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Saturday, February 13, 2021

बसंत ऋतू


प्रस्तावना
भारत मा बसंत ऋतु मार्च, एप्रिल अना मे महिना को बिच थंडी अना गरमी को बिच मा आवसे. यन ऋतू ला सब ऋतु को राजा को रुप मा मानेव जासे अना युवाइनको की प्रकृती को रुप मा प्रसिद्ध से. 

हिवरो भरो बसंत ऋतू
बसंत ऋतू को मोसम मा तापमान सामान्य रव्हसे, न थंडी सारखो बहुत थंडो ना गरमी सारखो बहूत गरम नही लग. लेकिन बाद मा धिरु धिरु गरम लगनो चालू होय जासे. यन ऋतू मा राती मोसम अखिन भी अधिक सुहावनो अना आरामदायक होय जासे. बसंत ऋतू बहूत प्रभावशाली होय जासे:  जब यव आवसे त प्रकृती मा सबकुछ जाग्रत कर देसे. जसो झाड, गवत" फुल, फसल, पशु, मनुष्य ला मोसम की लंबी झोप मा लक जगावसे. मानुस नविन अना हलका कपडा वापरसेती, झाडईन परा नविन पत्ती अना शाखा आवसेती. फुल तरोताजा अना रंगिन होय जासेती. मैदान पुरो गवत लका भर जासे अना प्रकृती हिवरी भरी दिससे. 

बसंत ऋतू का लाभ
बसंत ऋतू चांगली भावना अच्छो स्वास्थ अना झाडईनला नविन जिवन देसे. यव यव सबसे अधिक सुंदर अना आकर्षक मौसम से. मधुमक्खि अना फिपोली कोवरी फुल को कलीईन को जवर पास मंडराव सेती. अना स्वादिष जुस (फुल की सुगंध) ला चुसन को आनंद लेसेती, अना शहद बनावसेती. यन मोसम मा लोक फलईनको राजा आंबा ला खान को आनंद लेसेती. कोयल दाट फांदी को झाड पर बसस्यानी गाना गावसे अना सबका दिल जित लेसे. दक्षिन को दिशा मा बहूत प्यारी अना ठंडी हवा चलसे अना आमरो दिल ला छुय जासे. यव लगभग सप्पायी धर्म को त्योहार को मोसम से. जेको दौरान लोक आपलो परिवार को सदस्य, सेजारी, रिस्तेदार संग मिलस्यानी चांगली तैयारी कर सेती. यव कास्तकार को भी मोसम से,  जब वय आपली फसल घर आनसेती अना काही राहत महसुस कर सेती. कविईन ला नविन नविन रचना करन साती नविन कल्पना भेटसेती; अना चांगली प्यारी कविताईनकी रचना करसेती. यन् मोसम मा मस्तिस्क बहूत अधिक कलात्मक ना चांगलो विचार लका भरेव रव्हसे. 

बसंत ऋतू को मोसम का नुकसान
बसंत ऋतू मा काही हानी भी सेती. जसा कि, मोसम ठंडि को मोसम मा को अंत मा सुरु होसे. अना गर्मी को सुरु होन को पयले आवसे. जेको कारन बहूत अधिक संवेदनशिल मोसम होसे. बहूत सी महामारी (छुत का रोग) वाला रोग जसा सामान्य सरदी, चेचक, चिकनपॉक्स, खसरा आदी रोग होसेती. येको साती आपरो स्वास्थ साती अतिरिक्त तैयारी करनो पडसेती. 

निष्कर्ष
बसंत ऋतू को मोसम सब ऋतृ को राजा रवसे. बसंत ऋतू को दवरान प्रकृती आपरो सबसे सुंदर रुप मा प्रकट होसे अना आमरो हृदय ला आनंद लका भर देसे. बसंत ऋतू को पुरो आनंद लेन साती आपरो स्वास्थ की देखभाल पयले पासुन करे पायजे. जेको साती आमला भिन्न छुत वाली बिमारी लका प्रतिरक्षा की व्हॅक्सिन लगाये पायजे.

~ लेखक >> भिमेंद्र कटरे

बसंत ऋतू chhaya pardhi 01


       ऋतुओं को राजा ‘वसंत आय।’ वसंत ऋतु थंडी को बाद मा आवसे। भारत मा फरवरी अना मार्च मा येन ऋतु को आगमन होसे। वसंत बहुत सुहावनो ऋतु से। येन ऋतु मा सम जलवायु रवसे। सर्दी अन् गरमी को मोसम को सुंदर मिलाप मंजे वसंत ऋतु आय। येन ऋतु मा प्रकृती मा अनेक बदलाव होसेतं मुन येन ऋतु ला ऋतु को राजा कसेत।

वसंत ऋतु आई बसंत ऋतु आई।
छमछम करती बसंत ऋतु आई।।                           अमराई मा  सुगंध मोहोर की छायी।
कुहू कुहू करत कारी कोयल आयी।।
बदलेव रंग प्रकृति को गुलाबी ठंडी न्यारी।
मनभावन रंगों लक सजी से  फुलवारी।।

  वसंत ऋतु बड़ी मनमोहक ऋतु से। गुलाब सेवंती, गोंदा सरसो सरीखा फूल फूल सेती। हवा मा सुगंध अन मादकता रवसे। पानझडी को येवच मोसम आय जुना पान झडकर नवी पालवी फुटसे आंबला बार अावसे। कारी कोकिला " कुहू कुहू" की रट लगावसे। नवी पालवी मन मा नवी आशा जगावसे वनस्पती जगत च नहीं त प्राणी, पक्षी मा भी नवी ऊर्मी रवसे। 

  येनच ऋतु मा आमरा आराध्य ,चौसष्ट कला का धनी, चौऱ्यांसी ग्रंथ का रचीयाता, जिनं एक रात मा चंपू रामायण की रचना करीन असो महाराजा भोज देव की जयंती गावं गावं मा साजरी होसे। वसंत ऋतु मा फागुन मंजे होरी को सन आवसे। सात रंग लक धरती आकाश झूम उठसे।

      गीता मा भगवान कृष्ण न कइतीस -ऋतुओं मा मी वसंत ऋतु आव । येन ऋतु मा वय ब्रजधाम मा गोपियों को संग नाचत रह्या रहेत । येन ऋतु म राधा शृंगार करकर  कृष्ण को संग रास करत रही रहे।
    
अज की शहरी संस्कृति मा प्रकृती का ये बदलाव नहीं देखन मिलत। शहर मा बिल्डिंग का जंगल ,काम काज की आपाधापी ,प्रदूषित वातावरण को कारण लोक ईनला वसंत ऋतु की शोभा देखन नहीं मिल। पर कभी समय मिले त प्रकृति को येन अनुपम रूप को आनंद जरूर लेव। वसंत सौंदर्य, उन्नति अना नवयौवन को ऋतू आय ।


✍️✍️सौ छाया सुरेंद्र पारधी

बसंत ऋतू D.P. Rahangdale 01


         एक सालका बारा महीना. ना बारा महीना का सय ऋतु.बसन्त, ग्रीस्म, वर्षा, शरद, हेमंत ना शीशीर. बसंत ऋतु   मार्च - एप्रील   मा आवसे. २२ मार्च ला 
दिवस ना रात   बराबर होसेती. मनजे  ओक  बादमा
दिवस मोठो ना रात लाहान होत ज़ासे.यन महीना मा ठंडी ना गरमी को  संगम  रव्हसे  मनजे ना गरमी ना ठंडी. मणजे गुलाबी ठंडी रव्हसे. वातावरण एकदम साफसुथरो प्रफुलीत् सुहानो होसे. वातावरण मा बदल होसे यको परिणाम आपल शरीर परभी होसे. यनच
 ऋतु मा होऴी. रामनवमी ना हनुमान जयंती सारखा सण आवसेती.
            बसंत ऋतु मा झाऴी जंगल मा  नवीनवीन पालवी  फुटसे. आंबाक  झाळला  बार आवसे ना
 जितन उत्तन वातावरण मा  सुगंध निर्माण होसे. 
कोयार पक्षी भी सुंदर गीत गाआवसे ना खुशीलका झाऴईन परा ईतउत चहकसे.यनच ऋतु मा परसाक झाळला रंगी बिरंगी फूल आवसेती. ओन फुलको होलीमा ठुड्‌डी  क दिवस रंग बनायशानी रंगपंचमी 
को त्योहार मनाव सेती.
                बसंत ऋतु मा कास्तकार क खेतमा 
खरीब की फसल लह-या मारसे. पोपट को फूल,चना,सम्बार की फसल ना ओला ठंडो हवाको झोका. खेतमा चना,लाखोरी को हुरडा भुजनकी,ना गरमगरम हुरडा खानकी मज्याच न्यारी से. मनुनच
 यन बसंत ऋतुला सब ऋतु को राजा कसेती.
                                *****
डी पी राहांगडाले
       गोंदिया

बसंत ऋतू varsha patle 01


चैत्र महिना म्हणजे वसंत ऋतू को आगमन. ऋतु म्हणजे *लावण्य महोत्सव*.
स्रूष्टीको रंग.रूप,गंध,रस,इनको लावण्यको महोत्सव.
     लेखीका दुर्गा भागवत इनं त् हर महिना ला एक एक विशेषण देई सेन. जसो चैत्र ला वसंतह्रूदय, वैशाख ला चैत्र सखा.
   वसंत उत्सव म्हणजे निसर्गको उत्सव .मराठी महिनो को पयलो महिना म्हणजे चैत्र महिना.वसंत को ऋतु .वसंत ऋतु मा निसर्ग को सौंदर्य मा च्यार चांद लग जासेत. जीत देखो उत हिरवी पिवरी लाली पसर जासे. निसर्ग रंग को उत्सव मा रंग जासे. हर झाड आपली जुनी कात झाड के एक नवो रंग रूप लका सुसज्ज होय जासे. येन ऋतु माच निसर्ग सौंदर्य डोरा भरके देखन मिलसे. असो लगसे स्रूष्टीको पाठपरा निसर्ग बडो प्रार लका हात फेरसे. आपुलकी अना मायालका. अना आपलो जीवन मा बी असोच वसंत ऋतु को आगमन होसे. निसर्ग सौंदर्य, रंग,रूप,गंध येको संगमाच आपलोला कोकीळ को मधूर स्वर आयकनला भेटसे. कोकीळ को मधूर गूंजन आयकके कान त्रुप्त होय जासेत. 
    वसंत ऋतु मा बीना बरसात झाड ला पालवी फुटसे.म्हणजे येव बी निसर्ग को एक चमत्कार आय. निसर्ग असो अनेक चमत्कार लका भरीसे. फक्त आपला डोरा वोला देखेत पायजे.
      गावको जंगल मा बाहा का पीवरा फुल अना गुलमोहर का लाल फुल देखके असो लगसे जसो निसर्ग मा हल्दी कुमकुम को कार्यक्रम च से. फल,फुल,की रेलचेल वसंत ऋतु मा रव्हसे म्हणून यन ऋतु ला मधुमास कसेत.
वसंत ऋतु मा मधुमालती का फुल बडा सुंदर दिससेत. वसंत ऋतुला सब ऋतु को राजा ऋतुराज कसेत. 
   येन ऋतु को लावण्य देख काही ओळी सुचसेत.

से कोणतो उत्सव
कायको सोहळा चलसे
नाना रंग मा नाहायके
आसमंत बहरसे

कोण पीवाईस अम्रूत
म्रूत झाडको खोडला
चराचर इतउत
हिवरा हिवरा सेत पाला

शीळ घालसे कोकीळ
रान मा पलास फुलेव
बाहावा अना गुलमोहर
बडो शान ल डोलेव


✍सौ.वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी आमगांंव
जि. गोंदिया

बंसंत ऋतू seshrao yelekar 01


वसंत ऋतू सृजन अना आकर्षण को ऋतू आय। फ़रवरी ते ऐफ्रिल तक चलनेवालो योव ऋतू राजा ऋतू आय।यन ऋतू ला भगवान क्रिष्ण भी कहे जासे। निसर्ग मा मनमोहक सुंदरता,हरा भरा फूल फल यन ऋतू की विशेषता आय।

वसंत ऋतू की सुरवात गुलाबी थंडी पासून होसे यन ऋतू मा प्रणय क्रिडा को आकर्षण प्राणी,पक्षी अना वनस्पति मा दिससे म्हणूण यन ऋतू ला कामदेव को पुत्र कहे जासे।

वसंत ऋतू को पहले पंचमी बहूत विशेषता पूर्ण से। वसंत पंचमी ला मा शारदा को जन्म दिवस मनाया जासे,वाग्देवी यन दिवस प्रगट होयकन पूरो सृष्टि मा सृजन शक्ति को संचार करसे।
वसंत पंचमी ला महाराजा भोज को जन्म दिवस को रुप मा मनायोव जासे।तसोच महाराष्ट्र पंढरपुर मा यन दिवस विठ्ठल रुक्मिणी को बाह्या लगायोव जासे।

वसंत ऋतू मा चैत्र नवरात्र की भी सुरवात होसे,होली शिवरात्रि सारखा महत्त्वपूर्ण त्योहार यन ऋतू राज मा मनाया जासे।
यन प्रकार वसंत ऋतू सुंगार,सृजन अना आकर्षण बरोबर भक्ति भाव लका मनायोव जासे।


शेषराव वासुदेव येलेकर

दि। १२/०२/२१

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...