Monday, July 13, 2020

संस्कार chiranjiv bisen 18

             संस्कार
              
आदमी ला माणूस बनावन मा जिनको से हात, 
वोको नाव से संस्कार,करसेत दुर्गुण पर मात. 

संस्कार कई प्रकार का सेती पालन करन साती, 
लहानपण पासून देया गया त् फायदा करसेती. 

आपल् दून मोठो ईनके करसे आदर सन्मान, 
संस्कार मा से येको समावेश बनसे वु महान. 

गरीब,दुर्बल ला मदत,नारी को बी होसे सन्मान, 
वु घर धरतीपर बनसे स्वर्ग समान. 
परिश्रम की आदत अना समयपर करसे काम, 
वोकी होसे तरक्की, पावसे जगमा नाम. 

बुजुर्ग की देखभाल अना होसे जहॉ सेवा, 
वोन् घर को सबला रव्हसे आदर ना हेवा. 

लवकर उठनो,साफसफाई करनो, परिश्रम करनो, 
येव बी  संस्कार कोच् भाग आय सच जानो. 

अतिथी सत्कार बी आय संस्कार कोच् भाग, 
माय बाप गुरू को आदर करसेत वोय आत महाभाग. 

भाई भाई जहॉ रव्हसेती मिल जुल कर संगमा, 
धन,धान्य,संपत्ती वहॉ रव्हसे मुबलक हमेशा. 

                रचना- चिरंजीव बिसेन 
                              गोंदिया.

संस्कार का भाव kalyani patle 18


संस्कार का भाव

संस्कार का भाव,आती आदर सम्मान,
भारतीय लोकइनन देयीन, येको फरमान।।

इन्सान न बनाईस, जाती-पाती,
वोकाच सदगुन, दिस सेती।।

संस्कार को बीना,समाज से अधूरो,
मोठो इनको आदर, करनो से पुरों।।

पूर्वज को चालीरीति लक, चल से घर,
अज को पीढ़ीला,नहाय कोई को डर।।

आदर सम्मान लक, सब संग रवबीन,
पुर्वज को धरोहर ला, संभालके ठेवबीन।।

         कु. कल्याणी पटले
            दिघोरी, नागपुर

संस्कार sharda chaudhary 18


                   संस्कार

आज को माणूस ला गरज से उपचार की
संस्कार या किमती चीज आय येनं संसार की ll

येनं जमानो मा केवल शब्द बन्या संस्कार
कसेती असाआपला बडा बुजुर्ग बारंबारं
संस्कार आय वाणी आमरो ऋषी मुनी की ll1ll

रिश्तो को नहाय मोल ना कोणी को आदर
आज की या पिढी करसे प्यार पैसा पर
संस्कार धरोहर आय आपली पुरो जिंदगी की ll2ll

येनं दुनिया मा आया आम्ही जन्म दाता का उपकार
सुख दुःख सहस्यांनी देईन उन नं लाड-प्यार
उनकी कदर कर सेती संस्कार पड्या जिनको पर ll3ll

विद्या बनीसे शिक्षा गुरू रहेवं सिर्फ मास्तर बनकर
चेला न लगाय देइस ताकत विध्वंसक कार्य पर
समाज ला गरज से अर्जुन अन द्रोणाचार्य की ll4ll

संस्कार नही रहेत तं सब व्यर्थ से संसार 
बिना संस्कार को माणूस करसे पशुसम व्यवहार
संस्कार आय कडी जीवन सफल बनावन की ll5ll

जेतरा गहरा घड्या रहेती कोणी माणूस पर संस्कार 
वू हमेशा लेतो रहे धर्म सत्य न्याय को आधार
संस्कार नीव आय माणूस को आचरण की ll6ll

         शारदा चौधरी
              भंडारा

जीवन संस्कार hargovind chikhulu tembhare 18



जीवन संस्कार

पुरानो जमानो की बात निराली,
आजा-आजी लक होती संस्कार की जागवली ll

आजा आजी की कहानी आता भय पुरानी, दुनिया भई इंटरनेट की दिवानी ll

आयकसेती कथा कहानी पर नही बन बात,जसी सुनाव आजी माय कहानी ll

संस्कार विहिन टूरु-पोटू भया गुगल ज्ञान का गुरू,
समझ नही आव आता कसी होये संस्कार शाळा घर की सुरु ll

पाश्चात्य संस्कृती ला धरनो आय,
आपरो संस्कृती संस्कार को नाश करनो ll

टुरी  को मंग होय स्यारी दिवानो,
फिरसे पगला वानी जमानो ll

माय-बाप को कमाई पर करसे मनमानी,
गलत काम मा बीत गयी जवानी ll 

माटी मोल होय जाये संस्कार-संस्कृती,
मन मा आये जब गलत बिचारं की विकृती ll

जगावो सबमा आता जनजागृती,
बचावनो से अगर संस्कार संस्कृती ll

प्रा.डाँ.हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु.पो.दासगांव ता.जि.गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४

संस्कार varsha patle rahangdale 18



     संस्कार

माय  तोरा संस्कार करीन मोला गुणी
तोरो ममता को  रहु मी सदैव ऋणी।।

लहानपण की वा थापड तोरी 
आबबी से मोरो ध्यान मा कायम
वोको बादमा माय तोरा शब्द
कान मा पड्या होता मुलायम।।

संस्कार की शिदोरी तु आमला देयेस
खरो खोटो की समज मनमा भरेस
आई होती गरीबी घरमा तरी माय
स्वाभिमान आपलो नही सोडेस।।

आपलो घरकी होतीस तू मोठी बहु 
बहुत गरीबी देखेस माय तून घरमा
कभी कभी चाऊर को कण नही रव्हत होतो
पोटखोली को खालत्या को भदाडमा।।

शेन पुंजा बाहार,बोहोर अना सयपाक पाणी
कसी सांगु माय तोरो कष्ट की मी कहाणी
आबबी याद आया  वय दिवस म्हणजे
मोरो डोरा मा भरके आवसे बडो पाणी।।

माय घरका तोरा संस्कार जपेस तू 
घरकी बात कभी बाहेर नही काहाळेस तू
वयच संस्कार धरके मी बी आब सेव
जसो बालशिक्षण देयेस तून मोला तू
सौ.वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी आमगांव

विकास y.c.chaudhary 18


संस्कार

      विकास
(तर्ज-अभंगकी)
    
मानव नरदेह, एकबेरा भेटसे
कार्य करो थोर, जिवनमा।
राजाभोज सरीका ,होवो चक्रवर्ती
पोवारकी किर्ती ,जगभर।।१।।

टुरा- टुरीला देवं, चांगला संस्कार
उनको भविष्य, सुखीहोय।
शिक्षण शिकावो,ऊच्च दर्जाको
समाजमा मान ,कुटूंबको।।२।।

डॉक्टर मास्तर, भया ईंजिनीअर
मारो गरूड़ झेप ,कलेक्टर।
शिक्षण चांगलो,आदर्श आपलो
ठेवो सबसाठी, समाजमा।।3।।

नौकरी साठीसब, सोड़िन घरदार
घर संसार कर ,लक्षठेवो।
मायना बापकी ,करो तुम्ही से्वा
श्रावन बाळ जसी ,किर्तीहोय।।४।।

समाजमा सुंदर, शिकी टुरी सेती
दुसरं जातीकी ,आनोनोको।।
जमानोकी रीत ,बदल गयीसे
दुसरोकं घरं ,जानलगी।।५।।

दुसरं जातीमा ,नोको करो बिह्या
परीवारकी नाक ,  कापोनोको।
घर संसारला, स्वर्ग करो आता
धन्य सासु-बहु, मायबेटी।।६।।

सुकार्यकी किर्ती, चौबाजु पसरसे
प्रसिद्धी मिळसे, जिवनमा।
थोरकं सरीका,जरा कार्यकरो
प्रसिद्धी मिड़ावो ,समाजमा।।७।।

आपला संस्कार ,दुसरा चलेती
उद्धार करेती ,कुटुंबको।
संधिको फायदा, लेव सुसंस्कार
समाजको विकास, तब होय।।८।।

वाय सी चौधरी
से .नि.मुख्याध्यापक
गोंदिया

संस्कार chhaya pardhi 18


           संस्कार
तेजस्पर्श लक दूर होसे अंधकार,
जसो जळमूल को वृक्षला आधार
शिल्पला आकार देसे शिल्पकार,
तसो मनला घडसेत साजरा संस्कार।।१।।

गर्भधारणा पासून करसेत गर्भसंस्कार
साजरो साहित्य,विचार ठेवसे स्त्री गर्भार
शिशु की विचारशक्तिला मिलसे आकार
करिस अभिमन्यु चक्रव्यूह रचना साकार।।२।।

जन्म को बादमा सूतुक केशवपन संस्कार
बारा दिसमा होसे बारसो नामकरण संस्कार
दिवारी को दिस करसेत अन्नप्राशन संस्कार
आयकनकी शक्ति बढ़ावसे कर्नछेदन संस्कार।।३।।

गुणवान पुत्रपुत्री बढावसे कुल को नाम
संस्कार लक पीढ़ी होए सुसंस्कारी निर्माण
जिजाऊ माता को संस्कारमा बढेव शिवबा
पर स्त्रीला समजत शिवाजी माता समान।।४।।

आईंको संस्कार की महती *श्यामको आईमा*
संस्कार नहीं भेटत लेयेलका बाजार हाटमा
अनुकरणशिल रवसेत आमरा लहान बच्चा
देव संस्कार असा  वय बनेत जगमा सच्चा।।५।।
सौ. छाया सुरेंद्र पारधी

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...