Sunday, April 5, 2020

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"

( कव्यास्पर्धा  क्रमांक - ४)
         
                     !!आंदन!!

एक बेटी को बाप की जिंदगी पैसा जोडण मा गुजर जासे,या आंदन की प्रथा उनला अंदर लक तोड देसे!!१!!

आंदन को आग लका  जरसे जिंदगी, आंदन को सहारा लका काहा बससे जिंदगी,अगर कोनी कर ले माग आंदन की त जैल मा डोरा मलसे ओकी जिंदगी!!२!! 

आज कलम चलन लगी से बेटी को अधिकार मा,काहेका हार जमानो की  से बेटी को हार मा !!३!!

सात फेरा को यव बंधन जो वचन लका बन से,
अना दुय आत्मा को मिलन लक जीवन मा रंग भरसे ,नवरा बायको मा प्रेम रवनो उन्ला जवळ आणसे,तरी बी यण मौका पर नवरा ताना आंदण को मारसे,!!४!!

मी सांगनो चाहुसू आमरो सामाजिक दर्पण ल, भेव भेव कर जग रही से वो न
बेटी को समर्पण ला!!५!!

उठ रही से आवाज आता आंदन को प्रथा ला, आये आब खुशी की पारी आता नही लगेती बेटी कोनी बाप ला भारी,!!६!!


               मुकुंद रहांगडाले 
(हरी ओम सोसायटी दत्ता वाडी नागपूर २३) दी -५/४ /२०२०

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"

              【दहेज】

बिक जा सेती घर की कुर्सी अना मेज,
गरीब बाप देसे जब टूरी हीन ला दहेज!!

नहांसी पूंजी अना पुराव से चोटी ला,
नयो जमानों मा पढ़ावअ से बेटी ला,
पढावनों भी जरूरी से कायिच करके,
बेटी से वोकि पढनो मा बड़ीच तेज!!

जनम पासून वोको लाई सोचअ से बापअ,
असो लगअ से जसो करदी रहेस पापअ!
एक-एक पैसा जोड़स्यार, चलसे जुगुत ल,
नोन मिर्चा की बघरणी मा, पिव से पेज!!

समय को हिसाब ल देये आंदन महीन,
फ़्रिज़, कूलर, टीवी, अना वाशिंग मशीन,
मोठो घर जाए टूरी एको लायी बापअ,
बिक देसे आपरो एक दुइ-एकड़ खेत,

टूरी, बाप की आन-बान-शान आय,
दान मा मोठों दान, कन्यादान आय!!
देनों से त टूरी ला आशीर्वाद ही देवो,
आंदन को लेनदेन ल करो सब परहेज़!!

बिक जा सेती घर की कुर्सी अना मेज,
गरीब बाप देसे जब टूरी हीन ला दहेज!!

तुमेश पटले "सारथी"
केशलेवाड़ा (बालाघाट)

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"

काव्य स्पर्धा: ०४
दिनांक:०५/०४/२०२०
विषय: आंदन
🌷🌷 आंदन 🌷🌷

सांगू का भाऊ तुमला एक बात।
आबं बीह्या की आईं से घातऽ।।

एक एक पैसा जमायकर ठेयेव।।
बेटी को बीह्या कर टाकुन कयेव।।

सोफ़ा, आलमारी, ड्रेसिंग लेयेव।।
आंदन गोंदन सब लेयकर ठेयेव।।

पत्रिका छपी गावोगाव न्यौवता गयेव।
मंडपवालों ,आचारी ठयरायकर भयेव।।

घरभर मा आता खुशी नोहती मावतऽ ।
सामान आनन सब खुशी लक धावतऽ ।।

पर आता वा खुशी भय गई गायब।
कोरोना को प्रताप बीह्या लंबायेव।।

जहा को आंदन वहा पड़ेव रयेवऽ ।
पत्रिका बीह्या की नदिमा बहायेव ।।

जब हटे संचारबंदी तब काहीं होये।
पर आब जेत्ती खुशी होती तब कहा रहे।।

कमी जास्त कसोच बेटी को बीह्या त होये।
मोरी लाड़ की बेटी आपलो सुसरो घरऽ जाये।।

✍️- सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"

काव्यस्पर्धा क्र.४

  विषय - आंदन
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लगेपरा बिया,चर्चा होनलगी
केतरा आंदन केतरा पैसा गी !!

रिवाज साजरो भारतीय रीति
नोहोतो अहित अथवा दुर्गती !!

टुरी जासे घर परको कं घर
आंदन कं द्वारा गरजू आधार !!

गलत् प्रकार भयासेती बुहू
मुहून प्रचार भेटसेती पाहू !!

मोल रव्हसे आंदन को सुंदर
का दुर्दशा भयी समाज अंदर ?!!

हुंडाबली नं करीस नाश बुहू
मर्यादा मां सब् जन पायजे रहू !! 

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✍रणदीप बिसने

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"


                   स्पर्धासाती 
          विषय = दहेज आदंन 
==================≠======
मानव को जन्म मीलेव तुमला, 
मानवताकी बचाओ जी शाँन ,,,!!
दहेज प्रथा से जी मोठी कुरीती ,
बहुला जरायकर  लेसेत जाँन,!!

अनाचारको अतं करो जी तुम्ही, 
अज दहेज प्रथा करो तुम्ही बंद ,,!!
जिवनसगींनी मीलीसे जी तुमला ,
दहेजसाती विनय नोको करो भंग,,!!

बिह्या भयेव को बादमा जी भाऊ, 
मुस्कराहट नही नवरी को ओठमा,,,!!
दहेज को आतंकलक बिचार करसे, 
काहे नही मरगयी मायको पोटमा,,!!

ज्यो बाप  सोपसे दिल को टुकडा, 
वोला दहेज मा मागंसेव टिव्ही कार,,!
वंशावली सामने वा बढाये तुमरी 
नोको करो तुम्ही असो अत्याचार ,,!!

मोह दहेज को तुम्ही करो नोको, 
जिवनमा रव्हो जी सदा खुशहाल ,,!!
नारी जगत की जननी से भाऊ, 
कसे दास को दास हिरदीलाल,,,!!

                कवि 
      श्री हिरदीलाल ठाकरे 
   मु, भजियापार पो, चिरचाळबांध 
ता आमगाँव जिल्हा गोदिया माहाराष्ट्र

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"

काव्यस्पर्धा- ४
विषय-आंदन

मोठी भयी मोरी बडि बाई
धुंडुसू ओको साती टुरा
गरिबी से घर मा आता
कसो करबि बिह्या बेरा ।।1

गुणवान से मोरी बेटी
पर नहाय सुंदर सोरा
थक् गया मोरा हात पाय
मुस्किल ल भेटेव टुरा ।।2

करजा लेयव बिह्यासाती
पत्रिका बि बाटेव आता
गाडी को आंदण साती
टुरा संग दुय दुय बाता ।।3

साभिमानी बेटी न मोरो
कइस वोन नवरा टूराला
गाडी संगच करो बिह्या
नको तकलिफ मोरो जानला ।।4

कब आयेती वय दिवस
बहु लाच मानेती आंदन
भौतिक सुक ला सोडकन
कब फुले यव समाज जिवन ????

श्रीमती वंदना कटरे "राम-कमल"
गोंदिया
05/04/2020

काव्यस्पर्धा क्र.4 "आंदन"


                   स्पर्धासाती 
          विषय = दहेज आदंन 
==================≠======
मानव को जन्म मीलेव तुमला, 
मानवताकी बचाओ जी शाँन ,,,!!
दहेज प्रथा से जी मोठी कुरीती ,
बहुला जरायकर  लेसेत जाँन,!!

अनाचारको अतं करो जी तुम्ही, 
अज दहेज प्रथा करो तुम्ही बंद ,,!!
जिवनसगींनी मीलीसे जी तुमला ,
दहेजसाती विनय नोको करो भंग,,!!

बिह्या भयेव को बादमा जी भाऊ, 
मुस्कराहट नही नवरी को ओठमा,,,!!
दहेज को आतंकलक बिचार करसे, 
काहे नही मरगयी मायको पोटमा,,!!

ज्यो बाप  सोपसे दिल को टुकडा, 
वोला दहेज मा मागंसेव टिव्ही कार,,!
वंशावली सामने वा बढाये तुमरी 
नोको करो तुम्ही असो अत्याचार ,,!!

मोह दहेज को तुम्ही करो नोको, 
जिवनमा रव्हो जी सदा खुशहाल ,,!!
नारी जगत की जननी से भाऊ, 
कसे दास को दास हिरदीलाल,,,!!

                कवि 
      श्री हिरदीलाल ठाकरे 
   मु, भजियापार पो, चिरचाळबांध 
ता आमगाँव जिल्हा गोदिया माहाराष्ट्र

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...