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Monday, July 6, 2020

उभारी


(आन तो रे वा उभारी असो येको अर्थ नोको काहाडो) 

अशी उभारी देव मोला आन के, 
ग्रुप मा ठेवू मी सबला सम्हाल के।धृ।

ख-यान मा आनन साती बोझा होत धानका, 
या घर आनन साती बेठ तनीस का, 
सबला ठेवसे या सम्हाल के.
अशी उभारी देव मोला आन के। १।

लकडा हो या लकडी जलावनकी,
बिह्या मा मांडोधरी होय मांडोकी, 
गाडो मा रव्हसे उभारी ठनके, 
अशी उभारी देव मोला आन के। २।

खरकाळी होयेत या काटी बोरकी,
या मांडो साती डगाल जांभुर की, 
येको बीन नही सम्हलत सम्हाल के, 
अशी उभारी देव मोला अान के। ३।

खात की पेटी हो या बंडी कुटार की, 
आंगन साती आननो रव्ह मुरूम खदान की, 
खातकडी ला ठेवसे या बांध के, 
अशी उभारी देव मोला आन के। ४।

दंगा फसाद मा दुय हात देखावन ला, 
सरप, बिच्छू ला समयपर सुतावन ला, 
उभारी समयपर देसे ठास के, 
अशी उभारी देव मोला आन के। ५।

संगठन येव गाडो आय असो समझोना, 
वोक् कार्यकर्ता इनला उभारी समझोना, 
सबला सांगू सु मी पटाय के, 
अशी उभारी देव मोला आन के। ६।

             रचना - चिरंजीव बिसेन 
       परमात्मा एक नगर, गोंदिया

Saturday, April 25, 2020

लॉकडाऊन को असर


कोरोनामुळ् लॉकडाऊन भय गईसे देशभर,
बंद से जानो आवनो सब सेती आपल् घर्।
कमावनला जे गया होता रह्य गया लटकस्यार,
घरवाला करसेत चिंता आपल् घर बसस्यार्।

रेल,बस,हवाई जहाज सब सेती आब् बंद,
घरमाच् रव्हनो पडसे गयेव घुमन फिरन को आनंद।
जरूरत पड़ी त् भेव भेव लच् पडसे जानो,
पुलीसवाला नहीं भेट्या तरी भेट सकसे कोरोनो।

मिलनो-जुलनो, पाहुणापई भी भय गया बंद,
आपुन बी घरमाच् सेज कोनीघर जानको से प्रतिबंध।
खेती बाड़ी क् कामसाती नहीं भेटत मंजूर,
सब काम आपल् लाच करनो पडसे हुजूर।

सब दून जादा बिह्या वालों इनपर पडीसे असर,
बिह्या की तारीख काढेव क् बादमा नहीं करत अमल।
बिह्या कब होये येको नाहाय अता पता,
लाॅकडाऊन खुलन की देख रह्या सेत रस्ता।

जीनका बिह्या जम्या नाहात उनन कर देईन कैंसल,
सामने साल् करबीन भाऊ नाहाय काही टेंशन।
टुरा- टुरी परेशान अनखी एक साल इंतजार,
का करेती कोरोना न् सबला कर देईस लाचार।

               रचना- चिरंजीव बिसेन
                              गोंदिया
                       दि.२५/४/२०

Tuesday, April 14, 2020

आमरो समधी


आमरं समधीनं बहुत कमाइस
दूधकं धंदा मा.
वोकी सेत भशी, खासेती चोभरा,
बससेत डोबरा मा. ॥धृ॥
   
     गावमाको दूध, करसे जमा
     मोठं-मोठं डब्बा मा
     करसे मेहनत, नाहाय वोला फुरसत
जानला जत्रा मा॥१॥

दूध जासे कमी, मिलावसे पानी
दूधकं डब्बा मा
फटफटीलं जासे, घरोघर बॉटसे
शहर कं एरिया मा॥२॥

आमरं समधी को से कव्हणो,
खूब कमाओ तुम्ही आपलं धंदामा
का ठेयेव से तीर्थ पानी मा,
ना मंदीर कं पथरा मा ॥३॥
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  रचनाकार- चिरंजीव बिसेन
परमात्मा एक नगर, सूर्याटोला वार्ड, गोंदिया .४४१६१४
मो. नं.९५२७२८५४६४

जवाई कर से खेती


का सांगू बाई, आमरो जवाई,
से बहुत खासं.
घर सेत ओकं, नौकर चाकर,
 करीसेस बी. ए. पास॥धृ॥
     नौकरी कं मघं नही धायेव
      करसे आपली खेती,
    चलावसे ट्रेक्टर, करसे मेहनत
    पिकावसे माणिक मोती.
१० एकर मा धान लगावसे,
पाच एकर मा ऊस॥१॥ का सांगू-

खेत से मोटर-पंप,बोरींग,
पाणी की नाहाय कमी.
समय-समयपर खात दवाई
फसल की से हमी.
देखकर कारभार, भरेवसे दरबार,
टुरी मोरी से खुश॥२॥ का सांगू--

नौकरीवाला रव्हसेत पुना मुंबई मा
खाय पीय स्यार सुखी,
माहागाई कं मारे नही बचं काही
हात मा बाकी
घरचं रव्हसे, पैसा बी बचसे,
होसे बहुत विकास॥३॥का सांगू--

सासू-सुसरा, देवर भासरा ,
रव्हसेत सब संग,
अणखी का पाहिजे एकपेक्षा,
खुश रव्हनं ला मगं.
एक मा रव्हनो, सबदून चांगलो,
ठेवो तुम्ही विश्वास॥४॥ का सांगू--

        रचना - चिरंजीव बिसेन
  परमात्मा एक नगर, गोंदिया
मो. नं.९५२७२८५४६४

काल न अज


पच्चीस साल पहले,
गावको माहोल होतो अलग.
घर होता माती का,
अना कोठा होता सलग.

गली मा फाटक सबकी अलग,
पर कोठा को आड़ो एक
आबं सारखी धावपड़ नव्हती
आदमी होता नेक.

लोक इन जवड़ काम होतो
पर फुरसत होती बहुत.
फुरसत मा संग बसस्यार
बाटतं आपला सुख-दुख.

सुख-दुख मा धायस्यार
देत एक दुसरोला साथ,
पाहणा इनकं पाहुणचारसाठी
चार दिवस बी कम जातं.

आता गाव मा भी सिमेंटका,
घर बन गया पक्का
आदमी आदमी लं दूर भया,
रिश्ता रह गया कच्चा.

पाहुणाबी आता आवसेती,
घड़ी दुय घडी साती
मघानीचं आया होता
आता जाय रह्या सेती.

           रचना- चिरंजीव बिसेन
     परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
     मो. नं.९५२७२८५४६४
         दि.२४/९/२०१९

जिंदगी


या जिंदगी असीच गुजर जाहे
ना तू समझ सकसेस, ना मोला समझ आवसे.

जिंदगी असीच बीत रही से सोचनो मा
ना तू काही करसेस, ना मोला काही आवसे.

मिली से जिंदगी हासकर बितावन साठी
ना तू हास सकसेस, ना मोला हासी आवसे.

आता तं हर रोज असो होसे
ना तू काही कव्हसेस, ना मोला कव्हता आवसे.

असोच रव्हनो से तं फायदा का से
तू आपलं रस्ता लं जाय, मी आपलं रस्ता लं जाय रही सेव.

      रचना- चिरंजीव बिसेन
    परमात्मा एक नगर, गोंदिया.

भजन


प्रभुजी, तोरं दर्शन की से आस। धृ।

तोला कहाँ कहाँ मी ढूंढू,
कौनसो करू प्रयास॥१॥

मंदीर मा तं पैसा चलसे,
नही होय तोरो भास॥२॥

तीर्थ कं जागापर लूट मचीसे,
नही बुझ मोरी प्यास॥३॥

साधु संत भी करसेती धंदा,
नही होय मोला विश्वास॥४॥

मोला लगसे उचं ईश्वर,
भूखो ला भरवसे जो घास॥५॥

माय बाप सेती सबदून मोठा,
वोयचं मोरं साठी खास॥६॥
              
            रचना- चिरंजीव बिसेन
      परमात्मा एक नगर, गोंदिया.

दादाजी


आमरं दादाजी को 
होतो बहुत थाट,
मोठांग छपरीपर
रव्ह उनकी खाट.

कुर्चीपर बसनो पर
दिसं उनला गल्ली,
गल्लीपरलं जानेवाला
मिलन आवत डेली.

पांढरी धोती, पांढरो कुर्ता
अना पांढरीच रव्ह टोपी,
फतई कं खिसा मा
रव्ह तम्बाकु की कुपी.(डब्बी)

बाहर जात तं हातमा
ठेव बेत की छड़ी,
आम्ही कव्हत होता
दादाजी की काड़ी.

पायमा चंभार घरका जूता
खट खट बजत होता,
रस्ता लं जानेवाला बी
बाजूला होत होता.

ढिवरीन जवड़ का
लेत होता लाडू ना चना,
आम्ही कव्हज तुमी खावो
तं आमला बी होना.

खेत मा धुरोपर बसस्यानी
ठेवत सबपर निगरानी,
नांगर,कोहपर, बन्ह्यार
काम करत मिलस्यानी.

चना कं घात मा
दिवसभर खेतमा रव्ह,
आफुनबी खाय चना
लोकइन ला बी देत रव्ह.

असो आमरो दादाजी
सोडस्यान गयेव जब,
आमला ना मोहल्लाला
बहुत दुख भयेव तब.

       रचना- चिरंजीव बिसेन
     परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
               दि.१२/१०/२०१९

चंदा सुख दुख को साथी

चांदापर केतरो भी लिखो कम से. काल मी एक गीत लिखकर पठायेव पर मोरो पुरो समाधान नही भयेव.म्हणून मीनं अज एक कविता लिखेव.

चांदा सुख-दुख को साथी
*******************
जीवन कं सफर मा रव्हसे,
कभी खुशी ,कभी गम.
येकलका उच लढ सकसे,
जेव ठेवसे भाव सम.॥१॥

सुख मा नाचनेवाला,
रोवसेती आयेवतं दुख.
रोवनो बी जरूरी से पर,
हार मानकर होव नोको विमुख॥२॥

सुख-दुख समझावन साठी,
सामनेसे चांदा को उदाहरण.
पंधरा दिवस मोठो होसे,
पंधरा दिवस होत जासे लहान॥३॥

येतरो चढाव उतार कोणीकं,
जिंदगी मा नही आव.
तरी लोक सुख मा उडासेती,
अना दुख मा खासेती हाय.॥४॥

पुराण कं अनुसार चांदाला,
राहू भी लेसे ग्रस.
वोक मालं भी वू सलामत,
निकलसे होय नही टस मस॥५॥

म्हणून भारत मा चांदा को,
से बहुत महत्व.
भारत कं सब त्योहार इनको,
चांदा कं कलालं से अस्तित्व॥६॥

चांदा कं तिथी पर आधारीत,
सेती भारत का सब त्योहार.
चांदा सांगसे आमला लढ़त रहो,
तुम्ही नोको मानो हार॥७॥

        रचना - चिरंजीव बिसेन
     परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
                दि.२१/१०/२०१९

मायबाप सरकार


सब किसान भय गया लम्बा
पानी को देखकर अचंभा,
दिवारी भय गई तबी काही
पानी सोड नही भाऊ पिछा.

हलको धान की भय गई माती
किसानला परेशानीसे पैसा साती,
दिवारी बी रही बहुत थंडी थंडी
टुरू पोटू ला फटाका मिल्या, ना चिंधी.

 सरकार करे का आमरसाठी काही
नुकसान भरपाई भेटे का भाई,
याच चिंता मनमा लं जाय नही
टुरी को बिह्या चिंता बी बढ गई.

सरकार तं आता आपलच मासे मस्त
किसान मेहनत करस्यार भय गया पस्त,
कोनका आमदार केतरा येकमा सेत नेता व्यस्त.
कौन मंत्री,कौन मुख्यमंत्री येतरीच चर्चा से फक्त.
 
किसानी आता भय गई घाटो को सौदा
करेच नही पाहिजे असो लगसे अवंदा.
नागपूर मुंबई मा देखे पायजे काम धंदा
फसल नही होनो लं जी होय जासे शर्मिंदा.

           रचना- चिरंजीव बिसेन
      परमात्मा एक नगर, गोंदिया.

जतरा


माणूस को जीवनच से एक जतरा,
पैदा होये पासून मरत ओरी भरसे जतरा.

पैदा होयेपर लोक देखनला आवसेती
पड़ोसी ना रिश्तेदार वा एक जतरा.

बारसोला लोक जमा हो सेती,
नामकरण होसे वा एक जतरा.

जन्म दिन मनावनसाती लोक जमा होसेती,
केक काटेव जासे,वा बी एक जतरा.

स्कूल मा नाव भरती होसे,
संगी साथी मिल् सेती,वा एक जतरा.

बिह्या मा मोठो उत्सव होसे,
लोक आशिर्वाद देसेती,वा एक जतरा.

विविध प्रकार का कार्यक्रम होसेती,
लोक मिलसेती,सुख दुख सांगसेती,वा बी एक जतरा.

आखिर मा आदमी खतम होसे,
अंत संस्कार होसे,वा बी एक जतरा.

रुढ़ी परंपरा ल् तेरवी क-यो जासे,
मृत्यु भोज देयो जासे,वा बी एक जतरा.

                     - चिरंजीव बिसेन
                              गोंदिया.

मामा को गाव


मामाकं गावं छुट्टी मा 
जात होता लहानपणं,
अभ्यास व्यभ्यास काही नही
नुसतो खाणं ना खेलणं.

उन्हारो मा स्कूलला
रव्हत होती छुट्टी,
पढाई की फिकर नही
मारनं भेट पुरी बुट्टी.

लुका झापी, तीर कमान
कवेलू को गाडो रव्ह खेलनला,
पाड का आंबा, माच का आंबा
रस,रोटी,सेवई भेट खानला.

पापड बनावत चार पायलीका
आंगनमा खाटपर ठेवत वारनसाती
आमी रव्हजं पाहरापर
कावरा भगावनसाती.

सब सोवत आंगणमा
गर्मीलं बचनसाती
राजा रानी की कहानी सांगत
मन बहलावनसाती.

आता काही तसो
माहौल नही रहेव
नवो जमानोमा मामाको
गांव दूर भयेव.

आता छुट्टी मा भी
टुरू पोटू ईनला नाहाय फुरसत,
कई प्रकार का कोर्स, टी. वी.
मोबाईल मुड़ं मामा भयेव रुखसत.

          रचना- चिरंजीव बिसेन
      परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
                 दि.१८/१०/२०१९

चंदामामा


मी चांदापर लिखू तं का लिखू ,
चांदा मोरो बचपन को संगी.
चांदा बीना अधूरी से भाऊ,
मोरी बचपन की जिंदगी॥ धृ॥

लहानपणं मा मायनं सांगीस,
चांदा आमरो मामा आय.
चांदाला देख देख स्यार,
खुश होत होता माय.
चांदा वानी आमी बी,
लहानका मोठा भया माय.
आमी देखतच रय गया,
चांदापर पोहच गया फिरंगी॥१॥

रामजीनं बी चांदा संगं,
खेलन की जीद करीस माय.
आरसा मा देखकर चांदाला,
रामजी खुश भया माय.
सत्यनारायण की कलावती बी,
चांदा वानी बढी माय.
अमेरीका कं अपोलो ११ लं
चांदापर पोहच गयो निलंगी॥२॥
(निलंगी- निल आर्मस्ट्रांग)

जवान भयातं प्रेयसीला,
देखन लग्या चांदा मा.
करवा चौथ ला बायको,
नवराला देखसे चांदा मा.
रिश्ता असा बदलत गया,
पर मन लगेव रहेव चांदा मा.
चांदापर फिल्मका गाना भी,
बन गया नवरंगी ॥३॥

भारतनं भी चंद्रयान आता,
पठाय देईस चांदापर.
वाहाँ जायस्यार चंद्रयान,
संशोधन करे चांदापर.
लैंडर विक्रम फोटो,
खिचकर पठाये चांदापर(लं).
चांदापर भी आता भारत को,
निशान फड़क गयो तिरंगी॥४॥

          रचना- चिरंजीव बिसेन
    परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
                 दि.२०/१०/२०१९

देखता देखता


देखता देखता जमानो बहुत बदल गयो,
सब नवो भय गयोव,पुरानो नही रहेव.।धृ।

गाव का रस्ता भी भय गया सिमेंटका,
पहले वानी धुल वाली गल्ली नही रही,
बाईक,कार,टेक्टर,मॅटाडोर आय गया,
पहले का रेहका,गाडा,बंडी नही रही।१।

धान क् बाद मा धान की च् फसल लेसेत,
गहू,चना,लाखोरी लगावनो बंद भय गयेव,
ना हुड्डा पार्टी ना उबडहांडी आता रही,
केवल धान ही धान खेत मा रहय गयेव।२।

लेटर,चिठ्ठी की खबरबात बंद भय गयी,
मोबाईल,व्हाट्स अप पर बात भय गयी,
पडोसी बी आता नही जात एक मेक क् घर,
खतम पहले की मुलाकात भय भयी।३।

बाप बी बाबूजी क् जागा पापा बन गयेव,
माता बी माय क् जागा मम्मी बन गयी,
जिंस टी शर्ट मा आता फिर से पापा,
मम्मी बी सलवार कुर्ती की शौकीन भय गयी।४।

ना दादा की धोती रही ना टोपी रही,
दादी की पातल ना वायल बदल गयी,
नाना बी आता पेंट शर्ट मा रव्हसे,
नानी बी साड़ी मा सजी धजी से ।५।

               रचना- चिरंजीव बिसेन
                          गोंदिया
                  दि.०४/०२/२०२०

घर


महल,हवेली,कोठी,बंगला,वाडा, मकान,
ये सब एकच चीज आती,घर वोको नाव.

महल,कोठी,बंगला ये सब प्रतिष्ठा दर्शक नाव,
पर सबसे चांगलो से,घर शब्द को भाव.

महल, हवेली,मकान, ईटा,मिट्टी, गारा ल् बन सेती,
पर घर बनावन ला प्यार, मोहब्बत
पाहिजे जी.

जहाॅ आपस मा प्यार,भाईचारा रव्हसे वू घर मंदीर बने जासे,
नहीं त् मोठी हवेली बी भूत बंगला
बनके रह् जासे.

म्हणून त् आफून बंगला,कोठी, मकान ल् आवुसू जासू नही कव्हज्,
महल ल् आवो नही त् झोपडी ल् घरल् आवुसू जासू कव्हसेज्.

            रचना- चिरंजीव बिसेन,
      परमात्मा एक नगर, गोंदिया.
                 दि.२९/०२/२०२०

जय श्रिराम

 हायकू 

जय श्रीराम
दशरथ को राम
अयोध्या धाम.

कैकयी माता
मांगीस वरदान
भरत राज.

चौदा बरस
रामला वनवास
सन्यासी भेस.

लक्ष्मण भ्राता
जनकपुत्री सिता
वन को वास.

जानकी चोरी
सेवक हनुमान
करीस खोज.

लंका दहन
रावण को विनाश
राक्षस सेना.

घर वापसी
चौदा बरस बाद
अयोध्या राज.
    
        -चिरंजीव बिसेन
               गोंदिया.

Tuesday, April 7, 2020

महाराष्ट्र का जिल्हा


झाडी पट्टी का जिल्हा,
गोंदिया,भंडारा,गडचिरोली, चंद्रपूर.
धान क् खेती साती,
प्रसिद्ध सेती सर्व दूर.

वर्धा,अमरावती अना नागपूर,
पिकसेत वाहॉ संतरा मधुर.
पश्चिम विदर्भ मा आवसेत,
यवतमाल,बुलढाणा,वाशिम, अकोला,
कापूस साती प्रसिद्ध सेती,
चारही बाजूला. 

मराठवाडा मा ज्वारी पिकावसेत,
जालना,परभणी,औरंगाबाद,
तसोच नांदेड, हिंगोली अना,
बीड,लातूर, उस्मानाबाद.

उत्तर महाराष्ट्र मा सेती,
नाशिक,धुळे, जळगांव, नंदुरबार,
वहॉ पिकसेत मस्त,
केरा, अंगूर अना अनार.

पश्चिम महाराष्ट्र से समृद्ध,
होसे वहाॅ गन्ना की खेती.
पुणे, अहमदनगर,सोलापूर,सातारा,
कोल्हापुर,सांगली वोका जिल्हा आती.

कोकण मा पडसे पानी भरपूर,
जिल्हा वहॉका ठाणे,पालघर,
रायगड,रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग,
मुंबई अना मुंबई उपनगर.

                चिरंजीव बिसेन
                       गोंदिया.

Monday, April 6, 2020

मोरी माय


पहाटला लवकर होती उठत,
झाडस्यार साफ कर घर आंगन.
वोक बादमा चुल्हो पेटायस्यार,
दार, भात, भाजी बस रांधन.

शाहणी माय ला दे तोंड धोवन पानी,
तब ओरी शाहणो अजी मांग चाय.
सबका उनकी जरूरत की चीज,
समयपर देत होती मोरी माय.

सयपाक होये क बाद मा जल्दी-जल्दी जेव,
बाद मा शिदोरी धरस्यार जाय खेत.
दिवस भर प-हा लगायेव क बादमा,
घर आवनला दिवस बुडता वोला भेट.

दिवस बुडता सयपाक बनायस्यार,
सबला दे राती जेवण खानला.
बर्तन भांडा धोयेव क बादमा,
सबदून बादमाच भेट वोला सोवनला.

टुरू पोटू इन की स्कुल की तैयारी,
पाहुणा पयीन को जेवन खान को काम.
सबकी जरूरत का काम करता करता,
वोला नहीं भेटत होतो बिलकुल आराम.

               रचना- चिरंजीव बिसेन
        परमात्मा एक नगर, गोंदिया
                   दि.०६/०४/२०२०

Sunday, April 5, 2020

भारत का राज्य


भारत क् पश्चिम मा से
राज्य महाराष्ट्र,राजधानी वोकी मुंबई.
प्रसिद्ध स्थल सेती अजंता,वेरूळ, नागपुर,
पुणे ना सबसे उचो शिखर कळसुबाई.

देश क् बीच मा से राज्य मध्यप्रदेश,
राजधानी वोकी से भोपाल.प्रसिद्ध स्थल सेती पचमढी,खजुराहो
अना उज्जैन को महाकाल.

सबसे पश्चिम मा से राज्य गुजरात,
राजधानी वोकी से गांधीनगर.
जहाॅ गांधीजी को जनम भयेव,
वोन् शहर को नाव पोरबंदर.

सबसे मोठो राज्य से राजस्थान,
राजधानी वोकी से जयपुर.
रजपूत क् गाथासाती प्रसिद्ध सेती
चित्तोड, जोधपुर अना उदयपुर.

भारत क् उत्तर भाग मा राज्य सेती,
पंजाब अना हरियाना.
राजधानी उनकी चंदीगड,
मोठा शहर गुडगांव,अमृतसर ना लुधियाना.

जम्मू काश्मिर आता बन 
गयेव केंद्रशासित प्रदेश.
राजधानी से वोकी श्रीनगर,
जम्मू काश्मिर ना लद्दाख दुय प्रदेश.

हिमाचल प्रदेश की राजधानी से शिमला,
वहाॅ प्रसिद्ध सेती कुल्लू,मनाली ना धर्मशाला.

उत्तराखंड से राज्य लहान,
राजधानी वोकी देहरादून.
मोठा मोठा तिर्थ सेती,
बद्रीनाथ,केदारनाथ,ऋषिकेश,हरिद्वार.

जनसंख्या मा मोठो राज्य से उत्तर प्रदेश,
राजधानी लखनऊ,ठाट वोको राजशी.
तिर्थक्षेत्र सेती वहाॅ का,
अयोध्या,प्रयागराज अना काशी.

बिहार की राजधानी से पटना,
वहाॅ पूर लका होसे बडी दुर्घटना.
रांची से राजधानी झारखंड की,
जमशेदपूर,बोकारो सेती स्टील सिटी.

पूर्व को राज्य पश्चिम बंगाल,
राजधानी से वोकी कलकत्ता.
वहॉ प्रसिद्ध सेती दार्जिलिंग,
सिलीगुड़ी ना गंगासागर यात्रा.

उड़िसा की राजधानी से भुवनेश्वर,
मुख्य सेती पूरी,कोणार्क ना कटक.

आपलो पडोसी राज्य छत्तीसगड,
की राजधानी से रायपुर.
प्रसिद्ध सेती डोंगरगड,भिलाई,
अना हायकोर्ट को शहर बिलासपुर.

तेलंगाना की राजधानी से हैदराबाद,
वोको जुडवा शहर से सिकंदराबाद.
आंध्रप्रदेश की राजधानी से अमरावती,
आंध्र मा प्रसिद्ध से बालाजी तिरूपति.

कर्नाटक की राजधानी से बंगलुरू,
प्रसिद्ध शहर सेती मैसूर ना मंगलुरू.
तामिलनाडू की राजधानी से चैन्नई
प्रसिद्ध सेती रामेश्वरम,कन्याकुमारी ना मदुराई.

केरल की राजधानी से तिरूवनंतपुरम,
मुख्य शहर सेती कोच्ची ना एर्नाकुलम.
खूबसूरत गोवा की राजधानी से पणजी,
लहानशो से पर देखनलायक सेजी.


पूर्वोत्तर मा राज्य सेती आसाम,सिक्किम,
अरूणाचल प्रदेश,मेघालय,मणिपुर
मिजोरम, नागालैंड अना त्रिपुरा.
राजधानी उनकी क्रमलक दिसपुर,गंगटोक,
ईटानगर,शिलांग,इम्फाल,
आइजोल,कोहिमा अना अगरतला.

केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली,चंदीगड,पांडेचरी,
अंदमाम- निकोबार,लक्षद्वीप अना
दादरा नगर हवेली-दीव-दमण.
राजधानी उनकी दिल्ली,चंदीगड,पांडेचरी,
पोर्ट ब्लेअर,कवरत्ती अना दमण.

           रचना- चिरंजीव बिसेन
       परमात्मा एक नगर,गोंदिया.
                 दि.२०/०२/२०२०
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कृष्ण अना गोपी

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