्यस्पर्धा क्र. 8 विषय-कास्तकार

(चाल-अंजनीच्या सुता तुला------)
माती मालं सोनो पिकावसे कास्तकार।
पोट भरसे सबको, तोला त्रिवार नमस्कार।।धु।।

पिकावसेस धान अना भाजिपाला।
सबला मिळसे रोज ताजो ताजो खानला।।
भारतकी अर्थ व्यवस्था , तुच लगावसेस पार।।१।।

दिवस भर काम करके गाळसेस घाम।
कारी कारी माती तसो दिससेस तू शाम।।
धरतीपुत होयशानी,तू जगको तारनहार।।२।।

आण बाण शाण आता किसानीपर तोरी
यज्ञरुपी फसलं तोरी भरसे तिजोरी
काहे आत्महत्या तु जगको पालनहार।।३।।

आधुनिक यंत्र ठेव आपल संग
टेक्टर ना सरजा राजाको संग
बळिराजा तू सबको, कर भवसागर पार।।४।।

वाय सी चौधरी
गोंदिया

Sunday, May 3, 2020

काव्यस्पर्धा क्र. 8 विषय-कास्तकार


कास्तकार लेसे 
दुनियाको भार
वक् पाटिपरा 
सबकोच मार!//

जय जवान, जय किसान
बरोबरीकोच मान
स्वामिनाथन् आयोगसाठी
सरकारको जिव लहान!//

टुराटुरीको शिक्षण
टुरीको बिया/
नितीलका जिवन वको
झिजवसे काया!//


सारी दुनिया से घरमा
कास्तकार खेतमा्!/
कोरोनाको, भेव वलाबि
पर् आराम नयि मनमा्//

धरतीमायकि सेवा
ध्येय से वको/
आध्यात्मिक धंदा से
मोरो कास्तकारको//

  पालिकचंद बिसने 
सिंदीपार(लाखनी)

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...