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Tuesday, April 21, 2020

तपन


आयोव उनारो उनारो
सोळा काड्यायकि तपन
सावलीमा रवनसाठी
धडपड्सेती सारा जन//

गाय भस बैल शेरी
मोउखाल्या घेसेत धाव
लगी तपन आंगला
मुहून बलकिबि ,वंज्यान सोव्//

मोरो कवलको घर
उभि तपन झेलसे
नयि लग् ए. सी.वंज्यान
पंखोलक काम होसे//

आब् लगावो वा अंबराई
गार सावली गावला देये
आंबा मोऊ कट्या खेतका
तपन कायेनयि पऱ्यान लेये!//

नोको बिवो तपनला
तपन तपावसे तनला
वंज्यान मरसे कोरोना
तपन मारसे जंतुयला//

करो पापळ,सेवया,कुरोळी
सुकावो चना गऊ दार
तपनलका बनाओ ऊर्जा
तपन कसे कचरो जार//

या तपन तपन 
देसे सूर्यनारायण
लगावो पिपर बड आब्
हासे धरती पर्यावरण//

थंडी तपन बरसात
आये कोणतोइ हवामान
कष्ट करबि खुशीलक्
बढे समाजमा् मान//

पालिकचंद बिसने

तपन


सूर्य देखो सोनो को रथपर सवार
उतर रही से धरती को आंगन मा।
कण कण जाग रही से धरती पर
देखो नवसंजीवन को स्वागत मा।।

चिमनी पाखरू  की मधुर ध्वनि 
बगीचा मा फूलकी हासती कमान।
दुनिया होती आबवरी शांत निशब्द
सब तिरीप को संग भया सजुमान।।

धीरू धीरू आता दुनिया गतिमान
समय चक्का फिरेव तिरीप भई जवान।।
तेज चांदी को आयेव तिरिप को तोंडपरा
झवराय गया धरती का सब वान।।

गाय, बैईल सब सुस्तान आया कोठामा
तपनको झर्राटा फूलइनं सोडिस आंग।।
पशु पक्षी की दमछाक भई तपन लका 
पाणी नहीं मिल कही, गरोमा लगी आग।।

माणूस लुकायेव आपलो आपलो घरमा
परसा,गुलमोहर सजी से तपनमा लाल।
सबला आता से बीरानी बेरा की आस
तपन होए थोड़ी बूढ़ी सावोली बने ढाल।।

✍️✍️सौ. छाया सुरेंद्र पारधी.

तपन

चिलचिलाती या तपन से
सूर्य आग वऱ्यालका ओकसे
तरी न थकता खेतमा राबसे
असो आमरो बंधु कास्तकार से

सारो जगको पालनकर्ता
नाहाय वोला तपन की वरवा
धान  रबी को काटसे खेतमा
मायं बेचन जासे दुपारी सरवा

सब घरमा बस्या सेती आबं
कोरोना विषाणू को भेव लका
सबकी फिकर से वोला म्हणून
खेतमा राबसेती हात कास्तकारका

बारा महिना राबसे खेतमा
तरी खासे खुद चटनी भात
तरी भाव नही आव अनाज को
फीरसे वनवन दुखतलका लात

✍वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी आमगांव
गोंदिया

तपन


चंद्र को ठंडो छपरी मा
सोयी होती निसर्ग सृष्टी
सूर्य कि हिटी  से तपन
त् चराचर परा भयी वृष्टी ।।

तपन लक भेटसे ऊर्जा
विकसित होसे नवो जिवन
कर्तव्य ला देयकन महत्व
सूर्य करसे नवसृजन ।।

जिवन मा बि आवसे तपन
देखावसे दुक को खेल
हिम्मत लक जगनो त्
सुक को आवसे नवो मेल

नको घबरावो तपनला
देखो वोकोमाकि सुंदरता
तपन आवसे मुन  रवसे
सावोली संग आमरो रिस्ता ।।

तीन प्रहर को तपन को
मानवता लक लेवो फायदा
सूर्य कि होये मोठी कृपा
एकता को होये वायदा ।।

वंदना कटरे "राम-कमल"
गोंदिया
१९/०४/२०२०

तपन


उनारो क् दिवसमा, कशी तपन तपसे भारी
वन् तपनमा आनत होता आमी मोवुकी टोरी

एक हातमा रव डांडु, रव दुसर् हातमा झोरी
टोरुंबा फोडत होता, आमी करत होता टोरी

तपनको भेव नोहतो, आमरीच सीना जोरी
भुकनी रव पुळीमा खानला आंबाकी कैरी

पाय  लासत मनमाने, मंग ढुंडत होता गवतोरी
परसाका पान बांधजन पायला  तपन रव भारी

गिल्ली डांडु खेलत होता, जरी तपन रव भारी
पानी साती बाटली नही, लगत नोहोती शिदोरी

तपनत् तप मनमाने, झकार लगत होती भारी
माय कव बेटा सकारी खेल, नोको खेलु दुपारी

आब् पंखा संग कुलर आयी, तरी गरमी लगसे भारी
तपनमा का गया जरासा, आमला झाव लगसे भारी
******
✍ डॉ. शेखराम परसरामजी येळेकर नागपूर १९/४/२०२०

तपन


धूप छॉव आदमी क् ,जीवन को से अंग।
जब ओरी सावली से,तपन बी से संग।
धूप छॉव ला देयो जासे,सुख दुख की उपमा।
जब ओरी सुख से, दुख भी रव्हसे संगमा।

तपन म्हणजे सूर्य को प्रकाश,
वोक् लक् होसे हमखास विकास।
जीवन मा सावली को जो से स्थान,
तपन बी ओतरीच जरूरी से श्रीमान।

तपन मुळ् धरतीपर जीवन से सुरक्षित।
तपन नहीं रहे जीवन होय जाहे विपरीत।
तपन तपसे मून रोगजंतू को होसे नाश।
गर्मी भी मिलसे अना फैलसे प्रकाश।

तपन तपेव ल् पानी की होसे भाप।
आसमान मा जायस्यार बनसे बादल आप।
पानी बरसाय स्यार येन धरतीपर।
नदी, नाला, तलाव, बोडीला देसे भर।

सावली मा आदमी ला आवसे बहुत आनंद।
पर तपन करसे आदमी क् जीवन को संरक्षण।
जीवन साती तपन जरूरी से, वोको नोको करो त्रास।
प्रगति पथपर जानसाती,तपन को संगसे खास।

तपन मा विटामिन डी बनसे,
जो प्राणी इन साती से जरूरी।
झाड झळुला बी तपन माच् ,
आपलो भोजन तयार करसेती।

               रचना- चिरंजीव बिसेन
                                गोंदिया.
                         दि.१९/४/२०२०

तपन


कर ले रे मानवा एक जपन,
मेहनत से जेको नांव तपन ll

सुरज किरण आये, जीवन मा एक बार बनके तपन करले मानव एक  जपन ll

कर्म मा से जेको तपन, मेहनत भी बन जासे जीवन की लगन ll

बन जावो एक सितारा,मेहनत की तपन लक नोको करो किनारा ll

देश से भारत जगमा प्यारो, विश्व मा बनावनो ओला न्यारो ll

पोवार की  से बात न्यारी, करो बदलावं की नवीन तयारी ll

चल्या सेती मेहनत की तपन को संग वरी, फल भेटे जिवन वरी ll

मेहनत की तपन की बात से न्यारी, पोवार सपुत करो स्पर्धा की तयारी ll

डाँक्टर होवो, इजिनियर होवो या  कलेक्टर, मेहनत की तपन को आता लिखो पेपर ll

शिक्षक भया बाबू भया अना आता भया प्राध्यापक, आता बाजी मारो, वैज्ञानिक बनो ll

जहाज चलावो विमान उडावो, उद्योग धंदा मा समाज की पताका लहरावो ll

प्रा.डाँ. हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु.पो.दासगांव ता. जि. गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४ 🙏🙏

तपन


सकार भई,दिन निकल्यो,कच्ची तपन न डाक दईस आंगन मा डेरा
उठ रे बेटा, उठ रे बेटा,भय गई आता राम राम की बेरा।।

तिरिप तपन की देख कशी,मार से डोरा
महू सूख से कड़क यको मा, भर भर कर बोरा।।

मोठांगन लक नाहनांगन तक,तपन चढ़ गई भारी
कपड़ा लत्ता भर झोला मा
कर मामा गांव की तैयारी।।

आयक ले परख ले तपन अना साहोली की गाथा
तपन याच तपोवन आय जीवन की, समझावसे जाता जाता।।



✍️ सौ.ज्योत्सना पटले टेंभरे
               मुंबई

तपन


ब्रम्हाण्ड माको देखो चमत्कार
नवग्रह,धरती फिरसे गोलाकार।।
३६०दिनमा प्रदक्षिणा करेपर
नक्षत्रकी निर्मिती होसे धरतीपर।।

परीनाम येको तीन त्रुतू होसेती
चैत्र ना वैशाख तपन देसेती।।
 सुर्यकी तपन देखो नवतपामा 
थंडीकी याद आवसे उन्हारोमा।।

 अमराईमा आंबाकी महकआवसे
कोकीळा ही मंजुड़ गाना गावसे।
सबला शितल ठंडी छाया मिलसे
पशु पक्षी सबको जीवन पलसे।।

ग्रुहिनी आपलो काम करसेती
पापड़ कुरोड़ी ,बड़ी बनावसेती
आलु चिप्स, मिरची तपनमा वारसे
सालभरकी सामा सबक घर होसे।।

परसाला देखो मोठा मोठा पान
पाणी नहि तपनमा अलगच शान।
निसर्गमा झाड हे उलटा चलसेती
समुद्रलं पाणी धरती पर आणसेती।।

वाय सी चौधरी
गोंदिया

तपन


रकत नहीं, घामच निकले, एको मा कोई बात नहीं,
मोरो जोर को सामने, तपन की काई औकात नहीं!

भुजबल, मनोबल अना आपरो पर भरोसा से मोला,
भोज को वंशज आव मी, असी-वसी मोरी जात नहीं!

पुरखा गिन ल मिली सेती धीरज का वोतरहि गुन,
भरोसा से सूरज निकले, सदा रहे यहाँ या रात नहीं!!

मांगू नहीं कभी कोई ला, दुसरो ला देन की चाह से,
स्वाभिमान रग-रग मा से, ये कोरा जज़्बात नहीं!!

येन तपन ला दिन-दिन भर झेलूँ सु आपरो पर,
आराम की छांव मा रहस्यार, मिलअ भात नहीं!

उजालों सबको जीवन को सारो, येन तपनलच मिल से,
बिना जरयो त दीपक भी यहां करअ कोई प्रकाश नहीं!!

तुमेश पटले "सारथी"
केशलेवाड़ा, बालाघाट(म. प्र.)
दिनांक- १९/०४/२०२०

तपन


२२ मार्च ला दिवस रात भया बराबर
मंग दिवस मोठो होसे उन्हारो भर।

उन्हारों मंजे तपन की होसे भरमार
आंगभर पसीना पानी की मारामार।

सकाळ पासुन होसे तपन को सर्राटा सुरु
बाप कसे बेटा ला तपनमा नोकों फिरू।

कूलर पंखा लगायशान घरमा सोव
आब कोराना को सबलाच से भेव।

तपनलका आहत भया पशुपक्षी नरनारी
कबी तपन कबी सावली धन्य प्रभु माया तोरी।

✍️श्री. धनलाल रहांगडाले 
           गोंदिया

तपन


उन्हारो  मा   भग   गयी  तेज  तपन 
जरन   लगयो   भाऊ   मोरो  बदन
सावली   मा   बसके   लव   आनंद
मिल्हे    राहत अना खिल्हे   तन - मन ।।

भरी   तपन  मा  गँहू, अरसी ,  चना 
मूरनो  से  राई ,लखौरी   अना  धना
सकारी  डोसका दर्द को मिसा बना 
दादा मोरो चिन् गयो, कसो करू मना।।

कूलर,पंखा ,ए.सी. को दिवस आयो 
ठंडो  पाणी  लक   खूबच  नहाओ 
परसा  को  पान  मा  जामुर खाओ 
सुट्टी  लगसे   मामा  को  घर  जाओ ।।

तपन मा धरती को सीना जर  जासे 
पाणी  सुखाय उड़  भाप  बन  जासे 
दुपहरिया की तिरीप इस्तो जसी लसे 
आम्बा को तिख्खो खावन‌ मा भासे ।।

जीवन मा दुख सरिखी तपन आवसे 
धीरज ले  जिओ  यो  मान बड़ावसे
अपरो  परायो की  पहचान करावसे  
सुख  पायके  मानुष  जग   रचावसे ।। 

✍🏻 रचना- पंकज टेम्भरे 'जुगनू'

तपन


मायमाता खवावसे घास ! बाप देखावसे बाट!! 
शिकावसेत चघनला घाट!  येन संसार को !!

घरमा कष्टकरसे माय  ! बाप झिझासे खेतमा !! 
ऊनला झोप बी रातमा  ! काही लगनही  !!

टुरुपोटुसाती मायबाप  ! खुनको पाणी करसेती! 
चागंलोच भविष्य देसेती  ! आपलो जीवनभर  !!

माय घडावसे संस्कार  ! बाप शिकावसे कर्म  !!
आय मानवताको धर्म  ! सेवा मायबापकी !!

माय जन्मकी शिदोरी  ! बाप आय आधार  !!
जन्मदाता का उपकार  ! तुम्ही भुलोनोको  !!

आमरा मायबाप आती  !  केवळ ना काशी  !!
तुम्ही मायबाप ऊपाशी  !  भाऊ ठेवोनोको  !!

तपनलक आमरी सुरक्षा  ! करसेती झाड  !!
मायबाप संकटमा आड  ! सदा आवसेती  !!

सेवा करबिन मायबाप की  ! जिवन बाहाल !!
दास को दास हिरदीलाल  ! रहे चरणोमा  !!

                   !! कवि !!
           श्री हिरदीलाल ठाकरे 
  मु, भजियापार पो, चिरचाळबांध
ता आमगाँव जिल्हा गोदिया माहाराषट्र 

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...