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Sunday, September 20, 2020

आरती माय गढ़कालिका की

(चाल: ओम जय जगदीश सहारे)

आरती -माय गढ़कालीका की 

जय कालीका माता, मैया गडकालिका माता ।।
आरती   करू माय तोरी ,तू सेस  सुखदाता ।।धृ ।।

ब्रम्हांड़ की रखवाली तू माता, धारानगर आयी ।।
धारानगर को राजा भोज, उनकं मन भायी ।।जय।।

तू  कालिका  तूच  भवानी, तूच दुर्गा  माता।।
सुख दायनी माय मोरी,तूच सेस दुख हर्ता  ।।जय।।

राजा भोज का वंशज, पोवार की जाती।।
शरनमा आया तोर,करू तोरीच आरती ।।जय।।

सुंदर सिंहासन तोरो, झलके माणिक मोती।।
ध्यान लगज़ासे तोरो सुधबुध बीसर जाती ।।जय।।

बेलफुल नरीयल चढावुन, अगरब-ती संगमा।।
कृपा होय जाय तोरी, रंगू न भक्ती क रंगमा ।।जय।।

वैनगंगा क ओटामा बस्या, पोवार,छतीश कुर।।
सबको कल्याण करजो माय,नोको करजो दूर।।जय।।

भक्त तोर चरनमा आया,मैया भक्ती करसेती।।
करजो सबपर छाया,मैया करून तोरीच आरती॥जय।।

श्री. डी. पी. रहांगडाले
  गोंदिया



माय गढ़कालिका

९०२१८९६५४०                            dpr
                 
             माय गडकालिका 
                
               (चाल:- मां ज्वाला तेरी )
                ****************************
 जय अंबे माय गड कालिका नमन तोला बारबार 
भक्त की तू रखवाली से २ //
सिंहासन पर चढी भवानी कर सोळा सिंनगार ss
महिमा अजब निराली से //धृ //महिमा........

कोणी कसेती माय दुर्गा कोणी कसेती भवानी /
धारानगरी मा आसन तोरो चंडिका कसेत कोणी //
भक्त आया तोर चरनमा करदे बेडापार ssss 
तोर बिन कोन वाली से २ //१//सिंहासनपर......

राजा भोज की कुलदेवी जेका आम्ही वंशज आजन /
पोवार जाती  आय  आमरी सेवा तोरीच कर सेजन //
तोर द्वार पर मस्तक ठेऊ ना  बेलफुल चढावू ssss
हात आरतीकी थाली से २ //२//  सिंहासनपर......

वैनगंगा मा ओटामा बसीसे पोवार की जाती/
रातदीन वय गावसेती माय तोरीच आरती //
नोको दुरावजो माय आमला गुण गावुन तोरो sss
पोवारी च मायबोली से २ //३//सिंहासनपर.......

धरती क कोना कोना मा बसी पोवारकी जाती/
बोलसेत  वय पोवारी ना करसेती तोरीच आरती //
आशीर्वाद सबला देजो करूसू बीनती बारम्बार sss
तुच भक्त की रखवाली से २ //४//सिंहासनपर.....

डी पी राहांगडाले
    गोंदिया



Friday, July 10, 2020

श्रावण महीना D.P.Rahangdale

           श्रावण महीना

श्रावण  महीना खुशीसे मनमा आसपास हीरवोगार
घऴीभर मोठी तपन लगसे घऴीमा पाणी थंडोगार

वरत्या  देखो इन्द्र धनूस से ज़सो गोफ गुफीसे दुहेरी 
जसी तोरन बंधीसे वरत्या आकाशमा लटकीसे दोरी

घऴीमा होसे अंधारो दिससे जसो दिवस बुऴजासे
धऴीभरमा तपन निंघसे त दिवस वर त्या  दिससे

कावऴ कावऴया काहाऴशानी कसेत हर महादेव
कोणी मंदीर पुजा करसेत कसेत मोला सुखी ठेव

थंडीथंडी हवा चलीसे मनमा भई खुशी भारी
खेतमा जासे खार खंदसे परा लगावसे नारी

जितऊत हीरवोहीरवो जसो हीरवो शालु आंगपरा
भक्त भक्तिमा त-लीन होसे कर वीठ्ल जयकारा

डी पी राहांगडाले 
     गोंदिया

नवरा को महत्व D.P. Ranangdale

नवरा को महत्व 

नवरा मनजे काय गरोको हार।
सुखको संसार, नवरा लका ।। १।।

भांगोभांग कुकु नवरा की निशानी।
जसा राजा राणी, नांदसेती।। २।।

कपार को कुकु  बाई को गहनो।
पती देव मानो, बहीणी मोरी।। ३।।

देव, पतीदेव, नवरदेव तिन।
तिनहीका गुण, एक जानो।। ४।।

पतीदेव आय घरकी राखन।
घर की बऴे शान, नवरालका।। ५।।

बायको याच माय ना बहीन भी आय।
सेवा करत रहे, नवराकी।। ६।।

नवरा बायको दुही संसार का च क्का।
संसार चले बाका, किरती होय।। ७।।

दुय मालक एक कमजोर पऴेव।
गाऴो गा मुऴेव संसार को।। ८।।

एकमेकला कमी नोको लेखो कोणी।
एतरी से विनवणी, चरनमा।। ९।।

डी पी राहांगडाले
   गोंदिया

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...