Monday, November 30, 2020

फुरफुरी फुलझड़ी 13


             

फुरफुरी 
                             
फुरफुरी ओ बाई फुरफुरी
तोरी रंगत से मोठी न्यारी 
जशी आकाश की तु परी 
दिससेस  सुंदर  मनोहारी 

लाल, पांढरा सेती  तोरा  रंग
कधी हिरवी,कधी गुलाबी मंग
रयज़ासेत सब देखकर दंग 
मज्या आवसे मंग तोरच संग 

दीवोकी ज्योत जसी लगे तोला 
इन्द्रधनुष को नीकलेव वु गोला 
जसो आकाश मा भऴके शोला
पटकर भगावसेस तु अंधारोला

गोल फिरावन मज्या  आवसे
तोरोच कर देखू मनमा भावसे 
आकाशतारा जमीनपर आवसे 
फुरफुरी संगच समय बित जासे 

फुरफुरी की सीख मनमा  धरो
आपल जीवनमा उजाळो  करो 
परायजाए सब जीवनको अँधारो 
सुन्दर,सुखमय होय जीवन सारो 

डी पी राहांगडाले 
              गोंदिया


दिवारी क् छुट्टी मा मजाच मजा, 
फोळबीन फटाका करबीन पूजा. 

पाच दिवस चलसे दिवाळी को सण. 
मजा की से भरमार, प्रसन्न से मन. 

फुरफुरी , चकरी, फटाका फोळबीन सब, 
चार बजे फिरनला मंडई मा जाबीन सब. 

सिंगाडा, लाडू , चना लेयकर आनबीन, 
मिल बाटकर सबजन बाटा बाटा खाबीन. 

स्कूल ला से पंधरा दिवस मस्त लंबी छुट्टी, 
किताब ना अभ्यास संग से आब आमरी कट्टी. 

                      - चिरंजीव बिसेन
                                   गोंदिया


 फुलझड़ी

रंग-बेरंगी प्रकाश उधडे मोरी फुलझड़ी
जलावताच मज्जा आवसे संगमा सवंगडी

दिवाली को रात मा रात रवसे कारी कारी
गोल गोल घुमावता मज्जा आवसे भारी

फुलझड़ी जलावताच विकरीत होय प्रकाश फूल
जसो मोरो हातमा पारिजात को फूल

दिवोला लगावताच उडसेती अनेक तुषार
मोर पिसारा फुलेव असो बनसे आकार

एक एक फुलझड़ी देसे मोरी बहना
राघो सोडकन भाई साठी गाणा गासे मैना

हर्ष उल्लास संग आनंद देसे फुलझड़ी
मुंगी अना साखर की जमी डब्बा मा जोडी

फुलझड़ी हो फुलझड़ी तू बडी प्यारी
जोडी जमसे दिवाली मा मोरी अना तोरी

शेषराव येळेकर
दि२३/११/२०

फुलझरी की मज्जा

फुलझरी जरावो,सब आनंद मनावो
दिवाली ला सब ,बम ,नोको उळावो।।

रंग रंग शलाका,अंधारो मा उजाडो़
संगी भाई मजालं, अनार उड़ावो।।

सालं मा योव ,एक दिवस आवसे,
फुलझरी की मज्जा,सबला आवसे।।

प्रदुषण को धोका,नहि होय कमी
हर प्रकारकी फुलझरी ,सुंदर निकामी।।

फुलझरी तारला ,संभाल कर ठेवोना
छतरी साठी मग काम आवसेना।।

अशी जरावो फुलझरी सालमा
नवचैतन्य आय आपलं जिवनमा।।

जय राजा भोज, जय माँ गड़काली
वाय सी चौधरी
गोंदिया

               आतिशबाजी
(चाल: मेरा जुता है जापानी...)

आई आई रे दिवारी
मोरो मनमा मौज भारी
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥धृ॥

धड़ाड़धूम फट फुट्या फटाका
गुंज्या गली मोहल्ला-२
उत्सुकता मा टुरूपोटू सब
करन बस्या हो हल्ला-२
आतिशबाजी रहे जारी
तुरसी बिह्या सरत वरी
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥१॥

लक्ष्मीबम सुतलीबम फोडो 
देखके खुली जागामा-२
लडी रॉकेट अनार उडाओ 
खुलो खुलो हवामा-२
टिचकोली अना साप की बारी
सपरीपर फिराओ चकरी 
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥२॥

जरती फुलझडी हातमा लेके 
निकल्या प्रकाश फवारा-२
रंगबिरंगी तारा चमक्या
इंद्रधनुषी पिसारा-२
कारी रात से अंधारी
फुरफूरी लका उजारी
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥३॥

आतिशबाजी करो अगर सेत 
संगमा मोठा कोणी-२
उनकी सलाह को पालन करके
टल जाये अनहोनी-२
फोडो फटाका बारी बारी
मस्त मनाओ खुशियाँ सारी 
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥४॥

अजी माय समझाव्ं फटाका
हातमा नोको फोडो-२
सावधान रयके फड़कावो
लापरवाही छोडो-२
प्रदूषण ना होवे भारी
निसर्ग संग ठेवो यारी 
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥५॥

आतिशबाजी सबला सिकाव्ं
करो उजारो मनमा-२
सावधानी लक कदम बढावो
यश मिले जीवनमा-२
झगमगाट करस्यारी
मिटावो तिमीर 'प्रहरी'
नवलाई रोशनाई
फोड़ू फटाका फुरफूरी ॥६॥


डॉ. प्रल्हाद रघुनाथ हरिणखेडे "प्रहरी"
उलवे, नवी मुंबई 
मो. ९८६९९९३९०७

          फुरफुरी (फुलझडी)

छुट्टी लगी शाळा ला  दिवारी सें आई
खुशीलक फुरफुरी जरावबं दुही भाई ll

अजी मोला तुमी दुकान मा लिजावना
फुरफुरी का दुय चार डब्बा लेय देवना
डब्बा पर फुरफुरी को चित्र की सें छपाई ll1ll

मोरा संगी फोडं सेत पटाखा अनार
पर मोला लगं सें मन मा भेव मार
फुरफुरी की उदबत्ती समान बनवाई ll2ll

अजी तुमी रवो संग आमला धरकन
आमी फुरफुरी पेटायकर आनं सेजन
जराये पर देखो वा कशी तडतडाई ll3ll

अंधारोमा फुरफुरी फिरावुसू गोलगोल
परी को छडी समान मोला येको मोल
आसमाको तारावानी झिलमिल जगमगाई ll4ll

फुरफुरी जरं सेतं झडंसेत कई मोती
लाल पिवरो रंगकी निकलंसेत ज्योती
देखो मोरो मुन्नू ला कसी मज्जा आई ll5ll

फुरफुरी जरावंन की बडी रंगत न्यारी
मोला तं या सें पटाखा दून प्यारी
फुरफुरीसम जलकर सबला देबं रोषणाई ll6ll

 फुरफुरी जराये लक नहाय धोका
प्रदूषण को बी  नही आवं मौका
येको तार लक करून छत्री की बुनाई ll7ll


                                    शारदा चौधरी
                                        भंडारा


दीवारी की फुरफुरी

चलो आय गयीं से दीवारी,
उमंग अना मस्ती से प्यारी ll

टीचोकली,बंदूक,अना फटाका,
गोल चकरी अनार संग फुरफुरी ll

रंगबिरंगी उजाडों वाली फुरफुरी,
आमला सबला भाये फुरफुरी ll

खुलो जागा मा जरावो फुरफुरी,
परिवार को संग पेटावो फुरफुरी ll

सुरक्षा को ठेवो सब जरुर ध्यान,
पर्यावरण को ठेवो आता मान ll

प्रा.डॉ.हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु.पो.दासगाँव ता.जि.गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४
फुरफुरी

फुरफुरी बाई से बड़ी फुगरी
उगीमुगी जब पाकीट मा भरी
आच लगावो त भडक जासे
होय जसे वा कारी की पिवरी

निकलसेत इंद्रधनुष्य का रंग
देखकरं लहान मोठा होसेत दंग
लेय मांगुसू जब रुंग रूंग कर
जरावन मज्या अावसे संगि संग

दिवोकी बाती जब लगसे तोला
रंग रंग रंगीत फुटसेत मंग गोला
हिरवा पिवरा लाल फुटसेत शोला
नवलच आवसे बाई तोरो मोला

दुही हातमा धर फिराउसु गरगर
आवाज आवसे बड़ो बाका तड़तड़
नाेको जारू बकरा मायकी बड़बड़
चकरी पायजवर लक जासे सरसर

मज्या आवसे दिवारी मा मोला भारी
आवसेती काका काकी ना फुफबाई
सब मिलकर मनावसेजन दिवारी
पर फटाका प्रदूषण करसेत भारी

सौ छाया सुरेंद्र पारधी


बचपन

निरागस से बालपन
सदा रव्हसे निश्छल भाव
राग,लोभ सब दूर रव्ह से
असो बालपन प्यारो गाव

उछलकुद,दंगा,मस्ती
कोनी काई कव नही
बिनधास्त खेल अविरत
आव कभी थकवा नही

दिवारी की फुलझडी
रवसे हमेशा चेहरापर
बोझ बी नही रव्ह कभी
कोनीकोच डोस्कापर

हर कोना खुश रव्हसे
चहलपहल सदा मचसे
बालपन मा जीवन
बडो खुशरंग रव्हसे

निरागस भाव चेहराका
कपट को नही बसेरा कभी
समस्या ,परेशानी,उदासी
रस्ता मा नही रव्ह उभी

वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी आमगांव

Sunday, November 29, 2020

पवनी किला एंव तुरकर

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            !! पवनी किला एंव तुरकर !!
                   भाट के पोथियो से
______________________________________

            वैनगंगा नदी के दाहिने किनारे स्थापित पवनी किला जिसे 'शुंग-सातवाहन' काल मे स्थापित बौद्ध स्तुप भी कहा जाता है। बाद मे यह किला वाकाटक काल मे सांस्कृतिक स्थल के रुप मे प्रशिद्ध हूआ। सर अलेक्झांडर कनिंगहॅम (१८७३-७४), हेन्री कझिन्स (१८७९), सर जॉन मार्शल (१९२६), एच. हरग्रीव्ह्ज (१९२७) आदी ने इस किले के बारे मे विस्तार से लिखा है। इस स्थल का पुरातत्विय महत्व ध्यान मे रखकर ब्रिटिश सरकार ने पवनी किला एंव पुरावशेष संरक्षित स्मारक के रुप मे घोषित किया था। भारतिय पुरातत्व विभाग के मध्य भारत के सहाय्यक पर्यवेक्षक जे. सी. चंद्रा इन्होने १९३६ मे एक पत्र मे इस किले का वर्णन किया है। वही १९५६ मे वा. वी. मिराशी उन्होने छायास्तंभ खोज निकाला, एंव १९६९ जेष्ठ संशोधक वि.भि. कोलते इन्होने ताम्रपत्र प्रकाशित किया। उपरोक्त जानकारी किले के प्रवेशद्वार पर लगे एक बोर्ड पर लिखी गयी है।
            गोंड शासनकाल मे यह किला गोंडवाना शासनकाल की धरोहर थी। पश्च्यात मराठा शासनकाल मे यह किला सैनिक छावनी के रुप मे उपयोग किया जाता था। भाट के पोथियो मे तुरकर परिवार का संबंध इस किले से है यह स्पष्ट रुप से लिखा गया है। भाट के पोथियो मे विजयसेन तुरकर को उमरकोट गढी का सुबेदार लिखा गया है; जो गोंड राजा बख्त बुलंदशाह के निमंत्रन पर मदत हेतू शिवराम पारधी, सुमेरसिंह बघेले, दिगपालसिंह बिसेन, कनकसिंह पटले, मोतिप्रसादसिंह ठाकुर, तोमरसिंह टेंभरे आदी के साथ ३७०० की सेना लेकर बख्त बुलंदशाह की मदत हेतू गोंडवाना आये। बाद मे राजा बख्त बुलंदशाह द्वारा नगरधन का किला प्रदान करना एंव मराठा शासनकाल मे वैनगंगा क्षेत्र मे विस्तारित होना कुछ दस्तावेजो से पता चलता है। 
            भाट के पोथियो मे पवनी किला एंव विजयसेन से तुर्क (तुरकर) पोथी की सुरुवात होती है। बाद मे विजयसेन के वंशज मराठा सेना मा शामिल हूये एंव सेना मे उच्च पदो पर पहूंचे होंगे। पोथियो के अनुसार मराठा काल मे *चिखलु तुरकर* पवनी किले के सुबेदार रहे होंगे। एंव बाद मे उन्होने तुमसर तहसिल मे "सिहोरा" गांव बसाया एंव तुरकर वही स्थायी हूये। कालांतर से तुरकर वहां से देश के विभिन्न हिस्सो मे विस्थापित हूये।

संदर्भ: पवनी किले का अभिलेख, भाट की पोथियां

- सोनू भगत 

Sunday, November 22, 2020

तुलसी का बिहया का श्लोक




तुलसी को बीह्या का श्लोक
                       
पयले सुमरूण गढ़कालीका कुलदेवी आमरी
आशीर्वाद देजो मा आमला पावन धारानगरी 
राजा भोज का वंशज आमी पुजा करुन तोरी 
शुभाशिष देजो सबला या कामना करजो पुरी
             कुर्यात सदा शुभमंगलम सावधान।। १।।

तयार भयगया नवरदेव नवरी बिह्‌यासाठी अता
आयेव सब समाज मोह धरशान जपी तपी नेता
आशीर्वाद देती सब तोला मंगलमय शुभ कामना 
सुखी रहे संसार तुमरो अर्पण करसेती सद्‌भावना 
             कुर्यात सदा शुभ मगलम सावधान।। २।।

कण कण लका धरती बनी बुंद बुंद लका सागर
जन जन लका समाज बनेव बनगयेव धारानगर
पावन धरती धार की से  आमरी  भारतभुमी पर 
सुख शांती लका नांदसेती पोवारकी छ-तीस कुर 
             कुर्यात सदा शुभ् मंगलम सावधान।। ३।। 

चौदा भुवन सातही तला तिन लोक मा देखेव नही
चार धाम चौ-याशी पुरी सय शास्त्र को लेखेव नही
मंदीर मंदीर फीर गयेव पर ओको पता लगेव नही
आचार बिचार शुध्द ठेवो ओक बीन देव भेट नही
             कुर्यात सदा शुभ मंगलम सावधान।। ४।।

सतीत्व  हरण भएव  वृंदा को मारे गयेव जालंदर
श्रापलका गोटा भएव विष्णु तुलसी बनी वृंदा नार
एवच दिवस आयेव  होतो कार्तिक शुध्द एकादशी बीह्यामा नवरदेव शालीग्राम नवरी बनगयीं तुलसी 
              कुर्यात सदा शूभ मंगलम सावधान।।५।।
                               
डी पी राहांगडाले
      गोंदिया

Sunday, November 15, 2020

सायकल 12




मोरी सायकल

फिरसे सायकल को चक्का गरगर
बस्ता लेकर स्कूल जाबिन सरसर
सायकल मोरी कर नहीं करकर
संगी देखसेत सायकल ढूकढुकर

सुंदर सजी मोरी नवी सायकल
दूय चक्का का टायर काराभोर
पैडल ला लगी से कारो कव्हर
स्टैंड कमानी झेलसे ओको भार

सीट से येकी हिरवी हिरवी गार
हेंडिलला लाललाल लगिसे हार
असी मोरी सायकल चमकदार
संगी मोरा खासेत ओकी खाड

जब मी होसू सायकल पर सवार
लगसे मी सेव कही को राजकुमार
आपलोच तालमा जासु तरा पर
संगी मोरा भी बड़ा सेती बिलंदर 

जासेजन सब संगी सायकल पर
स्कूल नहीं लग आमी सबला दूर
लेय मांगेव अजीला रोय रोय कर
दूय थापड़ का वर उमट्या पाठपर
 
सौ छाया सुरेंद्र पारधी

सायकल मास्टर जी की

  मोरो मास्टरजी की सायकल होती।
 24 नंबर वाली।
 लंबी - लंबी अन कारी -कारी शीट। 
मोरो मास्टरजी की होती वाह।
 जिव लग प्यारी। 
मास्टरजी होता लंबा- लंबा।
 तशीच होती मास्टरजी की सायकल ऊंची- ऊँची।
 हर दिवस आन त होता।
 24 नंबर की सायकल। 
अन मोला लगावत होता।
 सायकल ला साफ करना साठी।
 मि भी ओ तो चालू।
  मस्त फिरा ऊ मि आपलो।
 मास्टर की 24 नंबर वाली सायकल।
 हाफ- हाफ कैची मार कर चलाऊ।
 एक हा त मा  हैंडल।
अन एक हा त मा शीट। 
मस्त फिरा ऊ मी।
24 नंबर की मास्टरजी की सायकल।
 एक दिवस असो भय व्। 
मास्टर जी की सायकल भही पंचर। 
अन मास्टर जी न करीना ।
मोला पिट- पिट कर पंचर।
 अन वो  न दिवस  पाशुन।
 24नंबर की सायकल कभी नहीं आनिंन मास्टरजी न।
 अशी होती मोरी बचपन की सायकल

चंद्रकुमार शरनागत

सायकल

सायकल स्वारी छान छान छान
टिलंगी  बजसे  टिंन टिंन टिन।।

 फिरनकी निराली मजा संग संग
रेस लगसे तब मन होसे दंग दंग।।

खुशी भयी जब बायसिकल आयी
लाल रंग देखेव तं झोप चली गयी।।

शाळा मा जानकी मज्जा आवसे
सायकल सबकी जोरलं परासे।।
"""जय राजा भोज जय माँ गड़काली"""

वाय सी चौधरी 
गोंदिया

              संगी की सायकल
             
संगी संगी जाबी स्कूलमा अभ्यास करबिन,
शिक पड़ श्यारी माय बाप को नाव कमावबिन।
 
चल रे राम्या स्कूलमा लवकर स्कूलकी बेरा भई ,
मी बी आऊन स्कूलमा ना आए मोरी मोठी बाई।

दिवस चढ़ेव वर्या बज गया अकरा,
जल्दी चल नहींत गुरुजी बनायेती तोला बकरा।

लवकर चल कसु त मोरी आयकस नहीं,
 टाइम लगाव सेस भाऊ तु टुरी पोटी घाईं।

मोरी सायकल खटारा ना तोरी सायकल से नवी,
फटा फट पयडल मारसेस तु मशीन वाणी।

बाबुजी को लहांनपनकी सायकल से आमरो घर,
जुनी से तरी बी फिरसे गर गर।

मी लेयकर मांगून बाबूजी ला नवी सायकल ,
अना स्कूल मा पोहोचुन सब दून लवकर ।

करून अभ्यास मी आनुण एक नम्बर,
गर्व लक ऊंच करून माय बाप को सर।

        फनेंद्र (बंटी) चौधरी ,

            
       सायकल सवार
          
चल संगी जल्दी चल 
स्कूल की बेरा भयी, 
उशीर होये त् गुस्सा होये 
आयी से मॅडम नवी नवी. 

जोर जोरल् पैडल मार 
भेटे पाहिजे प्रार्थना, 
नही त् हेडमास्तर रव्हसे 
छडी धरकर हातमा. 

बडो कडक से गणित को सर
कान पिळसे थोडीशी गलतीपर, 
नही पिळीस कान वोन् त् 
छडी मारसे हात हातपर. 

इंग्लिश को सर शिकावसे मस्त 
सामने बढ गया टुरा बी सुस्त, 
वोक् समझावन क् कारण लका 
इंग्लिश मा सब बन गया मस्त. 

छुट्टी क् बाद मा मिलबीन सब 
खेलनला जाबी ग्राऊंड मा खेल, 
दिवस बुडता चौपाटी मा जायके 
खाबीन गुपचुप, चाट ना भेल. 

                    - चिरंजीव बिसेन 
                              गोंदिया.


सायकल आमरी दोस्त्

चल रे बंड्या चक्कर मारबिन
मनला आपलो ताजो करबिन
सायकलपरा सवार होबिन
सायकल आमरी मस्त्
सायकल आमरी दोस्त रे भाई सायकल आमरी दोस्त//धृ//

पेट्रोल नइ डिजेल नइ 
नइ लग् वला चारा
व्यायाम होसे चलाय चलायकन
फक्त टायरमा् वारा
बालपण आमरो रंगिन करसे 
नइ लग खर्चो जास्त।।१।।                                    रे भाई सायकल आमरी दोस्त


गरिबिमा् वा साथ देसे
गाडीकी वा मजाच देसे
टिलंगीकी का मजा आवसे!
उतारपरा वा सरसर जासे
सायकलका आमि भक्त //२//
 रे भाई सायकल आमरी दोस्त


एकविसावो शतक विज्ञानी
यंत्रयुगकी से मनमानी 
सायकल आमरी बढी सयानी
गरीब -अमिरकि से दिवानी
सायकल प्रदुषणमुक्त //३//
  रे भाई सायकल आमरी दोस्त


छोटो कामला सायकलच बरी
बात सांगसु एकदम खरी 
गाडीकी लत नाहाय बरी
मस्त चलावसेत  टुराटुरी
सायकल चलाओ मनसोक्त।।४।।
रे भाई सायकल आमरी दोस्त

पालिकचंद बिसने 
सिंदीपार (लाखनी)


आमरी साइकिल चली

चली से येन गल्ली को वोन गल्ली,
साइकिल चली गाँव की गल्ली ll

लहान लहान संगी साथी आया,
फिरन आमी आखर पर गया ll

कोनी चलावसे कैची साइकिल,
कोनी चलावसे डंडा साइकिल ll

आमला प्यारी से लहान साइकिल,
बड़ी न्यारी से आमरी साइकिल ll

स्कूल साठी काम की साइकिल,
शरीर वायाम साठी से साइकिल ll

पर्यावरण सवर्धन साठी साइकिल,
लहानपन की  साद साइकिल ll

टोंगरा फुट्या सिक्या साइकिल,
तरी प्यारी से आमला साइकिल ll

प्रा.डॉ.हरगोविंद चिखलु टेंभरे
मु.पो.दासगाँव ता.जि.गोंदिया
मो.९६७३१७८४२४

             सायकल 

सायकल,सायकल sss
मोरी नवीन सायकल  //धृ //
                            मोरी सायकल नवीन कोरी 
                            नजर नोको लगावो भारी 
                            हीरवो रंग दिससे मोठो छान 
                            लोक देखसेती मोरीच शान //1//
दुही चक्काला ला सेती गजरा 
लाल,हिरवा दिससेती साजरा 
गोल गोल फीरसेती  चक्का 
देखसानी होसेती हक्काबक्का  //२//
                           मंघ ना पूळ सेती क्यारीयर 
                          पाणीकी बाटल,ठेवून दप्तर 
                          मोठोजात सीट रंग से कारो 
                         ओकलका दिससे रूदबा मोरो//३//
पयडल मारून मी पटापट
स्कूल मा जावुन झटपट
पैदल जानकी मिटी कटकट
काम होसेती मोरा फटाफट //४//
                           सोय होसे मोला आवनजानकी
                           नही रव फीकर बेरा होनकी
                           बेरा पर आपल स्कूल मा ज़ासु 
                           टूराईन संग रेस लगावुसृ //५//
सायकल चलावुन होय व्यायाम
झटपट होयजायेत मोरा काम
अशी सायकल की मोरी सवारी
 सब दुन प्यारी सबदुन न्यारी  //६//
                        
        डी पी राहांगडाले
               गोंदिया

सायकलिंग

एक वर्ग का संगी आमी भरूसो आयेव बेस 
जिकबीन आमी सायकल रेस-२
मी टोपीमा गणेस बिचमा निलो सर्ट नितेस 
जिकबीन आमी सायकल रेस-२ ॥धृ॥

गांधी जयंती को दिन होती 'स्लो सायकलिंग'
सवार होयके आमी आया घंटी टिलींग टिलींग
मी दूसरो गनेस तिसरो अना नितेस अव्वल किंग
यनं खुसिमा अजीनं देईस बक्षिस नवीन ड्रेस 
जिकबीन आमी सायकल रेस-२ ॥१॥

एक दिवस आपलो सायकल की क-या ओरालिंग
अना उता-या नवरात्रीमा 'एक मैल की रेसिंग'
पयलो मी दूसरो गनेस तिसरो नितेस की टायमिंग
अर्धो रेसमा बाकी सबको तोंडला आयेव फ़ेस
जिकबीन आमी सायकल रेस-२ ॥२॥

पायडल सीट कवर मुठ बफ्फर डायनॅमो लगायकन
इस्कूल को गॅदरींगमा स्पर्धा 'सायकल डेकोरेसन'
सबमा सुंदर मोरी बाशिंग वाली सायकल एकठण 
पयलो नंबर मोरो, दूसरो नितेस तिसरो गनेस 
जिकबीन आमी सायकल रेस-२ ॥३॥

संकरातला भुमसारोकी 'सायकल मेराथन'
हजार पाचसौ सायकल निकली उलवे लक उरण
गनेस पयलो नितेस दूसरो मी तिसरो यनं गन 
'सबला सांत्वन बक्षिस' मिलेव सबको पसुपेस
जिकबीन आमी सायकल रेस-२ ॥४॥

डॉ. प्रल्हाद रघुनाथ हरिणखेडे (प्रहरी)
उलवे, नवी मुंबई 
मो. ९८६९९९३९०७

सायकल अना दोस्ती

दोस्ती से आमरी बडी न्यारी
चलो करबीन सायकल सवारी
मनको रीस्ता लका बंधीसे
दोस्ती से जगमा सबसे प्यारी

तुमरी ना मोरी दोस्ती म्हणजे
आकाश माको शुभ्र तारा
बंधेव मुठ की ताकद से जगमा
अना बढावसे भाईचारा

कभी कट्टी,कभी माठ्ठी
कभी होय जासे लडाई झगडा
मनमुटाव होयेव परा बी नही टुट
असो से आपलो प्यार तगडा

इश्कुल पासूनत  घरवरी
संग बसके माऱ्या गावमा फेरी
सायकलको सामने आळवी भयी
गावको पटीलकी कारी शेरी

मौजमस्ती भयी सायकल परा
अतुट रिस्ता से दोस्ती अना सायकलको
हमेशा याद आवसे लहानपण आता
सुख दुख भऱेव दीन होतो बचपनको

सौ.वर्षा पटले रहांगडाले
बिरसी आमगांव
जि.गोंदिया

   सायकल
 बड़ी राय राय चली वोकी सायकिल,
जरन वालों का यहाँ जर गया दिल.

सर सर, ट्रिंग-ट्रिंग, बड़ी से आब रेस मा,
सीट पर से सुंदर टुरा, स्कूल की ड्रेस मा.
नहीं बसाईस वोन कोइला सायकिल पर,
त संगी हीन न धसायदीन टायर मा किल.
बड़ी राय राय चली वोकी सायकिल,
जरन वालों का यहाँ जर गया दिल.

सायकिल वोकी बड़ी चकबम से,
हवाईजहाज ल कहाँ वा कम से.
येन उमर की या मस्ती की सवारी,
खयाल मा चल से टुरा कई मील.
बड़ी राय राय चली वोकी सायकिल,
जरन वालों का यहाँ जर गया दिल.

राम करे सबला मिले असी सुविधा,
बचपन मा नोको होय कोई दुविधा.
खेल, मस्ती का येन प्यारा दिन मा,
नहीं मरणो चहिएसे कोई तिल-तिल.
बड़ी राय राय चली वोकी सायकिल,
जरन वालों का यहाँ जर गया दिल.

तुमेश पटले "सारथी"
केशलेवाड़ा (बालाघाट)

 मोरी प्यारी साइकिल

मोरो अजी जवरसे एक नीली साइकिल 
होवसे जरासी ऊंची मोरो कद से  नाहनो 
पहले पासून मी शिख्यो  चलावता कैंची 
आता बसुसु सीट पर कोनही त पहचानों 

शिखन मा फुट गया मोरा दुही या टोंगघरा 
अखिन शिखनोसे कोनी दवाई आनों जरा 
गयो शिखन ला मी गांव को  आखर जवर 
पड्यो धड़ामलक अना घुमन लगी पूरीधरा 

अजी मोरो धरया साइकिल मा आपरा हाथ 
सीट पर बस  गयो जब मिल्यो उनको  साथ 
आता मोला लग्यो बनगयो मी पुरो महाराजा 
अखिन पड्यो खाल्या अना बज गयो  बाजा 

गिरता पड़ता आता सिख गयो मी साइकिल 
रोजको अभ्यासमा नहीं देयो काई मीना ढील 
पंहुच जासु जल्दी शाला आता सब संग मिल 
उड़ता जासु जल्दीलक जसो उड़से पंछीचील

घरको काम लक आता बजार जाय सिकुसु 
माय अजी को काम मी जल्दी कर  सिकुसु 
दादादादी की दवाई मी आता आन सिकुसु 
साइकिललक आता सबऊजा जाय सिकुसु 

मोरी संगी से साइकिल से येव सदा प्यारी 
मोरी प्यारी नीली साइकल सबलक न्यारी 
शाला की भयी बेरा आता करुसु तययारी 
चल मोरी साइकलचल मोरी प्यारी दुलारी

ऋषि बिसेन, बालाघाट

   सयर

सोनु मोनु अना गनू
चल्या नवेगाव सयर
पक्षी निसर्ग देखन्
सायकल पर सवार !!

सोनु न् धरीस रोटी
मोनु न धरीस पराठा
गणूक् सिदोरीमां से
रसगुल्ला को आटा !!

हवा पंचर की बी
व्यवस्था से संगं
गानइनकी मयफील
चढावसे वु रंग !!

हिरवोहिरवो सीन
चिकनचकन रोड
मस्तीभरो माहूल
लगसे ना गोड !!

रणदीप बिसने

Tuesday, November 3, 2020

सिता राम seshrao yelekar 35

नवधा भक्ति मा स्मरु नाम
जय सिता राम,सिता राम
आत्म भान भुलकर
दिन-रात बस एक ही काम

मन मा बसा तन पर सजा
सिता राम सिता राम
स्वास स्वास मा बसी से
हे प्रभु तोरो नाम,तोरो नाम

भजत जाऊ गायत जाऊ
सिता राम, तारणहार
मन मंदिर मा ज्योती जले
तोरी हे, मोरे पालनहार

रहा न जावे तोरो बिना
चरा चर मा तोरो वास
सिता राम, सिता राम
येही चले बस मोरो स्वास

हे सुनो प्रभु बिंनती मोरी
सदा रहे मन मंदिर मा तोरो वास
क्षणिक ना करो दुर
मी सेव तुमरो चरण की दास

✍🏻 शेषराव वासुदेव येळेकर
सिंदीपार भंडारा
दि. ०१/११/२०

सिता राम D.P. rahangdale 35

दशरथ का   च्यार टुरा सुंदर,सुशील,गुनवान.।
जे पुरूषार्थ धर्म,अर्थ,काम मोक्ष का प्रमाण।।

घट घट मा   बसेव राम   सबको मोक्ष दाता।
ओकच संगमा जुळगयी आदि शक्ती मा सीता।।

सीताराम बसव अन्तरमा ओकोच करू ध्यान।
जोत जगाऊ राम नावकी हरदम रहे समाधान।।

आत्मा को प्रतीक सीता माता राम संग मेल।
बिन बातीकी ज्योत जलसे रामसीताको खेल।।

सीताराम बिना रीतो नाहाय धरतीको कोणा।
विश्व नही चलसक भगवान सीताराम बिना।।

अन्तरात्मा मा सीताराम ओकोच ध्यान धरो।
होयजाय पार नैया तुमरी बिचार नोको करो।।
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डी पी राहांगडाले
     गोंदिया

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...