Saturday, July 11, 2020

पोवारी स्वागत गीत chhaya surendra pardhi

     पोवारी स्वागत गीत

हर कली कर रही से तुमरो स्वागतम्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।ध्रु।।

        बड़ों सुंदर सुहावन समय आयी से्
        अतिथि आया यहां,सबको स्वागत से्
भगवान् सरिसो पूजन,करबी अज सब्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।१।।

         शब्द सुमन् का मालामा पिरोया मनी
         श्रद्धा लका बनाया ,या माला आमि
करसेजन् अर्पित मिलकर श्रद्धा सुमन्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।२।।

          पोवार समाज को मेळावा यहाँ अज् से
          अतिथियों लका सजी या फूलबाग से
करसेजंन अर्पित उनला शब्द सुमन्
स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम् स्वागतम्।।३।।

सौ.छाया सुरेंद्र पारधी

Friday, July 10, 2020

बरसात chhaya pardhi

        बरसात

अवचित आयेव वू रुणझुणत
मृदंग वा ढगकी बजावत
रूप श्याम भयेव अंबर को
बिजली कड़कड़ कडकावत।।१।।

धूल्ला उडेव परकर धरके
खिडकी खटखट लगी बजन
जूही की बेल बड़ी शरमाई 
देखन बसी ढूक ढुक कन।।२।।

सज्ज भई अवनी प्रिया
बरसात को स्वागत करण
बुड़गो बड़ उभो खट रहेव
तरा भी सज्ज भयेव भरण।।३।।

आयेव आब टप टप पानी
जोरदार जलधारा बरसी
भिजेव धरनी को रूप सुंदर
सुगंध फुटेव अत्तर सरिसि।।४।।

पशु पक्षी सब हरसाया
अंकुर मातिला फुटेव
नवांकुर की नवी गाथा
कण कण ला हास्य फुटेव।।५।।

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

महाराजा भोजदेव chhaya pardhi

महाराजा भोजदेव

मोरो खून मा बडो उबाल से
मोरो धार मा बसेव प्राण से
मोरी बोली मोरी पहचान से
मोरी अलबेली नगरी धार से

एक राजा होतो बडो विद्वान
संपूर्ण होतो ऊ शस्त्रकलामा
पारंगत भोज वेदोको ज्ञानमा
भक्त वूं लीन वांग्देवीको भक्तिमा

राजाभोज की राजधानी धारमा
मालवा की महाराणी वा शानमा
बड़ो शूरवीर महाप्रतापी शौर्यमा
कई राजाला धूल चटाईस रणमा

बहत्तर कलामा होतो पारंगत  
चौरयाशी ग्रंथ को रचियता 
भोजशाला सरस्वतीसदन बन्या
ज्ञान को प्रचार प्रसारमा

पंडित छिटपला होतो महाज्ञान
*कालिदास* उपाधि कोओला मान
रोहंतक बुद्दिसागर दुही बड़ा विद्वान
राजाको दरबार होतो नवरत्नों की खान

कर्णदेव न चालुक्य राजा भीम संग 
करिस मालवा पर  आक्रमण मंग
वृद्ध राजा घातक बीमारी होती संग                                    हार गयेव लूट गयेव मालवा को रंग

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

श्रावण महीना D.P.Rahangdale

           श्रावण महीना

श्रावण  महीना खुशीसे मनमा आसपास हीरवोगार
घऴीभर मोठी तपन लगसे घऴीमा पाणी थंडोगार

वरत्या  देखो इन्द्र धनूस से ज़सो गोफ गुफीसे दुहेरी 
जसी तोरन बंधीसे वरत्या आकाशमा लटकीसे दोरी

घऴीमा होसे अंधारो दिससे जसो दिवस बुऴजासे
धऴीभरमा तपन निंघसे त दिवस वर त्या  दिससे

कावऴ कावऴया काहाऴशानी कसेत हर महादेव
कोणी मंदीर पुजा करसेत कसेत मोला सुखी ठेव

थंडीथंडी हवा चलीसे मनमा भई खुशी भारी
खेतमा जासे खार खंदसे परा लगावसे नारी

जितऊत हीरवोहीरवो जसो हीरवो शालु आंगपरा
भक्त भक्तिमा त-लीन होसे कर वीठ्ल जयकारा

डी पी राहांगडाले 
     गोंदिया

नवरा को महत्व D.P. Ranangdale

नवरा को महत्व 

नवरा मनजे काय गरोको हार।
सुखको संसार, नवरा लका ।। १।।

भांगोभांग कुकु नवरा की निशानी।
जसा राजा राणी, नांदसेती।। २।।

कपार को कुकु  बाई को गहनो।
पती देव मानो, बहीणी मोरी।। ३।।

देव, पतीदेव, नवरदेव तिन।
तिनहीका गुण, एक जानो।। ४।।

पतीदेव आय घरकी राखन।
घर की बऴे शान, नवरालका।। ५।।

बायको याच माय ना बहीन भी आय।
सेवा करत रहे, नवराकी।। ६।।

नवरा बायको दुही संसार का च क्का।
संसार चले बाका, किरती होय।। ७।।

दुय मालक एक कमजोर पऴेव।
गाऴो गा मुऴेव संसार को।। ८।।

एकमेकला कमी नोको लेखो कोणी।
एतरी से विनवणी, चरनमा।। ९।।

डी पी राहांगडाले
   गोंदिया

Tuesday, July 7, 2020

अखाडी Tumesh patle 17


अखाड़ी (नवती बहु)

नवती बहु गिनन, पेहनीसेत नवी साड़ी,
मातामाय पर जानो से, अज से अखाड़ी!

नवी बहु ला आव से, अज याद वोकि माई,
अज वोला देखेती, गांव की सब दाई-माई!
बड़ा-सुआरी अना कुसुम धरके, चलसे मंगह,
वोको मोहरा-मोहरा, चलसे  सासु बाई!
नवती बहु गिनकी, पड़ गईन ठंडी नाड़ी!
मातामाय पर जानो से, अज से अखाड़ी!

पारी-धुरा कुदर-कुदर के, टोंड पड़ गयो कारो,
तन मोरो फूल जसो, सुख के पड़ गयो चारों!
मातामाय तोला मी सुमरु सु, तन-मन ल आब,
अगली अखाड़ी तक मोरो, सब दुख ला टारो!
लकरधकर वापस भईन, जसि चल सेत गाड़ी!
मातामाय पर जानो से, अज से अखाड़ी!

घर आय के वोन नौरा ला, सांगिस आपरो सार,
वोन पटिल को बहु जोर, से दूय तोला को हार, 
वसोच हार की फरमाईश, करके वा त सोय गयी,
पर सकार भई त सासु की, चलन लगी सरकार,
घुइयां-आदो लगावनला चलनो से अज बाड़ी!
मातामाय पर जानो से, अज से अखाड़ी!

नवती बहु गिनन, पेहनीसेत नवी साड़ी,
मातामाय पर जानो से, अज से अखाड़ी!

तुमेश पटले "सारथी"
केशलेवाड़ा, बालाघाट (म. प्र.)
दिनांक-०५/०७/२०२०

अखाडी Sharda Chaudhary 17

       
              अखाडी
   (चाल-प्रीतीचं झुळ झुळ पाणी )
 
पोवारइनको पयलो सन अखाडी
आषाढ शुक्ल पक्ष को घडी
त्योहार  की सुरुवात से अखाडी
साथमा रिमझिम बरसात की झडी ll1ll

मनावं सेत सर्व वेदव्यास को जन्म पर्व
अलग खंड मा बाटीस ऋग यजु साम अथर्व
व्यास पौर्णिमा कसेती सब हर्व गर्व
रामायण महाभारत पासून गुरू महत्वपूर्व
अंगठा कापस्यानी एकलव्य न देइस गुरू पर्वणी बडीll2ll

पयली गुरू माय वंदन वोको चरण मां
दुजो गुरुजी से भविष्य घडावन मां
येनं दिन टूरा जासेती शाळा मां
करसेती पाटी पूजा नमन गुरू चरण मां
गुरू सें आपलो ज्ञान को भंडार की कडीll3ll

सडा-सारवन कर सेती बहू नवी- नवती
बुड्या- भज्या पानबडा भाजी थाल सजावंसेती
नारीयल हल्दी-कुमकुम उदबत्ती
माता माय ला पूजकर प्रसाद बाटसेती
मोठोइनकोआशीर्वाद लेनकी परंपरा से बडीll4ll

शारदा चौधरी
भंडारा 

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...