Friday, July 3, 2020

लख्तखाड palikchand bisane 16


लाख्तखाड

अखाड लगेव ,खारी वाप्या
करो पराकि तयारी
मातीलका धुरा चिकन
खेत मोरोसे कनारी//

अखाड लगेव ,मिरुग आयोव
करो खेतमा चिराटा
जारो कुटार ,तनिस सडी
लिजावो घर् सारा खराटा//

परो पिवरो पिवरो खेत्
होरे खेलसेति वंज्यान
पक्षी देखकन मन
खुशीलक् लव् मोठ्यांन//

पावस्या कव्ह, तु तसाच होस
जागवसे किसानयला
आब् सोडो किटकनाशक
धरो निसर्ग खेतीला//

बनायकन ठेवो ,जिवामृत
घरिच बनावो ,दसपर्नि अर्क
बचाओ खेती पोवार आब्
नयित् जिवन बने नर्क//

पालिकचंद बिसने

सिंदिपार (लाखनी)

लाख्तखाड D.P.Rahangadale 16


 
लाक्तखाळ 
         
लाक्तखाळ मनजे लगेव अखाऴ असो होसे।
कीसान, किसानी लगावनकी तयारी करसे।।

तिज लका प-हा क मोहतूरवरी अखाऴ कसेती।
बरसातको स्वागतला बाई /माणूस तयार होसेती।।

बाईन बनाईस कणीककी सेवई ना पिठका पापऴ।
दारकी बऴी टाकता झोपकी आयी बाईला झापऴ।।

बाईन आलूचिप बनाईस अना दहीका मिरचा।
जराजरासो सब बनाईस कसे बहोत भयोव खरचा।।

खेतीमा टाकिस माती, तिर ना तोर लगाईस धुरोला।
पेरीस बाऴी, लगाईस बाल, झुनकी,ककऴी, करुला।।

खेतीला पैसाकी गरज भाऊ बंक/सावकार घर गयेव।
खेतीका सातबारा गाहाण ठेयशान पैसा लेकर आयेव।।

पयेलो काम खरपऴाको बखर भ-या ना जूवाऴी।
बखर जुपशान खेतमा गयेव सिंगरा  बैलकी जोऴी।।

दुसरो काम खात फेकनको जुपीस बैलबंडीकी डाली।
पुरो खेतमा खात फेकीस करीस उरकुऴा खाली।।

अखाऴमाच खारी भरीस करीस खेतीको चि-हाटा।
हारेव थकेव कभी दुपारमा लेसे झोपको ख-हाटा।।

पऴेव पाणी निकली खार खेतमा हरयाली छायी।
प-हा क मोहतुर की बाट देखता झोपच लगगयी।।

डी. पी. राहांगडाले
9021896540                      
     गोंदिया

लाख्त खाड swati turkar 16

   लाक्तखाड़ को बिह्या  
लाक्तखाड़ मा बिह्या करणो पड़ गयव बाबा भारी,
पाणी बरस रही से असो , 
                पानी पानी आई मांङोधरी।
हरद चढाइन देवहिनला,             
                धरस्यार मोरया मोरी।
डेकोरेसन होये कसो ,
                लगाया तप्पड़ ना ताटपतरी।
तेल चढ़ाया,हरद भई,अहेर पड्या,
                 आता से बरात की बारी।
नवरदेव आयव फाटक पर ना,    
                  पानी न लगाय देइस झडी।
छत्ता धरकर बिह्या लगयव,
                  भीजगया नवरदेव नवरी।
बिह्या लग्यव ना पानी परायव,    
                  बिदाई भई दुसरो दिवस सकारी।
लाक्तखाड़ मा बिह्या करणो पड़ गयव बाबा भारी।


स्वाति तुरकर

लाख्तखाड chiranjiv bisen 16

       लाक्तखाड
         
मिरूग पासून होसे लाक्तखाड सुरू, 
बीच बीच मा पानी पडसे भुरू भुरू. 

प-हा क् पहले क् समय ला कसेती लाक्तखाड, 
खार भरनो, चि-हाटा करनो को काम लाक्तखाड. 

धुरा, पारी को काम येनच समय मा क-यो जासे, 
बहू आपल् मायघर मुलाकात साती जासे. 

बहू मायघर नही गई त् मायघरल् खाजो आवसे, 
बहू को अजी नही त् भाई खाजो आन् देसे. 

टोरूंबा, जांभुर, कोसम पिकसे लाक्तखाड, 
आंबा की घात ओझळत आवसे लाक्तखाड. 

लाक्तखाड को महत्वपूर्ण सण आय अखाडी, 
नविन बहू ला आनन को सण आय अखाडी. 

हिवरो हिवरो गवत पालसे चारही बाजूला, 
सरप, बिच्चू, भेपका निकलसेत आजू बाजूला. 

किसान ला रव्हसे कामकी बहुत लगबग, 
खार भरनो, चि-हाटा करनो निपटावसे फटाफट. 

              रचना - चिरंजीव बिसेन
       परमात्मा एक नगर, गोंदिया.

लाख्तखाड varsha patle rahangdale 16


लाख्तखाड

आई आई लाख्तखाड, बेटी बाट देखसे
आनन आये मोरो भाई,याच आस ठेवसे।।

खाजो धाडे मोरी माय,चिवळा,खुरमी,लाळू
मामा घरको खाजो खाये,मोरो लाडको बाळू।।

खारी दोरी भरके भयी,धुरा पलायके भया
पर्ऱ्हा धरनको पयले,भाई भोवजाई आया।।

माय बाप की जागा,लेयेत भाई भोवजाई
लाख्तखाळ की बेरा,कसी पसाऊ सेवई।।

माच परका आंबा सऱ्या,जांभूर पीकी लटालोंब
टोरी सपा झळ गयी,नाहाय काही हाकबोंब।।

खात फेकके भयेव खेतमा,बगराऊ कशी कशी
सरप,बिच्चु ओन ढगमा,मोठा मोठा धस्या सेती।।

माय घर जाऊ कसु,रस रोटी खाऊ कसु
मायापीरत लका मायघर,दुय दिवस रहू कसु।।


वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी( आमगांव)

लाख्त खाड vandana katre 16

   
लाक्तखाड

लाक्तखाड मोठो पड्यव होतो दुसकार
गलती होती आमरी कसो आये सुकार ।।

निर्वस्त्र होती धरनी कोंज्या होतो खुबार
हिवरो हिवरो कोंबला कसो फुटे उकार ।।

चारो साती वनवन फेस आव तोंडभर
झाड कटाई को येव च होतो नकार ।।

कर्जा को कारन रह्यव बिह्या, नवो घर
डोरा मा को पानी रुकत नवतो रातभर ।।

तरी कारीज कसे खुदला च तू आस कर
हिवरो सपन देखन कि हमेशा बात कर ।।

कावर बावर हिरदा ला संयम लक आवर
श्रध्दा ठेव कष्ट पर हिवरो होये च वावर ।।

खेत ला सजावन साती कास्तकार तयार
अलग अलग किसम को बीज को सिनगार ।।

नवो आशा लक बली राजा पेरन बसेव खार
वनराई को आता कोनीला नहि बिचकार ।।

लाक्तखाड कि कहानी करो भयी आता दुस्वार
अखाडी को पानी न करिस अवंदा उपकार ।।

वंदना कटरे  "राम-कमल"
गोंदिया



Thursday, July 2, 2020

लाख्तखाड Dr.shekharam yedekar 16


 लाख्तखाड

लगेव लाख्तखाड आब् , पानी आयेव भारी
किसान राजाला लगत होतो, फुले कास्तकारी

पानी आयेव दाना वापेव, धरती भयी हिवरी
हिवरो शालू पांगरीस वन्, लग् नवी नवरी

झीमुर झीमुर पानी मा, भेपका मार् किलकारी
सांगसे फसल मस्त होये, भरेत घरकी बकारी

लाख्तखाड किसान राजाकी, खुशी मोठी न्यारी
किसान बईलक् मंग फिरसे, धरकन कासरा तुतारी

लाख्तखाड हर खेतमा, किसान की जत्रा न्यारी
धुरा बांदी मा अनाज पेरसे, धरती माय को पुजारी

डॉ. शेखराम परसराम येळेकर
२८/६/२०२०

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...