Sunday, April 12, 2020

मामा को गाव


     दि, 12-04-2020- दिवस रविवार 
                स्पर्धासाती 
         विषय : मामा को गाँव 
                    अभगं 
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गोदिया जिल्हा मा !खोलगड़ से गाँव! 
ऊमाप्रसादजी से नाव! मामाजी को,,,!!

गाव को मंज्यार ! बनीसे हनुमान मंदिर! 
शोभा दिससे सुदंर! गाव खोलगड़ की ,,,!!

गाँव कोच बाहार! आबां की अमराई!! 
कसी फुलसेत वनराई! भाऊ निसर्ग की ,,,!!

गाँव कोच बाजुला! सेत जगंल पाहांडी!! 
शेर चित्ता डरकाडी! भाऊ मारसेती,,!! 

जगंल को मंज्यार! तर्रा बनीसे गगांसागर!! 
से स्वर्गलक सुदंर! दिससे शोभा वाहांकी,,!!

आय मोरो सौभाग्य! जनम वाहा भयेव!! 
अज मगंलमय भयेव !भाऊ जीवन मोरो ,,!!

याद आवसेती मोला! मोरा आजी आजा!! 
घनगडी को बाजा! आम्ही बनावजन,,!!

भाऊ गाँव को बाहार! बनीसे प्राथमिक स्कुल !!
वाहा दास हिरदीलाल! वाहा शिकत होतो,,,!!
                     कवि 
         श्री हिरदीलाल ठाकरे 
  मु, भजियापार पो, चिरचाळबांध 
ता, आमगाँव जिल्हा गोदिया माहाराष्ट्र

मामा को गाव

काव्य स्पर्धा ५
दिनांक:१२/०४/२०२०
विषय: मामा को गाव

उन्हारो को सुट्टिमा जाजन मामाको गांव।
गुडुरलका अजी आमला आनला आव।।

आखर लकाच घोलर को अगाज कानमा आव्
मोठो मोठो बैलइनला घोलर झुली को साज रव्।।

बिहाई की आवभगत होय नमस्कार चमत्कार।
पाय धोवन पानी ना चाय नास्ता लका सत्कार।।

रातवा आंबा को रस, घिवारी को  पाहुणचार।
दूसरो दिस खुसीखुसी गूडुरपर होजन सवार।।

गुड़गुड़ गूडुरकी भोवरी चलत गाळदान की बाट।
बेसकड़को नंगरदरूजा दिसत होतो मामा थाट।।

चाट्या बाट्या कनार को शेंदर्या आंबाला जाजन।
पेज रायतो खायकर आंबा खालत्या खेलजन।।

खेतमा मोट को झुर झुर पानीमा लोरजन।
बाबुर को ढीक, चार  की बिजी फोड़जन।।

रातवा दिवोको उजाडो मा मज्या लक जेवजन।
आंगन माको मांडो खाल्या ओरिलऽ सोवजन।।
 
अजी नवहाथ करुला की लंबी कहानी सांगत ।
दूर ढोड़ी परा धुंदुर ,वरत्या चांदाचांदनी दिसत।।

अज बी याद आवसेत मामा को गाव का दिवस।                  नई मिलत आब् बेटाबेटीला तसा छुट्टीका दिवस।।

                     - सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

Saturday, April 11, 2020

माय

काव्य प्रकार : मुक्त छंद

मोरो तोरो पर केत्तो से पिरम
कसो मी सांगु तोला

काटा गड्से तोरो पायला
दुख लगसे मोला

तबेत होसे तोरी खराब
रातभर जागूसू मी

तोरो पोट भरणसाती
अर्धी रोटी खासू मी

दुनिया मा जगनसाती
तोला संस्कार चांगला देसू 

तोरोच साती बेटा मी
काळी सरिखी झीजुसु 

तोरो भविष्य बने पायजे मून
एक एक पैसा जोडूसू

मोठो होएकर सहारा देजो
दूध को करजा कबी नोकों भूलजो

माय को बुढ़ापा को सहारा तू बनजो
नहीं बनेस काहि चले पर चांगलो इंसान बनजो

✍️ सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

Tuesday, April 7, 2020

महाराष्ट्र का जिल्हा


झाडी पट्टी का जिल्हा,
गोंदिया,भंडारा,गडचिरोली, चंद्रपूर.
धान क् खेती साती,
प्रसिद्ध सेती सर्व दूर.

वर्धा,अमरावती अना नागपूर,
पिकसेत वाहॉ संतरा मधुर.
पश्चिम विदर्भ मा आवसेत,
यवतमाल,बुलढाणा,वाशिम, अकोला,
कापूस साती प्रसिद्ध सेती,
चारही बाजूला. 

मराठवाडा मा ज्वारी पिकावसेत,
जालना,परभणी,औरंगाबाद,
तसोच नांदेड, हिंगोली अना,
बीड,लातूर, उस्मानाबाद.

उत्तर महाराष्ट्र मा सेती,
नाशिक,धुळे, जळगांव, नंदुरबार,
वहॉ पिकसेत मस्त,
केरा, अंगूर अना अनार.

पश्चिम महाराष्ट्र से समृद्ध,
होसे वहाॅ गन्ना की खेती.
पुणे, अहमदनगर,सोलापूर,सातारा,
कोल्हापुर,सांगली वोका जिल्हा आती.

कोकण मा पडसे पानी भरपूर,
जिल्हा वहॉका ठाणे,पालघर,
रायगड,रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग,
मुंबई अना मुंबई उपनगर.

                चिरंजीव बिसेन
                       गोंदिया.

Monday, April 6, 2020

मोरी माय


पहाटला लवकर होती उठत,
झाडस्यार साफ कर घर आंगन.
वोक बादमा चुल्हो पेटायस्यार,
दार, भात, भाजी बस रांधन.

शाहणी माय ला दे तोंड धोवन पानी,
तब ओरी शाहणो अजी मांग चाय.
सबका उनकी जरूरत की चीज,
समयपर देत होती मोरी माय.

सयपाक होये क बाद मा जल्दी-जल्दी जेव,
बाद मा शिदोरी धरस्यार जाय खेत.
दिवस भर प-हा लगायेव क बादमा,
घर आवनला दिवस बुडता वोला भेट.

दिवस बुडता सयपाक बनायस्यार,
सबला दे राती जेवण खानला.
बर्तन भांडा धोयेव क बादमा,
सबदून बादमाच भेट वोला सोवनला.

टुरू पोटू इन की स्कुल की तैयारी,
पाहुणा पयीन को जेवन खान को काम.
सबकी जरूरत का काम करता करता,
वोला नहीं भेटत होतो बिलकुल आराम.

               रचना- चिरंजीव बिसेन
        परमात्मा एक नगर, गोंदिया
                   दि.०६/०४/२०२०

Sunday, April 5, 2020

भारत का राज्य


भारत क् पश्चिम मा से
राज्य महाराष्ट्र,राजधानी वोकी मुंबई.
प्रसिद्ध स्थल सेती अजंता,वेरूळ, नागपुर,
पुणे ना सबसे उचो शिखर कळसुबाई.

देश क् बीच मा से राज्य मध्यप्रदेश,
राजधानी वोकी से भोपाल.प्रसिद्ध स्थल सेती पचमढी,खजुराहो
अना उज्जैन को महाकाल.

सबसे पश्चिम मा से राज्य गुजरात,
राजधानी वोकी से गांधीनगर.
जहाॅ गांधीजी को जनम भयेव,
वोन् शहर को नाव पोरबंदर.

सबसे मोठो राज्य से राजस्थान,
राजधानी वोकी से जयपुर.
रजपूत क् गाथासाती प्रसिद्ध सेती
चित्तोड, जोधपुर अना उदयपुर.

भारत क् उत्तर भाग मा राज्य सेती,
पंजाब अना हरियाना.
राजधानी उनकी चंदीगड,
मोठा शहर गुडगांव,अमृतसर ना लुधियाना.

जम्मू काश्मिर आता बन 
गयेव केंद्रशासित प्रदेश.
राजधानी से वोकी श्रीनगर,
जम्मू काश्मिर ना लद्दाख दुय प्रदेश.

हिमाचल प्रदेश की राजधानी से शिमला,
वहाॅ प्रसिद्ध सेती कुल्लू,मनाली ना धर्मशाला.

उत्तराखंड से राज्य लहान,
राजधानी वोकी देहरादून.
मोठा मोठा तिर्थ सेती,
बद्रीनाथ,केदारनाथ,ऋषिकेश,हरिद्वार.

जनसंख्या मा मोठो राज्य से उत्तर प्रदेश,
राजधानी लखनऊ,ठाट वोको राजशी.
तिर्थक्षेत्र सेती वहाॅ का,
अयोध्या,प्रयागराज अना काशी.

बिहार की राजधानी से पटना,
वहाॅ पूर लका होसे बडी दुर्घटना.
रांची से राजधानी झारखंड की,
जमशेदपूर,बोकारो सेती स्टील सिटी.

पूर्व को राज्य पश्चिम बंगाल,
राजधानी से वोकी कलकत्ता.
वहॉ प्रसिद्ध सेती दार्जिलिंग,
सिलीगुड़ी ना गंगासागर यात्रा.

उड़िसा की राजधानी से भुवनेश्वर,
मुख्य सेती पूरी,कोणार्क ना कटक.

आपलो पडोसी राज्य छत्तीसगड,
की राजधानी से रायपुर.
प्रसिद्ध सेती डोंगरगड,भिलाई,
अना हायकोर्ट को शहर बिलासपुर.

तेलंगाना की राजधानी से हैदराबाद,
वोको जुडवा शहर से सिकंदराबाद.
आंध्रप्रदेश की राजधानी से अमरावती,
आंध्र मा प्रसिद्ध से बालाजी तिरूपति.

कर्नाटक की राजधानी से बंगलुरू,
प्रसिद्ध शहर सेती मैसूर ना मंगलुरू.
तामिलनाडू की राजधानी से चैन्नई
प्रसिद्ध सेती रामेश्वरम,कन्याकुमारी ना मदुराई.

केरल की राजधानी से तिरूवनंतपुरम,
मुख्य शहर सेती कोच्ची ना एर्नाकुलम.
खूबसूरत गोवा की राजधानी से पणजी,
लहानशो से पर देखनलायक सेजी.


पूर्वोत्तर मा राज्य सेती आसाम,सिक्किम,
अरूणाचल प्रदेश,मेघालय,मणिपुर
मिजोरम, नागालैंड अना त्रिपुरा.
राजधानी उनकी क्रमलक दिसपुर,गंगटोक,
ईटानगर,शिलांग,इम्फाल,
आइजोल,कोहिमा अना अगरतला.

केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली,चंदीगड,पांडेचरी,
अंदमाम- निकोबार,लक्षद्वीप अना
दादरा नगर हवेली-दीव-दमण.
राजधानी उनकी दिल्ली,चंदीगड,पांडेचरी,
पोर्ट ब्लेअर,कवरत्ती अना दमण.

           रचना- चिरंजीव बिसेन
       परमात्मा एक नगर,गोंदिया.
                 दि.२०/०२/२०२०
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काव्य स्पर्धा क्र.4 "आंदन"

काव्य स्पर्धा क्र.४
स्पर्धा साठी
विषय: आंदन (दहेज)
    (एक टुरी की व्यथा)


नहानसो आम्हरो परिवार,
दुय बहिन एक भाई
संग आम्हरा पालन हारा,
मोरा बाबूजी अना आई

एक दिवस बात हिन् को,
जमेव असो रंग
आई बाबूजी कव्हन लग्या,
मोठी बाई नहीं रव्हन की आम्हरो संग

आयकताच हृदय मोरो,असो भरेव
मीन असो कोनतो,पाप करेव

मोला रोवता देख,जवर आयी आई
गलती तोरी काही नहीं, तोरो बाबूजी ला से बिह्या की घाई

गरीबी मा कसो होये बिह्या,येवच् सोचत जासु
मामाजी को फोन आयेव, पाहुणा धर के आऊसू

पाहुणा आया बिह्या जुड़ेव,करन लग्या बीह्या की तैयारी
मोरो आई बाबूजी ला,चिंता पड़ गई भारी

बाबूजी कव्हत,जमानो को मानलक चलनो पड़े
टीव्ही,फ्रिज,कूलर, बर्तन भांडा, आंदन देनो पड़े

नवरदेव का कपड़ा,अंगूठी देन को, निभाईन फर्ज
कपड़ा लत्ता आंदन साठी निकालिन कर्ज

कसो होए बिह्या,बाबूजी न हाय खाय डाकिन
बिह्या सजरो करन साठी,अर्धो एकड़ बिक डाकिन

अगर आंदन की,या कुप्रथा नहीं रव्हती
मोरो बाबूजी की,आर्धो एकड़ नहीं बिकाती
टुरी पैदा भई ये मोठो पाप
मोरो कारण दुःखी भया माय बाप


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 ✍🏻 संतोष (सोनू) हनसलाल बिसेन
मु. पो. दासगांव खुर्द
त.जि. गोंदिया

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...