Monday, July 12, 2021

झुंजूरका :७०






पोवार इतिहास साहित्य अना उत्कर्ष समूह द्वारा आयोजित काव्यस्पर्धा
झुंजूरका
(वर्ण संख्या - १६, यती - ८)

नाश करके अंधारो, आवं चवथो प्रहर |
ब्रह्म मुहूर्तकी बेरा, झुंजूरका मनोहर ||धृ||

योगी मुनी साधुसंत, जागसेती झुंजूरका |
सुरुवात करसेत, दिनचर्या ध्यानलका ||
पुजापाठ आराधना, भक्तीमय होयकर ||१|| ब्रह्म...

कोंबड़ाकी कुकडूकू, गुंज सकाळी सकाळी |
उठावसे सबलाच, जसो गायके भुपाळी ||
पाखरुकी किलबिल, झनकारं कानपर ||२|| ब्रह्म...

भुमस्यारी आंगनमा, होसे सड़ा सरावन |
मालकीन शिदोरीला, देसे ओला बांधकन ||
मंग चारोपाणी कर, जासे खेतं हलधर ||३|| ब्रह्म...

पहाटला उठकर, करे विद्यार्थी अभ्यास |
पक्की होसे याददास्त, भरं मनमा उल्हास ||
होसे सफल जीवन, ओको मंजील सुकर ||४|| ब्रह्म...

फिरो सकाळी सकाळी, पैदलच सबजन |
करो योग प्राणायाम, भेटे शुद्ध ऑक्सिजन ||
होये निरोगी शरीर, स्फूर्ती रहे दिनभर ||५|| ब्रह्म...

जुना फुलं पड़सेती, झुंजूरका तुटकर |
दिसं बेला झाड़पर, नवो फुलको बहर ||
सुर्य चैतन्य सृष्टीमा, देसे लाली भरकर ||६|| ब्रह्म...

इंजि. गोवर्धन बिसेन, गोंदिया
      मो. ९४२२८३२९४१
       दि. २६ जुलाई २०२१
झुंजुरका

झुंजुरका झुंजुरका
खुली मोरी निंद
सरस्वती जीभ पर
मुख मा नाम गोविंद

शरीर शुद्ध करकन
आनंदमयी योग
मनमा ऊर्जा भरकन
त्यागेव निष्काम भोग

कोयल की कूहू कुहू
आवत होती दूर
दवबिंदू मा चमक
परिसर मा आनंदी सूर

तुलसी बिंद्राबन ला चढेव
तांबा को लोटभत पाणी
माय की भक्ती की
असी रीत पुरानी

मंदिर मा काकड आरती
नाचत होता वारकरी
झुजुरका बनावसे
सुसंस्कार का धुरकरी

सूर्यदेव को पहले जागो
अनधारोमा टाको आलस
तब मॉं भारतीको मंदिर को
बनाय सको गगनभेदी कलस

शेषराव वासुदेव येळेकर
मु.सिंदीपार जिल्हा भंडारा
दि. 11/07/21

  झुंजूरका

टूटेव सपना उघड्या डोरा
मोहक प्रसन्न झुंझुरका बेरा
बादरमा चमकं शुकीर तारा
धीरू धीरू बोवं थंडो वारा

कोंबडा बाग दे रय रयकर
मंदिरमा काकड आरतीको सूर
टाळ मृदंगकी धून वोकोपर
कानमा गुंजसेत स्वर मधुर

हंबरं सेती गाय ना ढोरं
शेणपुंजा उचलंसे कास्तकार
चूल्हो की राख निकालके 
सळा टाकसे भाग्यवंत नार
 
निळो अभारमा स्वर्णिम लकेर
लाल तांबूस रंग उधळकर
आवनको तयारीमा सें भास्कर
किलबिल संगीत बजंसे चौफेर

झुंजूरका फिरसेत लोग उठकर
बनेती तंदुरुस्त योग करकर
रवसें ताजगी पुरो दिनभर
झुंजूरकाको हवाको बहूमोल असर

                             शारदा चौधरी 
                                 भंडारा
झुंझुरका 

जो जो उठसेती झुंझुरकाला
उनका नशीब खुलसे सारा
जो जो रवसेती बाजपरा
उनका बजसेती बारा।।

प्राणवायु झुंझुरकाको
आळस भगावसे मनको
खराब हवा जासे बाहर
नयि शक्ती शरीरको।।

झुंझुरकाकी ताजी हवा
कसेत 'सौ रपयाकी दवा'
मेंदु होसे टवटवा
उठे वलाच भेटे मेवा।।

उठो विद्यार्थी ,शेतकरी
आब् झुंझुरका भयि
करो कष्ट कसो कंबर
घात परीक्षाकी आयि।।

उठो उठो पोवार भाऊ
गफलतमा् नोको रऊ
करो उत्कर्ष आपापलो
झुंझुरकालाच कर्म सुरू!।।

पालिकचंद बिसने
सिंदीपार (लाखनी)


झुंजुरका


झुंजुरका उठकर 
फिरनला जाव, 
वापस आयकर 
लेव प्रभुको नाव. 

तबियत तुमरी रहे 
एकदम फीट अच्छी, 
गलत बात नाहाय 
बात आय सच्ची. 

झुंजुरका रव्हसे 
हवा एकदम शुद्ध, 
अनुभव करके 
देखो तुमी खुद. 

पक्षी उठ जासेत 
झुंजुरका पासुन, 
कायला खाटपर 
रहे पायजे आपुन. 

जल्दी उठेवल् होयेत 
तुमरा पूरा काम, 
दौडधुप कम होये 
मनला मिले आराम. 

झुंजुरका उठकर 
देखो पूर्वकी लाली, 
भर जाहे तुमर् 
मन मा खुशहाली. 

. . . . . . . . . . . . - चिरंजीव बिसेन 
. . . . . . . . . . . . . . . .  गोंदिया
 
झुंजुरका 

काळ सरेव सरेव 
भयी आब् झुंजुरका 
नही कोणीला मालुम 
गया कहान तारका ||

रवी आयीसे ना घरं 
कसो रांगत रांगत 
घडी भरमा सांगसे 
कर कर्तव्य जागत ||

नवो दिन नवी दिशा 
सोच ठेवब् सकारी 
लेबं चैतन्य अहेर 
अना बनू उपकारी ||

सारो सृजन सृष्टीकी 
झुंजुरका से दवाई 
योग तंदुरूस्ती साती 
प्राणवायू से सवाई ||

झुंजुरका समयाला 
ठेवं सत्कर्मी उद्देश 
भेटे सत्वर ध्यानमा 
सत्य, अहिंसक देश ||

वंदना कटरे  "राम-कमल "

झुंजुरका 

झुंजुरका -झुंजुरका 
लग शीतल वारा 
मन मोरो मोहसे 
देखकर शहारा ।१।

झुंजुरका -झुंजुरका 
तन मन डोलसे 
सुगंध फुलईनकी 
मन ला लुभावसे ।२।

झुंजुरका -झुंजुरका 
मन प्रफुल्लित रव्हसे 
काम धंदा की 
हलकाई रव्हसे ।३।

झुंजुरका -झुंजुरका 
मन भजन गावसे 
भक्ति भाव की 
लगन लगसे ।४।

झुंजुरका -झुंजुरका 
कोंबडा आर आवसे 
सब मानव जीवनला 
वु जगावसे ।५।

झुंजुरका -झुंजुरका 
जब इंसान जागसे 
जीवन वोको पुरो 
सक्षम रव्हसे ।५।

सौ. ऊषा बाई रमेशजी पटले नागपूर 
फोन नंबर ७७४१०००९२३ 

झुंजुरका 

झुंजूरका झुंजुरका बाई
बडो गजबच भयेव
गावको बबल्या नांगर धरके
गावखारी को खेतमा चोयेव

कभी ना काल नोहोती चाल
बबल्या खूप सबको डोरामा
कोनीकोच तीन तेरा मा
मुरदंग बजावो गावको डेरामा

गावभर फेरी चहाडी चुगली
पुंडलीक पेहरसे उची ढेटी
घरमा जायके देखो त तुम्ही
बापको पच्याला बारा गाठी

तीरीप डोरापर आयेवपरा उठं
आखरपर बसके गोष्टी हाकं
माय बुळगी थकी हारी
पतलो तावापर रोटी सेकं

हातभर ककडी का
 नव हात बीजा
बबल्या मार बापको 
उसनो पर मजा

माय मंडाव डोस्कापर हात
अना कव् केवीलवानी
साद करेव मोठी मीन
अना पोट आयेव ढाड्या याहानी

पर अज आयी अक्कल
बबल्या ला बडी आमरो
खेतम दिसेव झुंजुरका
धरके बईल को कासरो

सौ. वर्षा पटले रहांंगडाले
बिरसी

Saturday, July 10, 2021

साहित्यिक श्री यादोराव चौधरी



 पोवारी इतिहास साहित्य अना उत्कर्ष व्दारा आयोजित
मोरो जिवन परीचय
नाव -यादोराव चिंधुलाल चौधरी
मुळ गाव-डव्वा (पळसगाव)
जन्म तारीख 16/10/1958
श्री समर्थ हायस्कूल दांडेगाव याहाल मुख्याध्यापक पदलं सेवा निवृत्ती दिनांक 31/10/2016
शौक्षणिक माहिती-वर्ग 1ते वर्ग 7 जि .प. पुर्व माध्यामिक शाळा डव्वा .वर्ग 8ते वर्ग 10वी आदिवासी शिव विद्यालय डव्वा,11वी सोसायटी ज्युनिअर कॉलेज साकोली. 12 ना बि. एससी.( जिव)डी.बी.सायन्स काॅलेज गोंदिया याहाल सन1982मा भयोव..लोकमान्य विद्यालय मुंडीपार मा मास्तर भयोव.
सन1985ला पी पी कॉलेज गोंदिया ल बी .एड . करेव
.श्री समर्थ हायस्कूल दांडेगाव मा मास्तर भयोव.
अॅडीशनल बी ए मराठी वाङमय.एम .ए. प्रथम वर्ष
संगीत विशारद (तबला)गायन ,वादन को छंद.
पोवारी मा कविता लेखन
गीत गंगा काव्य संग्रह.-प्रकाशित
बिह्या का गाना को संग्रह-प्रकाशित
पोवारी बोलीमा नाटक-
काकाजी मोरी आयको,समज,नवरान लेयीस, व्यथा, जागृती.
विनोदी संवाद लेखन -
आब जासू. बाचता नही आव,खाजो.
निबंध लेखन .अलक लेखन,असा विविध प्रकारका लेख लिखान करनोमा आया सेती.मराठी मा नक्षत्र काव्य.
गित भिमायण (डॉ बाबासाहेब आंबेडकर) को जिवनपट.एड्स गीतमाला
सामाजिक कार्य राजा भोज कार्यक्रम आयोजन करनो.
शिक्षाक क्षेत्रमा परिक्षक ना 20 सालवरी समिक्षक को कार्य. शिक्षक परिषद  गोरेगाव तालुका सचिव .
पारिवारीक.. माहिती दुयटुरा इंजिनिअर पुनामा कार्यारत सेंती .बहू भी इंजिनिअर सेती.
अर्धांगिनी जि .प. गोंदिया मा शिक्षिका से.
कला क्षेत्रमा -बेरुलक कलाकृती तयार करणो
ना लाखुड़ की शिल्प तयार करनो.असो मोरो जिवनपट से.  धन्यवाद जी
""जय राजा भोज जय माँ गड़काली""
वाय सी चौधरी
गोंदिया

अज का साहित्यिक कवी:-श्री यादोराव चिंधुलाल चौधरी

लोहा को परिस
नागंर ला हरिस
यादोरावजी खरा
चौधरी परिवार का वारिस

गुण कला का प्रतिनिधि
मन सुमती का संगी
अनंत कला कौशल्य
पूरो जीवन गुणरंगी

कुशलता का हात
बुद्धी वरद वाग्देवी
पोवारी धरोहर
एक नव तेजस्वी कवी

ऋषि तुल्य जीवन
शिक्षाविद महादानी
ज्ञानी कला उपासक
सृजनशील जवानी

समाज शिक्षक
सबका मार्गदर्शक
पोवार इतिहास का
सदा तूमी अग्रशिर्षक

शेषराव वासुदेव येळेकर
मु. सिंदीपार
दि.०८/०७/२१


आदरणीय साहित्यिक:- श्री यादोराव चिंघुलाल चौधरी

यादवराव गुरुजी को
गाव वू डव्वा
गुरुजी को तपलका
पुणीत वहान् हवा

संगीत विशारद
गायन,वादन को छंद
उनकी प्रतिभा की
हवा बहसे शितल मंद

माय बोली की सेवा
बिह्या का गाना
नाटक,कथा,निबंध,पत्र
जतन करिन गाना पुराना

अष्टपैलू व्यक्तिमत्व
बहुआयामी कला
लाकूड पर कारागिरी
जीवन अलबेला

महान कवि,लेखक
सेती कुशल शिल्पकार
घर मा ज्ञान की गंगा
हसतो खेलतो परिवार

मा वाग्देवी को वरदान
पोवारीका धुरकरी
सदा प्रतिभा का रंग बिखारे
तुम्हरी या पिचकारी

शेषराव येळेकर
मु. सिंदीपार
दि. ०८/०७/२१

अज का साहित्यिक कवी:-
श्री यादोराव चिंधुलाल चौधरी

पोवारी बोली इनकी शान
आमरो समूहको सेत मान
संगीत विशारद वय शिक्षक
यादोराव चौधरी उनको नाम

कलागुण आंग सेती सप्तरंग
काष्टशिल्प कौशल्य करसे दंग
सुखी संसार का चार सेती अंग
अर्धांगिनी उनकी सदा रवसे संग

तबला वादक भजनको छंद
काव्य संग्रह उनको गीतगंगा
पोवारी बोलीमा प्रसिद्ध नाटक
मराठी कविताकी बोवसे गंगा

वाणी मधुर सादो रवनोमान
शिक्षिका भार्या संभाळसे कमान
अभियंता दुही टूरा जीवको आधार
बहुला भी मान बेटी को समान

पोवारीको उत्थान, इनको लक्ष
नाव पर सवार भया सब दक्ष
गढकालीको आशीर्वाद रहे सदा
गाठो उत्कर्षका ठेवो सामने अक्ष

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

साहित्यिक - श्री. यादोराव चिंधुलाल चौधरी

साहित्यिक , कलागुनी
सेवानिवृत्त मुख्याध्यापक
चौधरी काकाजी सेती
मोठा समाजसेवक||

विद्याविभूषित काकाजी
गायन वादन का छंदप्रेमी
विद्यादान को कार्यमा  
नही करीन देनला कमी ||

 पोवारीको उत्थान साठी
पोवारिमा नाटक बनाईन
विनोदी संवाद लेखनलक
सबला काकाजीन हसाईन ||

बेरुकी बनी कलाकृतीन
सबको मनला मोहीस
रसिकवान काकाजी
कलागुनमा सेती रहीस ||

माता गडकालिको हाथ
सदा  उनकोपर रहो
पोवारीको विकासका धुरकरी
असाच बन्या तुम्ही रहो ||

सौ उषाताई रहांगडाले

अज का साहित्यिक

श्री यादोराव चिंधुलाल चौधरी


चिंधुलालजी चौधरी का सुपुत्र 
चौधरी यादोराव गुरूजी महान, 
गायन, वादन, शिल्पकला आवसे 
करसेती पोवारी कविता लिखान. 

परसगाव डव्वा उनको गाव 
मॅट्रिकवोरी गाव मा शिक्षण, 
उच्च शिक्षण बी.एस्सी. बी.एड. 
लेईन उनन् गोंदिया ठिकाण. 

गीतगंगा पहली पोवारी किताब 
प्रसिद्ध करीन पचीस साल पूर्व, 
पोवारी साती उनको योगदान 
ना सहयोग रव्हसे अपूर्व. 

काष्ठ शिल्प की सुंदर कला
बिह्या का गाना, नाटक लेखन, 
हर कला मा सेती वोय पारंगत
अलक, विनोदी संवाद लेखन. 

पवारी साहित्य मंडल का 
गोंदिया जिल्हा प्रभारी, 
कार्यला तुमर् नमन से 
बडभाऊ यादोराव चौधरी. 

. . . . . . . . . . - चिरंजीव बिसेन
. . . . . . . . . . . . . . . . गोंदिया

आदरणीय साहित्यिक:- श्री यादोराव चिंघुलाल चौधरी

यादवराव गुरुजी को
गाव वू डव्वा
गुरुजी को तपलका
पुणीत वहान् हवा

संगीत विशारद
गायन,वादन को छंद
उनकी प्रतिभा की
हवा बहसे शितल मंद

माय बोली की सेवा
बिह्या का गाना
नाटक,कथा,निबंध,पत्र
जतन करिन गाना पुराना

अष्टपैलू व्यक्तिमत्व
बहुआयामी कला
लाकूड पर कारागिरी
जीवन अलबेला

महान कवि,लेखक
सेती कुशल शिल्पकार
घर मा ज्ञान की गंगा
हसतो खेलतो परिवार

मा वाग्देवी को वरदान
पोवारीका धुरकरी
सदा प्रतिभा का रंग बिखारे
तुम्हरी या पिचकारी

शेषराव येळेकर
मु. सिंदीपार


अजका साहित्यिक ः
श्री. यादोराव चिंधुलाल चौधरी

अभंग

बाप चिंधुलाल।नाव यादोराव।
डव्वा आय गाव।गुरूजीको।।

पद की निव्रूत्ती।गाव दांडेगाव।
कमाईन नाव।शिक्षाक्षेत्र।।

शिल्पकार मोठा।मोठा ग्यानी ध्यानी।
जीवन से मानी।बहुगुणी।।

विनोदी लेखन।पोवारी नाटक।
लिखाण माफक।संग्रहीत।।

मायबोली सेवा।घडे अविरत।
आये मंग सत।पोवारीमा।।

प्रतिभा का धनी।सुज्ञ अर्धांगिनी।
लिखुसु जिवनी।काकाजीकी।।

गायन वादन।कविता लेखन।
वाचन मनन।छंद सेत।।

सौ.वर्षा पटले रहांंगडाले
गोंदिया

Friday, June 25, 2021

साहित्यिक डॉ. प्रल्हाद रघुनाथ हरीणखेडे



नाव: डॉ. प्रल्हाद रघुनाथ हरीणखेडे "प्रहरी"
मूल निवासी:
मु+पो. डोंगरगांव
ता.+जि. गोंदिया 

हाल मुक्काम: 
३०५, साई ऑरा, सेक्टर-१७, उलवे 
नवी मुंबई-४१०२०६
मो. ९८६९९९३९०७/ ९३२६५१९८२८

शिक्षण: एम.एस.सी., बी.एड., एम.फील., पी.एच.डी., सेट   
१० वी वरी - डोंगरगांव
११ वी ते बी. एड. - गोंदिया 
एम.फील.- अमरावती (महा.)
पी.एच.डी.- मुंबई

व्यवसाय: 
१. अधिव्याख्याता प्राणिशास्त्र विभाग (महाराष्ट्र शिक्षण सेवा गट-ब, राजपत्रित अधिकारी, २०१२ पासून) 
२. समन्वयक (Co-ordinator) संगणक शास्त्र 
महाराष्ट्र शासनाचे इस्माईल युसूफ महाविद्यालय, जोगेश्वरी, मुंबई-६०

आवड/छंद: गिर्यारोहण, निसर्ग निरीक्षण, संगीत, हार्मोनिका, ढोलक वादन, गायन, लेखन 

पुरस्कार: शिक्षण क्षेत्रमा
१. शिक्षक होनो विश्वको सर्वोच्च पुरस्कार आय जेको मोला सार्थ अभिमान से, बशरते व्यसन व्यभिचार अवगुण रहित आचरण हो. येनं बातमा मोरो बडभाऊ (स्व. पी. आर. हरीणखेडे) अना मायबाप (सौ. रायाबाई रघुनाथजी हरीणखेडे) इनको संस्कारइनको मी आजन्म ऋणी सेव.
शिक्षकी पेशा को अलावा
* दूय आंतरराष्ट्रीय आंतरविषय परिसंवादको आयोजन (मुंबई)
* परिसंवादमा शोध निबंध अना संपादन कार्य लाई पुरस्कृत (२००९) 
* पाच आंतरराष्ट्रीय नियतकालिकमा शोध प्रबंध 
* ११ राष्ट्रीय नियतकालिकमा शोध प्रबंध 
सहयोग/ सहभाग:
१. सत्यनाम सांस्कृतिक मंडळ (१९९४) 
२. सद्गुरू कबीर बहुउद्देशीय कृती समिती स्थापना (१९९६) 
३. उपाध्यक्ष: राष्ट्रीय पोवारी साहित्य, सामाजिक उत्कर्ष संस्था 
४. पोवार इतिहास साहित्य अना उत्कर्ष समूहमा काव्य परीक्षण, काव्यतरंग समूहमा काव्यस्पर्धा संयोजन, शब्दरजनी समूहमा काव्य परीक्षण
  
जीवनपट:
१. गावमा खेतीका पूर्ण काम करता करता शिक्षण 
२. १० वी को बाद शिक्षण संग उनारोमा प्याऊ, नर्सरी, शासकीय वनीकरणको काम असा काम 
३. खाजगी शिकवणी, दूध डेअरी अना पीसीओमा काम करके बी.एस.सी.अना बी.एड. संपादन 
४. अध्यापन:
                २०००- २००५ गुजराती शाळा/ विज्ञान महाविद्यालय गोंदिया 
                २००५-२०१० महाराष्ट्र शासनाचे एल्फिन्स्टन महाविद्यालय, मुंबई-३२ 
                २०१०-२०१२ महाराष्ट्र शासनाचे शासकीय महाविद्यालय, कसनसुर, गडचिरोली 
                २०१२-२०१५ महाराष्ट्र शासनाचे एल्फिन्स्टन महाविद्यालय, मुंबई-३२ 
                २०१५- आजतागायत महाराष्ट्र शासनाचे इस्माईल युसूफ महाविद्यालय, जोगेश्वरी, मुंबई-६०

रचना संग्रह:  
१. शालेय सांस्कृतिक कार्यक्रमलाई १२ नाटकं लेखन (पैकी "प्रितिप्रेम" "पक्या इमानी सुक्या बेईमानी" अना "परमानेंट सुख पाहिजे" पुरस्कृत)    
२. 'अबोली' (मराठी), 'स्वर संस्कृती' (मराठी/हिंदी/पोवारी) अप्रकाशित कविता संग्रह (१९९१-१९९६) 
३. आगामी दूय पोवारी कविता संग्रह अना एक पोवारी कथा संग्रह प्रकाशनलाई तयार सेत (नाव/ शीर्षक गुलदस्तामा).
४. लॉकडाऊन कालमा २०० पोवारी कविता, ९७ मराठी कविता, २५ हिंदी कविता, ४५ बोधकथा/बालकथा, २० अलक, ३५ लेख/निबंध/पत्र इत्यादी रचना संग्रह.  
५. हायस्कुल पासनाच सिनेमाको गानाको चालपर कविता, भजन, गाना बनावनों अना गायनको सऊक. 

उच्च शिक्षण संपादन कालमा विज्ञानको क्षेत्र रहेलक २०१९ वरी लेखन, साहित्य/ रचना सर्जनकी सऊक/काम मंघ पड गयेव. २००५ पासना मुंबईमा क्षत्रिय पोवार समाज संगठन लोक जुडेव रहेवको कारण २०२० मा व्हाट्सअप समूह नामे "पोवार इतिहास साहित्य अना उत्कर्ष" को माध्यमलक पुन्हा साहित्य सर्जनको कामला गती मिली अना निज क्षत्रिय पोवार समाजको उत्थान करनको पावन काममा, अल्पसो काही नोको होय, योगदान देनको सौभाग्य प्राप्त भयेंव. सध्या विविध हिंदी, मराठी अना पोवारी साहित्य समूहमा सदस्यता. 

वैयक्तिक मत:
समाज सर्वोपरी

(मोरो शिक्षण क्षेत्रको थोडासोय योगदान यहां प्रेषित करी सेव काहेका यहां साहित्य क्षेत्रको योगदान ज्यादा अपेक्षित से जो की मोरो जवर अल्पसो से. मी खुदला साहित्यिक नहीं मानू अना असलमा मी खरो साहित्यिक नोहोव. काहेका साहित्यिकको साहित्य क्षेत्रमा भरीव योगदान अना साहित्यको यथायोग्य ज्ञान रवनो जरुरी से जो मोरो जवर नहीं को बराबर से. साहित्य क्षेत्रका जेष्ठ, अनुभवी अना नामवंत साहित्यिकइनको कृपादृष्टी अना आशीर्वादलक येनं क्षेत्रमा थोडी जाणकारी जमा करता करता ज्ञान अर्जित करनको मोरो प्रयत्न चालू से.)

अजका साहित्यिक
श्री प्रल्हाद हरिणखेडे

डोंगरगाव का सुपुत्र आती 
'प्रहरी' हरिणखेडे प्रल्हाद, 
उनको नाव आयककन् 
आवसे भक्त प्रल्हादकी याद. 

एम. एस. सी, बी. एड्. 
सेट, एम.फील, पी. एच. डी, 
हासिल करीसेन उनन् असी 
जीवनमा मोठ् मोठी डिग्री. 

अधिव्याख्याता सेती वोय 
प्राणी शास्त्र विभाग मा, 
अना समन्वयक सेती वोय 
संगणकशास्त्र विभाग मा. 

हार्मोनियम, ढोलक वादन 
अना गिर्यारोहण, संगीत, 
छंदसे निसर्गनिरीक्षण, गायन
अना लिखनो कविता गीत. 

अनेक अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 
नियतकालिक मा शोध प्रबंध, 
काव्यस्पर्धा संयोजन, परीक्षण 
अनेक समूह मा उनको संबंध. 

चिरंजीव बिसेन
गोंदिया

आदरणीय साहित्यिक
 प्रल्हाद रघुनाथ हरीनखेडे

रसिक साहित्यिक प्रहरी पोवारीका 
कथा, कहानी, नाटकका रचियता
कविता को झरझर नित बोहसे झरना
डॉ.प्रल्हाद सुपुत्र सुजाण, रघुनाथ पिता

अधिव्याख्याता प्राणिशास्त्र विभागमा सेती
शासन समन्वयक संगणक क्षेत्रमा विचरण
शिक्षकला विश्वको सर्वोच्च पुरस्कार मानती
व्यसन, व्यभिचार, अवगुणरहित आचरण 

दूय आंतरराष्ट्रीय  परिसंवादका आयोजक 
शोध निबंध अना संपादन कार्य लाई पुरस्कृत 
पाच आंतरराष्ट्रीय नियतकालिकमा शोध प्रबंध 
११ राष्ट्रीय नियतकालिकमा शोध प्रबंध वृत

परीक्षक काव्यस्पर्धाका काव्यतरंगमा संयोजक, 
संघर्षमय जीवन हसतमुख स्वभाव निष्कपट
जीवनकी कठीण धुरा पती पत्नी संभाळत
प्रेरणादायी से उनको जीवन को यशोपट

"प्रितिप्रेम" "पक्या इमानी सुक्या बेईमानी" 
"परमानेंट सुख पाहिजे" पुरस्कृत सेती कृति
पोवारी  कवितासंग्रह होये प्रकाशित आशा
गढ़कालिका आशीर्वाद, आमरो स्नेह रहे प्रति

सौ छाया सुरेंद्र पारधी

ऋण साहित्यिक गणको :- 
श्री प्रल्हादजी हरीनखेडे 
                        
पोवारीको उत्थान साठी,जीवन समर्पित 
श्री प्रल्हादजी  हरीनखेडे,सेती  कार्यरत।।

गोंदिया   तहसील मा  एक गाव डोंगरगाव
माय सौ.राधाबाई,अजीको रघुनाथजी नाव।।

सुखी समृध्द परिवार, ना होतो कास्तकार 
जन्म भएव प्रल्हादजी को,सुंदर संस्कार।।

एम.ए. बी.एड्‌. एम.फिल.,पी.एच.डी करीन
पोवारीको उत्थान साती,उच्च भरारी भरीन।।

कार्यरत ,राष्ट्रीय पोवारी संस्था का उपाध्यक्ष 
पोवारी समाज, की मनमा तळमळ की साक्ष।।

मुंबई मा स्थायिक भया,राजपत्रीत अधिकारी 
शोध निबंध,नियतकालिक,कविता संग्रह भारी।।

महाराष्ट्र  शासन महाविद्‌यालयमा अध्यापन 
छंद से संगीत,गिर्यारोहन,ना निसर्ग परीक्षण।।

हार्मोनियम,ढोलक का वादक ना  गायन गीत
कई नाटक लिखीन ना देईन कवीताला संगीत।।

अनमोल पोवारीको ठेवा जिनन जपीन निर्विवाद
माय गडकालीकाको उनला सदा मिलेआशीर्वाद।।
                  
डी पी राहांगडाले 
     गोंदिया


   डाॅ. प्रल्हादजी हरिणखेडे (प्रहरी)

डोंगरगाव गावका सुपुत्र प्राध्यापक डाॅ. प्रल्हादजी हरिणखेडे गावखेळामा सिकस्यान डाॅक्टरेट बननेवाला (phd) सर्वसाधारण घरका एक सर्वसाधारण परीस्थितीमा निपज्या एक हिरा कवनो लगे असो व्यक्तित्व. ग्रामिण भागमा सुविधाकं अभावमा माणूसकी काही अलग कर देखावनकी इच्छाच मर जासे. पर मनमा रातदिन मेहनत करनकी दृढ ईच्छा रही त् कोणतीच परिस्थिती प्रगतीमा आळवी नही आय सकं येको जितो जागतो उदाहरण मंजे आमरा प्रा. डाॅ. प्रल्हादजी हरिणखेडे. अज शासकीय अध्यापन क्षेत्रमा आपलो अलग ठसा उमटायस्यान साहित्य क्षेत्रमाबी आपली अलग छाप उमटाय रह्या सेत. 

प्रा. डाॅ. प्रल्हादजी हरिणखेडे येव उच्च विद्या विभूषीत व्यक्तित्व येतरो सिधो साधो से का इनकंसंगं घळीभरमाच कोणीकीबी दोस्ती जम जाये. साधो रवनेवालो येव हिरा पोवारी साहित्यकं माध्यमलक सबला सुपरीचित भयेव. अध्यापन क्षेत्रकं संग संग डाॅ. प्रल्हादजी हरिणखेडे आपल् लेखुन प्रतिभालक पोवारी अना मराठी साहित्य समृद्ध कर रह्या सेत. प्रहरी नावलक लिखनेवाला डाॅ. प्रल्हादजी पोवारीमा अलग अलग काव्य प्रकारमा लेखन कर आपली अलग पहचान बनायीसेन.

शिक्षकी पेशाला सर्वोच्च पुरस्कार समजनेवाला डाॅ. प्रल्हाद हरिणखेडेजी राष्ट्रिय अना आंतरराष्ट्रिय परीसंवादयीनको सफल आयोजन करस्यान आपली नेतृत्व कलाबी देखायीसेन. अनेक परीसंवादमा भाय लेयस्यान आपलो संशोधन कार्य सबवरी पोवचायीसेन. अध्यापन, साहित्य अना संशोधनकं बराबर गिर्यारोहण, निसर्ग निरीक्षण, संगीत, हार्मोनिका, ढोलक वादन, गायन असा छंदकी जोपासना करनेवाला एक उच्च प्रतिभाका धनी डाॅ. प्रल्हादजी आपलं सबकं बीच सेत याच आपलंलायी भाग्यगी बात से.

पोवार समाजमा प्रतिभाकी कमी कहींच नहाय ना नोहती. आपलं समशेरलक युद्धभूमी गजबजाय टाकनेवाला पोवार अज खेतीकं बराबर उद्योग, व्यापार, कला, शिक्षण, आयटी, मेडिकल अना अन्य बहुतसारं क्षेत्रमा आपली कर्तबगारी देखायरह्या सेत. या कर्तबगारी देखावनकं बेरा आपली मायभूमी, आपलो समाज, आपली मायबोली इनकं सेवाको भाव मनमा ठेवनेवालो सुसंस्कत समाज बंधूईनमालक डाॅ. प्रल्हादजी एक सेती. उच्ची उडाण लेयकनबी पाय जमीनपर ठेवनेवालो उच्च संस्कारीत व्यक्तीत्व उनकं अंदर विराजमान से. आपलं समाजलायी जेतरो जमे वोतरो योगदान देनको भाव वूनमा सदा चोवसे. येवच भाव उनला अन्य लोकयीनमालक अलग करंसे.

माता सरस्वतीको आशिर्वाद मिलेव येव कवी, हाळाको शिक्षक, सुसंस्कारको धनी व्यक्ती पोवार समाजला सदा प्रेरणादायी से. उनकं प्रतिभालक मायबोली पोवारीको साहित्य क्षेत्र अधिक समृद्ध होये. वूनको शिक्षण, साहित्यक्षेत्रमाको योगदानको आलेख रोजकं रोज बढतो रहे असी माय गढकालीकाला मी प्रार्थना करूसु. 

लेखन - गुलाब रमेश बिसेन
मु. सितेपार , ता. तिरोडा , जि. गोंदिया. 441911
मो. नं. 9404235191
ई मेल - gulab0506@gmail.com


डॉ. प्रल्हादजी हरीणखेडे "प्रहरी"

पोवारी को भाव, मनक् अंदर
कविता सुंदर, लिखसेती।। १।। 

काव्यमा चोवसे, सृजन भरारी
भया वारकरी, पोवारी का।। २।। 

बढायात तुमी, पोवारी को मान
काव्यरुपी धन, देयकन।। ३।। 

प्रल्हाद भाऊसे, गुण को सागर
सात्त्विक बिचार, शोभा देसे।। ४।। 

पोवारी सजावो, लगावसे नारा
पोवारी को हिरा, प्रल्हाद भाऊ।। ५।। 

मौलिक बिचार, काव्यमा लिखसे
शब्द सजावसे, काव्य रुपी।। ६।। 

विद्या विभूषित, बहु मेहनती
काव्य रुपी मोती, सजावसे।। ७।। 

असा बहुगुणी, प्रल्हादजी भाऊ
तुमरा गुणगावु, कवितामा।। ८।। 

डॉ. शेखराम परसरामजी येळेकर
२४/६/२०२१


 डॉ. प्रल्हाद रघुनाथ हरीणखेडे "प्रहरी"
वारकरी पोवारीको
      (अष्टाक्षरी रचना)

वारकरी पोवारीको
नाव "प्रहरी" रतन |
कथा कविता लिखसे
बोली पोवारी जतन ||१||

रघुनाथजीको टुरा
वकी रायाबाई माय |
जन्म सुखदेवटोली
डोंगरगांवको आय ||२||

भेटी जीवन संगीनी
वला डिलेश्वरी बाई |
पुत्र सात्विक भयेव
कुल बढ़ावन लाई ||३||

शिक्षणमा सेट वरी
ओनं बढ़ाईस कद |
नौकरीमा प्राणीशास्त्र
अधिव्याख्याताको पद ||४||

वला शिक्षकी पेशाको
मोठो सार्थ अभिमान |
शुध्द आचरण संग
करसेती शिक्षादान ||५||

सोळा पत्रिकामा वनं
शोध निबंध लिखीस |
पुरुस्कृत होयशानी
स्वप्न सुंदर देखीस ||६||

बारा नाटक लिखीस
सांस्कृतिक खेललाई |
'प्रितप्रेम' अना दुय
श्रेष्ठ पुरस्कृत भयी ||७||

हिंदी मराठीका काव्य
'स्वर संस्कृती' 'अबोली' |
संग पोवारी कविता
भरी साहित्यकी ढोली ||८||

कोरोनाको समयमा
सवा तीनसौ कविता |
हिंदी मराठी पोवारी
बनी ज्ञानकी सरिता ||९||

पोवारीमा एक कथा,
दुय कविता संग्रह |
भविष्यमा प्रकाशित
करनको से आग्रह ||१०||

छंद पहाड़ी चड़नो
निसर्गको निरिक्षण |
हार्मोनिका, ढोलक ना
गीत गायन लेखन ||११||

सत्यनाम, कबीरका
बिचारको से आधार |
उचो उठनलाई भेट्या
मायबाप का संस्कार ||१२||

माय गडकाली संग
वाग्देवीको से आशिष |
लेखनीलं समाजमा 
उंचो उठे वको शिष ||१३||

शब्द रजनी पोवारी
गृप काव्य परिक्षण |
शिक्षालाई रवसेती
बहुमोल मुल्यांकन ||१४||

कथा कविता इनकी
ठाम सांग गोवर्धन |
मायबोली पोवारीको
करे खरो संवर्धन ||१५||

इंजि. गोवर्धन बिसेन, गोंदिया
      मो. ९४२२८३२९४१
      दि. २४ जून २०२१

Saturday, June 19, 2021

साहित्यिक सौ.ज्योति पटले




नाव:-ओमलता कृष्णकुमार 
             पटले.
 टोपन नाव:- ज्योती
  
 गाव:-  बोदलबोडी पो:धानोली 
         ता:सालेकसा जि:गोंदिया
   जन्म ता:- १८/११/१९१४
 जन्म गाव:-*वळद (कटंगटोला)
                पो:अंजोरा 
           ता:आमगाव जि:गोंदिया
  बाबुजी को नाव:- देवाजी 
               तुळशीरामजी परिहार
    धंदा:-  खेती/कपडा दुकान
 आई को नाव :-लक्ष्मी/देवांगणा
  शिक्षण:- १ली ते ७वी पयॅत 
                वरिष्ठ प्राथमिक शाळा वळद
   ८वी ते १० semi-english  साठी आदर्श वि. आमगाव.
 ११वा ते १२ IT sci (full english)  आ. वि. आमगाव.
  B.Sc.:-D.B.Science  college  Gondia
   msc:back
  

 नौकरी:-  मी जास्त मोठी नाहाव अना ज्यादा सिकी नही. पर नौकरी साठी प्रयत्न करेव .प्रायवेट मा Shanti Niketan Convent मा ४ साल लका जाॅब करेव. SBSC ला narsary to 4th standard पर्यंत होती. D.ed नही करेव पण आपलो अनुभवल अना्  हुसारी लका जाॅब करेव. अना सोबत पा्वेट लका  Y.C.M लका final भयव.   आब History  मा M.A. 1'st year चालू से .
  पण सध्या कोरोना को कारण घर से.

   मग ५/५/२०१९ मा बिह्या भयव. 
  कृष्णकुमार पटले संग. 
  

 एक टुरी :_ वेदांशी १५ महीना की से . ९ महीना पासूनच चलसे  अना् बोलभी से.
   
  पुरस्कार:-  मी जास्त मोठी नाहाव पर आठवन से की जब मी४ वी अना् ७वी स्कालरशिप की परिक्षा होयत ७वी मा तालुका  माल पहिली आयी त ८ ते १० पर्यंत हर साल ५००० हजार रू मिल्या म्हणजे पूरा १५हजार
  मग मी १२वी मा होती, तब .
 *सामाजिक वनिकरण*  येन निबंध परिक्षा मा जिल्हा मा पहिली आयी तब ५०००रू को बक्षीस भेटेव.
  ता:१५/०९/२०१२ ला नंबर आयव अना मोरो गोंदिया मा सत्कार होतो वनच दिवस मोरो भाऊ की गणेश विसर्जन मा मृत्यू भयी. *२९/०९/२०१२ ला*  
   

 आवड छंद :- भजन कवनो,  डाॅन्स/नृत्य करनो. भाषण देनो जब convent मा जाॅब करत होती तब मीच संचालन करत होती. 


  लेखन कार्य/पुस्तक इनको काही अनुभव नाहाय जी.
        


 जीवनपट:-  
                       आम्ही तीन बहीन भाऊ होता. मोठी बहीन *शारदा.* मग मोरो भाऊ *महेश* जिनकी गणेश विसर्जनमा मृत्यु भयी. तब पासून मी येन भगवानला त्याग देयव. मी प्रसाद भी नही खाव येन भगवान  की . 
 आपलो जन्म दिवस को दिनही /२१ साल मा स्वर्गवास भया.
 मग मी सबसे लहान *ज्योती*  
 परिवार  मोठो से बाबुजी तिन भाऊ सेत. अना तिन आत्या.
   सध्यामा ४ भाऊ सेत ब्रम्हा भाऊ :- महा. पोलिस.
 विश्वा भाऊ:- वनरक्षक कर्मचारी
  शिवसागर भाऊ:-कपडा दुकान सभांल सेत 
 रामसागर :-विडीओ सुटींग को काम करसे.  काही भाऊ की कमी नही करत. असा मोरा पाचपांडव भाऊ होता . *ब्रम्हा-विष्णू-महेश-राम-शिव* 
 बहीन *:-शारदा-दुर्गा-ज्योती*  .
  सब भगवान की अवतार.

    सौ. ओमलता बाई पटले

बहूदा सन्मानित
पोवार की बेटी
ओमलता बाई ला
पहले शुभेच्छा कोटी

पोवारी कवयित्री
समाज की ज्योती
आपलो प्रतिभा लक
बाटसे मोती

कृष्णकुमार पटले की
ज्योती से सन्मान
परिहार परिवार की बेटी
प्रतिभावान गुणवान

देवाजी,देवांगणा की
अनमोल मोती
पटले परिवार मा आयी
दुय परिवार की ज्योती

देवांशी अनमोल रत्न
कच्ची मटका पकावसे
ओमलता सृजनकार
शिक्षा दान करसे

भजन,नृत्य मा पारंगत
भाषण, संप्रेषण लाजवाब
कष्टमय जीवन तरी
खिलतो महकतो गुलाब

अष्टपैलू व्यक्तिमत्त्व
जसी साक्षात सरस्वती
बालपण पासून अज वरी
शब्द कमी सांगन् महती

भगवान संग विद्रोह
मोला लगी मुक्ताई
उच्च कोटी वैचारिक प्रगल्भता
सगुण निर्गुण की माई

शतदा नमन करु
तुमी पूरो देश को गौरव
पोवार की बेटी
पराक्रमी शौर्यवान

शेषराव येळेकर
 सिंदीपार जिल्हा भंडारा
दि. १७/०६/२१

   
    ऋण साहित्यिक गणको :- सौ. ओमलता पटले
              (चाल:- श्रावण का महिना)
                          
साहित्यिक का ऋण, केतरा  आमरं पर
उत्थान करण पोवारीको,लेखणीला धार //धृ //

गाव वळद /कटंगटोला, तहसील आमगाव
सुखी समृध्द परिवार,माय लक्ष्मी बाई नाव
बाप देवाजी परिहार, दुकानदार/ कास्तकार//१//

तिन होता बहीनभाई, मा  मोठी शारदा बाई 
लहान ओमलता, ना स्वर्ग गएव महेश भाई
दुयच बहिणी रहि,पर से उनको मोठो परिवार//२//

बी.एस.सी.वरी शिक्षण,पुळ शिकनकी आस
५/५/१९ला बीह्या भएव, बोदलबोडी  निवास
पती   भेटेव  कृष्ण कुमार,से  पटले परिवार //३//

कुलमा सुंदर सुशील टुरी  वेदांशी ओको नाव
होतो जोँधरा पानपर दिस, असो ओको भाव
खुशालीको जिवन जग,उनको सुखको संसार//४//

ओमलता/ज्योती बाई ला छंद कविता को
सुंदर कर गीतगायन,झेंडा गाळ पोवारीको
छंद भजन गायन को सुसंस्कृत  संस्कार  //५//

उभरती   कवीयत्री,लेखिका,गायन गीत
रहे शीशपर सदा माय कालीकाको हात
याच रहे शुभकामना ,दे पोवारीला आधार //६//

              
डी पी राहांगडाले
      गोंदिया


सौ. ज्योती पटले

ज्योती जगमगाय रही से
आमरो समूह की जान
कृष्ण की राधा मनभावन
पटले परिवारकी से शान

स्वभाव इनको खडखड नदी
बहुमुखी प्रतिभा की धनी
मनको भाव नहीं लुकावत
भजन, नृत्य मा पारंगत बनी

सदा हासतो मुखमंडल
लाजवाब भाषण, संचालन 
घरदार की धुरा संभालसे
खिन नही लग चित्र बनावन

पाच भाई की बहनाई लाडकी
माहेर ईनको से भरेव पुरेव
पोवारी मा लेख लिखाण
भरभर आवसेत मनको बाहेर

असिच सदा हासत खेलत रहो
पोवारी की धूरकोरी बनो
गढकलिका को आशीर्वाद लक
पोवारी को खेतमा नित रमो

सौ छाया सुरेंद्र पारधी


अज की साहित्यिक
ओमलता कृष्णकुमार पटले
.  
ओमलता कृष्णा पटले 
ज्योती से टोपण नाव, 
वळद को आय माहेर 
बोदलबोडी से गाव. 

लक्ष्मीबाई ना देवाजी भाऊ 
आती माय ना बाप उनका, 
मोठी बहीण शारदा, दुर्गा 
सेती चार भाई बी उनका. 

वळद आमगाव गोंदिया मा 
भयी से उनकी पूरी पढाई, 
मन क् लगन लका उनन् 
बी. एस्सी. की डिग्री पाई. 

अनेक पुरस्कार मिल्या 
शिष्यवृत्ती मा भई सफल,
मेहनत मा से विश्वास 
वोको भेटसे उनला फल. 

भजन, डान्स को से छंद 
भाषण, संचालन मा अग्रेसर, 
वेदांशी की माय कहलावसे 
कविता बी करसेती सुंदर. 

. . . . . . . . . . . - चिरंजीव बिसेन
. . . . . . . . . . . . . . . . . गोंदिया


ज्योती पटले

मावशी मोरी ज्योती बाई
खासे चटणी को भेद्रा
मंझली माय उनकी लाडकी
नाव से उनको शुभद्रा

ब्रम्हा,विष्णु,महेश,शिव की
बहीण या बडी लाडकी
गुणी अना कर्तृत्ववान
चित्रकार से मोठी हाड की

माय को वाडा पुढं
महाबीर को मोठो मंदिर
किर्तन, भजन ,आरती
मोरो मावशीला आवसे सुंदर

सदा रवसे हसतमुख
भळभळ्या से स्वभाव
वेदांशी बेटी होनहार
नाहाय कोणतोच अभाव

सौ.वर्षा पटले रहांंगडाले
गोंदिया

ज्योती पटले
जगमग करती ज्योति 
बनी कृष्ण कि राधा
बहु गुनी बाई हे 
हुशार अति ज्यादा

तीन भाई कि लाडली
हसमुख से स्वभाव
भजन मा रमसे
ओमलता से नाव

पिता देवाजी परिहार
माय लक्ष्मी बाई
वळदकी टुरी गांव
बोदलबोडी बहु बनके आयी

नर्सरी को टूराइनला
करसेत शिक्षा को दान 
मायबाप कि गुनी बेटी
से बड़ी कर्तुत्वान

वेदांशि टुरी भयी 
से मोठी गुनवान
लहानसो उमर मा
होसे गुणगान

हासरो स्वभाव तुमरो 
सदा रहो खुश
वाघ्देवी कृपा कर
हासत रव मुख

स्वप्नाली दुर्गेश ठाकरे

 ओमलता पटले

लक्ष्मी देवाजी को घरं
प्रज्वलीत भई ज्योती
चांद सो सुंदर मुखडा
बहुगुणी  सें  अति

शारदा ओमलता महेश 
मायाप्रीत का बहिणभाई तीन
भाई को गम मा बहीण नं
धरिस अबोला भगवान सीन

वळद की कन्या
बी.एस.सी. भई
कृष्णकुमार की नैनूला
वेदांशी की आई

भजन गायनको
छंद सें तोला 
दे साहित्य को वारसा
पुढ्को पिढीला

पोवार की बेटी तू
लगावं पोवारी को नारा
पोवार समाजमा चमकजो
बनके उभरतो तारा

                 शारदा चौधरी 
                     भंडारा


ज्योती पटले


साहित्यकी जगमग ज्योती
तनया देवांगणा अन् देवाजीकी
बनी कृष्णकुमार की भार्या
आई कहलाई वेदांशिकी

बाल्यकाल पासून से गुणवान
कलागुनकी से वा खान
विद्याको  भेटेव असो   वरदान
स्कालरशिपमा मिळाईस मान

विद्यादान से सबसे मोठो दान
लहान बालक करीन सुजाण
सदा हसतमुख चेहरा तोरो
दुर करसे बाच्चाईनको ताण

माता गढकालिकी कृपा
सदा सर्वदा बनी रहो
पोवारिको उत्थान की
अशीच कास धरती रहो

सौ उषाताई रहांगडाले

Tuesday, June 15, 2021

बहावा/अमलतास६७


पोवार इतिहास, साहित्य अना उत्कर्ष समूह द्वारा आयोजित काव्यस्पर्धा

 बहावा/बाहा
  

बहावा को झाड 
मध्यम ऊंचाई को, 
हिवरा हिवरा पाना 
पिवर पिवर फूल को. 

फूल को रंग गर्द पिवरो 
शेंग वोकी लम्बी लम्बी, 
मोटी फल्ली मुंगना की 
होसेत जसी लम्बी लम्बी. 

फल्ली क् गिदा की चाय 
पिवसेती पोटदर्द वाला, 
फूल का भजिया बी 
बनसेती बहुत निराला. 

साप किटूरला आवन साती 
रोकसेती बहावा की शेंग, 
मुहून छपरी क् बरन मा 
लगावसेती वोकी शेंग. 

                   - चिरंजीव बिसेन
                               गोंदिया

           बाहा  /  अमलताश
                   
खेत क धुरोपर बाहा को झाळ।
लंबा लंबा लग्‌या तुरा………।।
पिवरा पिवरा फुल लग्‌या सेत ।
दिससेत मोठा साजरा……...।। १।।

फुलकी बनाओ भाजी ना भजिया।
ओको हयता भी होयजासे…….।।
लकडी चांगली वारगयी त।
इंधन क काम मा आयजासे ।। २।।

बाहा को झाळ से बहुगुणी ।
बहु उपयोगी रव्हसे……...।।
जळ,खोळ,पान,फुल,शेंग  ।
सब काम मा आवसे………।। ३।।

आयुर्वेद की दिव्य दवाई.. ।
टॉनिक को काम करसे... ।।
पानाको रस ना पेस्ट भी...।
जलन सुजन काम आवसे ।। ४।।

जळी जलायकर धुव्वा लेवो।
सर्दी,खासी परायजासे…...।।
जळी  को काढा  पिवाओ।
बुखार भी उतर जासे…….।। ५।।

असो बाहा को झाळ उपयोगी।
ना से मोठो वु गुणकारी…...।।
मानव जिवन सुखी करनला ।
झाळ  लगाओ नरनारी…….।। ६।।
            
डी पी राहांगडाले
     गोंदिया
 बहावा

बसंतको कोवरो सोनेरी तपनमा
कंचनसम सुंदर बहावा फुलेवं
पिवरा धम्मक फुलं देखके
मन मोरो मयुरवानी झुलेवं

हिरवीकंच पर्णसाडी नेसके
बोहलापर चढसे  नवरी नार
हल्दीलक माखिसे फुल पिवरो
नटीसें जणू देखो करके शृंगार

पंचपाकळी फुल झुकेव भूपर
लटकीसे जसो पिवरो झुंबर
फुलंसे झाड दरी कपारमा
लंबी शेगमा सें सुगंधी गर

बहावाको झुकाव देखके
होसे संत महात्मा को भास
राजवृक्ष फुलेपर साठ दिसमा
बारीश आवंसें हमखास

फुल का गुच्छा लगसेत
दिवारी का आकाश कंदील
सें औषधी गुणी झाड येव
फुल भजीया मोकर काबिल

                   शारदा चौधरी
                       भंडारा

बहावा/ वाहवा/ अमलतास
शिर्षक: बिह्याकी बाशिंग
(षडाक्षरी काव्य)

गुच्छा बहावाको
बिह्याकी बाशिंग
सोनोका डोरला
नथनीकी रिंग ||१||

तूर्रा ओलंबती
पाकळीमालका
जसा इंद्रधनू
अनादी कालका ||२||

खोड मजबूत
डेरी फाटालाई
तलवार शेंग
रोगमा दवाई ||३||

पशु मानवकी
पंचांग औषधी
रस धुंगा फकी
दूर करे व्याधी ||४||

बहावाको बिना
अधुरो बसंत
रंगीन सिरटी
होसे शोभिवंत ||५||

फुलका आयता
भाजी अना भज्या
किडा पाखरूभी
मारं सेती मज्या||६||

डॉ. प्रल्हाद हरीणखेडे "प्रहरी"
डोंगरगांव/ उलवे, नवी मुंबई
मो. ९८६९९९३९०७
बहावा
   (अष्टाक्षरी)

ग्रीष्म ऋतूमा फुलसे
देसे  मनला ओलावा |
मस्त  पिवरा सोनुला
मन   मोहसे  बहावा ||१||

कर्णफुल  डुल  वानी
कानमाका  अलंकार |
गुच्छा फुलका सोनेरी
जसा   नवलखा  हार ||२||

आव  वाराकी झुळूक
कर   मंत्रमुग्ध   बास |
रस   पिवनला   गर्दी
किट पाखरुंकी खास ||३||

फुल मोठा बहुगुणी
करसेती    तरकारी |
भज्या तेलमा तरके
खानलाई गुणकारी ||४||

पान  हिवरा  कोवरा
आयासेत    फुलसंग |
बिच बिचमा झाड़को
दिस   मनोहारी   रंग ||५||

जरे  पर    जखम ला
पान   मोठो  गुणकारी |
दुर   कर    ताप  अना
सुखी खाँसीको विकारी ||६||

लंबी  लंबी  गोल शेंग
पोटसाती    गुणकारी |
बारतीन    टुरु   अना
प्राणीसाती  हितकारी ||७||

बहावाकी साल जड़ी
आव  दवाईको काम |
धुंगी काढ़ा भी करसे
ताप  सर्दीला  तमाम ||८||

बनसेती  खोड़लका
खेतीमाका अवजार |
जरावन आय जासे
काम लकड़ी बेकार ||९||

असो बहुगुणी झाड़
लगावोना   एकतरी |
देख  हिरवो  श्रंगार
तृप्त   होये  धरतरी ||१०||

इंजि. गोवर्धन बिसेन, गोंदिया
      मो. ९४२२८३२९४१
      दि. ०६ जून २०२१

 

बहावा,अमलतास

उजळी सेत रान मा,लक्ष लक्ष कांचनज्योती
आरगवध,राजव्रूक्ष,सुवर्णक नाव तोरा केता सेती

रंगरूप साजीरो भेटीसे सुंगध को मोठो वसा
अस्सल देशी व्रूक्ष तु,जप यूगयुगको वारसा

निसर्गको वसंतोत्सव मा शोभसेस दिमाखदार
सोनपुष्पको अलंकार लेयके ऋतुको साक्षीदार

दिर्घफल तोरो औषधी गुणलका भरीसे ओतप्रोत
रोग व्याधी भांजसे जल्दी असो गुणकारी तत्त्व

कसो करीस बहाल निसर्गन तोला सारो काही
बहावा तोला देखु केती मोरा डोरा थकत नही

 सौ.वर्षा पटले रहांंगडाले
मु.बिरसी ता.आमगांव
जि.गोंदिया

साहित्यिक पालिकचंद बिसने




पालिकचंद लक्ष्मण बिसने
         मु.सिंदीपार पो.सालेभाटा ता.लाखनी जि.भंडारा

*शिक्षण*-बी.ए.डी एड

*नौकरी*-स.शिक्षक जि.प.उच्च प्रा.शाळा मिरेगांव पं स.लाखनी जि.भंडारा 

*पुरस्कार*--१)साहित्य साधना पुरस्कार २०१८ (राष्ट्रसंत विचार साहित्य परिषद चंद्रपूर)

२)साहित्य लेखन प्रेरणा पुरस्कार २०२०(जीवन गौरव परिवार भंडारा प्रा.शिक्षक विभाग ता.लाखनी)

३) डॉ. ए.पी.जे.अब्दुल कलाम वाचन प्रेरणा पुरस्कार  २०२०(मदत संस्था नागपूर)

४)प्रेरणादायी जीवन सत्कार सोहळ्यात स्थान २०१९ (शिवतीर्थ मानव कल्याणकारी संस्था खराशी)

५) केंद्र स्तरीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार 
    पं सं गोरेगांव जि. गोंदिया २०१३

६)  म .फुले आदर्श शिक्षक राष्ट्रीय पुरस्कार २०२०  (शब्दगंध समूह व ग्रंथमित्र युवा मंडळ औरंगाबाद)


आवड
१) बासरी
२)हार्मोनियम
३)काव्यलेखन
४)निसर्ग पर्यटन
६) नैसर्गिक शेतीवर प्रयोग
 
*लेखन कार्य*

१) 'बन तूच आता देव 'काव्यसंग्रह प्रकाशित

२)संभलकर रवनं 'पोवारी नाटिका

३)वलो वलो भयोव मी! पोवारी नाटिका

४) बिबट्या आला रे! (झाडीबोलीत)
   एकांकिका

५)  झाडीबोलीत, प्रमाण मराठीत, पोवारीत काव्यलेखन.

६)झाडीबोली फेसबुक पेजवर    *अमराई* विषयावर स्थंबलेखन

७)   वृक्षारोपण गावच्या स्मशानभूमीत 
टिमसह लावणे.(सा.कार्य)

८) गुणवंतयको सत्कार सहभाग

९) झाड़ी बोली साहित्य शाखा सिंदीपार (अध्यक्ष)

१०) स्वातंत्र्य वीर सावरकर वाचनालय को संस्थापक सदस्य 

झाडीबोली साहित्य शाखा सिंदीपार, स्वातंत्र्य वीर सावरकर वाचनालय अना प्रतिभादर्शन समूह द्वारा गावमा प्रतिभावंत,गुणवंत,उत्तम शेतकरी ला प्रोत्सहानपर सन्मान अना प्रोत्साहन को समारंभ

११) मुलांना कलेची आवड लावणे
  इ.
१२)  विवेकानंदावर काव्यलेखन(अप्रकाशित)
      खुदको जीवनपट

पिताजी-लक्ष्मण दाजी बिसने
भाऊ--कंठीलाल बिसने (गायक ड्रामा)
बहिण--१)मिलन कृष्णा बोपचे (सालेभाटा 
           २)रेखा सत्यवान रहांगडाले(सातलवाडा)

पुतण्या--रणदिप बिसने भोसला मिल्ट्री स्कूल नागपूर मा शिक्षक से ।

पत्नी--सौ .प्रिती /बबिता बिसने  C. B.S. C. little flower  pri. school lakhani

    टुरो--पियूष (गिटार सिकसे)
टुरी --तेजश्री (हार्मोनियम सिकसे)
 आहार-शुद्ध शाकाहारी
प्रेरणास्रोत--स्वामी विवेकानंद

लाखनी तालुकामा उत्तर दिस्यामा बाराक किमी अंतरमा् आमरो सिंदीपार गाव से लोकसंख्या ७००-८०० क् आसपास.
     सिंदीपार एक सांस्कृतिक गाव से .मोरो अजी(वडील) शाहीर होता.ढोलक सुंदर बजावत होता ,पहाडी आवाज होतो ,वय कवीबी होता.वय पहिली सिक्या होता.पर वाचनको ध्यास होतो.
 गावमा् दिवारीमा दंडार ,नाटक होसे.
आमी मनोरंजन मुहून यन् कलाप्रकारयला देखत होता. एक वारसा मोला भेटेव.

मोला बासरी प्रिय होती .खेतमा् इतवूत जायकन् बासरी एकलव्य स्टाईललक् थोडी सिकेव .आब् काही गाणा बजायता आव सेत .हार्मोनियमकि एकदूय परीक्षा देयेव प्राथ.ज्ञान लेयेव.


     आमर् सिंदीपार गावका एक गुणवंत ,शीलवंत पोवार को टुरो डॉ. शेखरामजी येळेकर सर इनको प्रभाव पुरो यरीमा् होतो . गावसाठी वय आबबी मोठा आदर्श सेती .शिक्षण क्षेत्रमा् नाव कमावनो जरुरी से मोलाबी लगेव .मंग मी अना् आमरं वर्गका विद्यार्थी जब वय गाव आवत तबनी गणित साठी अना् मार्गदर्शन साठी उनक् घर् आमी जात होता .आमला प्रेरणा भेटी .चांगला मित्र भेटत गया मंग मी १९९८ला भजेपार (सालेकसा ता.) जि.प.मा शिक्षक लगेव.

    आमर् सिंदीपार गावमा् शेषराव वासुदेवजी येळेकर एक नाव से .वला आमी एक्सप्रेस कसेजन .यन् उपक्रम का वय आयोजन करसेती .आमरंसाठी खुशीकी बात से .

डॉ. शेखरामजी येळेकर सर ,मी ,ररणदिप,शेषराव येळेकर माय पोवारी क जमे वतरी सेवामा् सेजन ।

बाकी तुमर् आशीर्वाद लक चांगलोच से.

बहोत काम बाकी से माय गडकाली,माता सरोसती क् कृपालक अना् कडी मेहनत लक कार्य होत रहे.

        ।।जय राजा भोज।।

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सन्माननिय कवी श्री पालिकचंदजी बिसने

उठायकर लेखनी करबिन लिखान
साहित्यिक महोदयला मोरो प्रणाम
बहु पुरस्कार का गुरूजी धनी
सम्पूर्ण समूह से तुमरो ऋणी


नैसर्गिक शेतीमा प्रयोग अना
हार्मोनियम,बासुरीको नाद 
काव्यलेखन,निसर्गमा फिरनकी
गुरुजिला साद

दुय बहिनी दुय भाई
चरित्र गुरूजीको बहुआयामी
बाबूजी लक्ष्मन बिसने नाव
सिन्दिपार गांव बडो नामी

डॉ शेखरामजी येलेकर आदर्श
स्वामी विवेकानंद प्रेरणास्त्रोत
शुद्ध शाकाहारी आहार 
गुरूजी बहुत गुणवंत

मन मा आस पोवारी को उत्थान
गडकाली मायको सदा आशीर्वाद
निरंतर कार्य करनसाठी तत्पर
पूरी होयेत मन कि हर मुराद

स्वप्नाली दुर्गेश ठाकरे

         कवी श्री पालिकचंद लक्ष्मण बिसने.
                     चाल:-मेरे मन डोले

लाखनी तालुका मा, भंडारा जिल्हा मा
जहां साहित्यिक की बहे धार रे
असो से एक गाव सिंदीपार ।। धृ।।

पिता लक्ष्मनजी बिसने,होतो सुखी कास्तकार
दुय   टुरा ना  दुय टुरी   सुख   को  गा संसार
जन्मेव पालीकचंद ,पोवारीको से छंद
सुखी समृध्द परिवार रे  ।। १।।

बी. ए. डी. एड्‌ वरी शिक्षण,शिक्षकी को पेसा
पीयुष,तेजिश्वरी,टुरा टुरी,लावण्य पुतळा जसा
पत्नी प्रीतीबाई, गुण ला कमी नही
लगे संसारला हातभार  रे ।। २।।

2018 साहित्य साधना,2019 जीवन सत्कार
2020 ला लेखन प्रेरणा,अब्दुल कलाम पुरस्कार
जीवन को सँघर्स, सन तेरा ना बिस 
आदर्श शिक्षक पुरस्कार रे.।। ३।।

बांसरीवादन,हार्मोनीयम,काव्यलेखन करसेती. 
छंद से उनला पर्यावरण को,ना नैसर्गिक खेती.
कर वृक्षारोपण,मीलकर सब जन
कर पर्यावरण उध्दार रे.।। ४।।

सिंदीपार की पावन भूमी जेव से पोवारी गाव
जन्म भएव शेखरामजी,रनदीप,ना शेषराव
पालीकचंद जी वाहा, पोवारीकी जहां
बहत रहे नित धार रे ।। ५।।

उ-थान होय मायबोलीको,शान बळे पोवारी की
मायबोलीला उच्चो उठावन कोरकसर नही बाकी
गडकालीकाको साथ, रहे मस्तक पर हात
कर भवसागर पार  रे।। ६।।
       
डी पी राहांगडाले 
   गोंदिया 
१०/०६/२०२१


अज का साहित्यिक - श्री पालिकचंद बिसने


सिंदीपार गाव से रतन की खान, 
वहॉ निवास करसेती लक्ष्मणजी किसान. 
उनक् पोट् उपजेव पुत्र पालिकचंद, 
आपल् कार्यल् से लोकइन को मनपसंद. 

शिक्षक गोंदिया जिल्हा मा भजेपार, गोरेगाव, 
आब सेती लाखनी तहसील मा मिरेगाव. 
कला प्रिय कई कला इनका ज्ञाता, 
बांसुरी, हार्मोनियम वादन सीन नाता. 

पशु पक्षी क् आवाज की करसेती नकल, 
हात मा लेयेव कामला करसेती सफल. 
कई पुरस्कार इनका सेती मानकरी, 
पोवारी साहित्य लिखकर भया धुरकोरी. 

'बन आता तूच देव' काव्यसंग्रह प्रकाशित, 
नाटीका, एकांकिका, कविता सेत रचित. 
झाडीबोली मा अमराई विषयपर स्तंभलेखन, 
श्मशान भूमी मा बी करसेती वृक्षारोपण. 

झाडीबोली साहित्य मंडल सिंदीपार का अध्यक्ष, 
स्वातंत्र्यवीर सावरकर वाचनालय का संस्थापक. 
पियुष, तेजश्री टुरा टुरी, कंठीलाल भाई, 
प्रीति बाई का पति, दांडेगाव का जवाई. 

                      - चिरंजीव बिसेन
                                  गोंदिया


सर पालिकचंदजी बिसने

कलाकारको बेटा,  उनक् घरं  कला नांद
कलाक्षेत्रमा परविन भयेव, सर पालिकचंद

खेलनमा बाचनमा सदा गायनमा धुंद
नम्रताको धनीसे, सर पालिकचंद

संगीतको प्रेमीसे, बासूरीको छंद
टुरूपोटु को लाडलो से, सर पालिकचंद

लेत रवसेउपक्रम, पुरो होयकन धुंद
नाटकको बी दिवानो से, सर पालिकचंद

पोवारी प्रसार करनो, प्रिय वको  छंद
संस्कार रुजावसे,सर पालिकचंद

 सेत उनका आदर्श, स्वामी विवेकानंद
समाज जगावसे, सर पालिकचंद

उनको सहवास आमला, लग् आनंदी आनंद
सिंदिपारको हिरा से, सर पालिकचंद

डॉ. शेखराम परसरामजी येळेकर नागपूर 
१०/६/२०२१

पालिकचंदजी बिसने

संगीत को झिरा
(अष्टाक्षरी रचना)

काव्य लेख पर्यटन
नाना कलाको मालिक
गीत मधुर संगीत
असो बिसने पालिक ||१||

झाडीबोली मराठीमा
पोवारीमा काव्यछंद
मिठो बासुरीको नाद
देसे सबला आनंद ||२||

स्वामी विवेकानंदजी
प्रेरणाको मुख्य स्थान
शुद्ध शाकाहारी वृत्ती
उच्च से जीवनमान ||३||

प्रकाशित साहित्यलं
होसे समाज उत्थान
असो आदर्श शिक्षक
करं पोवारी सन्मान ||४||

चार सिंदीपार रत्न
इनमालं एक हिरा
बहावत रहो असो
भाऊ संगीतको झिरा ||५||

डॉ. प्रल्हाद हरीणखेडे "प्रहरी"
डोंगरगांव/ उलवे, नवी मुंबई
मो. ९८६९९९३९०७
[6/11, 8:43 AM] Sheshrav Yedekar: अजका सन्माननीय साहित्यिकःपालिकचंदजी बिसने

हरहुन्नरी दादा आमरा
बासरी वादन आवडतो छंद
सुमधुर संगीत पडताच
कान होसेत मस्त धुंद

कविता रवसेत सरस
बोधप्रद अना प्रेरणादायी
देसेत आमलाबी प्रेरणा
असा आमरा प्रेमळ भाई

सिंदीपार जन्मगांव
करीन प्रसिद्ध साहित्यलका
प्रगतीको रस्तापर
झेप लेईन काव्यलका

क्रूतीशील उपक्रम राबावसेत
इश्कुल मा आपलो हमेशा
विद्यार्थी प्रिय गुणवंत शिक्षक
भेटीसे गावको उनला वारसा

सौ.वर्षा पटले रहांंगडाले
गोंदिया


आदरणीय साहित्यिक:- कवी पालिकचंद बिसने
पोवाडा

आदी वंदू गढ़कालिका
दुजा स्मरु श्री गणेश
महाकाल शिव महेश
            हो जी जी रं जी जी

गाव सिंदीपार
पालिकचंद शूर वीर
बाप लक्ष्मण शाहिर
कला को बहार
मानसू आभार.    .....
हो जी जी रं जी जी

कला का पूजारी
दिल से पोवारी
ओठपर मधूर बासरी
काया हासरी
हातमा विद्या कुसरी
केता गाऊ गुणगान,बात साजरी ..... हो जी जी रं जी जी

पालिकचंद नेमबाज
उत्तम शिक्षकी ताज
संगीत मा तरबेज
विवेकानंद सरताज
पूरी तरुणाई करसे नाज..
हो जी जी रं जी जी

बन तूच आता देव
झलकसे माटी अना गाव
वृक्षारोपण की देसेत छाव
झाडीबोली का कवी असो नाव
संस्कारीत भयोव सिंदीपार गाव....
हो जी जी रं जी जी

उनकी भार्या सौ.प्रिती
टुरा टूरी दूय मोती
प्रेमको पारिवारीक नाती
विद्यादान की तेवसे ज्योती..

हो जी जी रं जी जी

साहित्य साधना पुरस्कार
साहित्य लेखन प्रेरणा पुरस्कार
डॉ ए.पी.जे अब्दुल कलाम वाचन प्रेरणा पुरस्कार
प्रेरणादायी जीवन सत्कार
केंद्र स्तरीय आदर्श शिक्षक पुरस्कार
म. फुले आदर्श शिक्षक राष्ट्रीय पुरस्कार
असो बहू गुणी,आयामी पोवार...
हो जी जी रं जी जी

कवी पालिकचंद समाज शिक्षक
वय आदर्श शिक्षक
कलाका जाणता रक्षक...
हो जी जी रं जी जी

उनकी काया से चंदण
उनको सहवास नंदनवन
भारत माता का अमुल्य धन
आध्यात्मिक पुरुष महान
उनला करुसू त्रीवार वंदन..
          हो जी जी रं जी जी

शेषराव येळेकर
 सिंदीपार
दि.10/06/21


   प्रतिभावान काकाजी

जिल्हा भंडारा लाखनी वहान
सिंदीपार ग्राम की माती महान

शिक्षण कृषी धुरीण की खाण
समाज संस्कृती राष्ट्र की से जाण

लक्ष्मण शाहिर गुणी कलाकार
संतान पालिकजी निकल्या हुस्यार

घर् नोहोती कोन् अनोखी प्रेरणा
डाँ.शेखरामजी मंग भेट्या गावमा

प्रभाव पडेव स्वामीजी को खास
डाँ.शेखरामजी की रही संग आस

शिक्षक बनस्यार् बढी मनः चेतना
विद्यार्थी विकास की जगी संवेदना

लेखन भयेव् सुरू संग ग्रामचेतना
वर्ग बनेव प्रयोगशाला शारदा वंदना

गुणी ज्ञानी दुई भाई जी विशेष
गुंज रव्हसे श्रम भक्ती ना स्वदेश

शाळा मां उपक्रम की से रेलचेल
छात्र अना पालकसंग जमसे मेल

ग्राम सिंदीपार मां बी चहलपहल
नाटक-कला-दंडार-साहसी सहल

कलागुण को भय रही से सम्मान
सिंदीपारला लगसे बुहू अभिमान

एकलव्य सरिखो बिनगुरू शिक्षण 
बासरी साहित्य को लेईन प्रशिक्षण 

घर मां गचगच भरी से विवेकानंद
वाचक होय जाये देखकन गदगद

ग्राम विकास की प्रेरणा राष्ट्रसंत
डाँ.शेखरजी संग आनसेती रंगत

"बन तुच आता देव" या कृती
प्रकट करिन उननं मनःसंस्कृती

साहित्य संस्कृती शिक्षण साधना
जीवन भय रही से गुण संवर्धना

शाश्वत कृषी शाश्वत ग्राम चिंतन
प्रयोग चालू करिन वावर मां मंथन

धन्य भयेव् ग्राम धन्य बिसेन कुल
पीढी दर पीढी मां दिशा रहे अनुकूल 

मी रणदीप,पुतण्या उनको एक
मांडेव विचार सत्य अना नेक

अजी माय धन्य भया आमरा 
स्वर्ग लक् देखसेत् यशस्वी टुरा...


रणदीप कंठीलाल बिसने


 सन्माननीय साहित्यिक,कवी श्री पालिकचंद लक्ष्मण बिसने

साहित्य को वारसा
शाहिर घराना
कवी पालिकचंद बिसने
चरित्र सुहाना

संगीत मा पारंगत
बासरी का दिवाना
माटीला आकार दे
कलाकार सुहाना

झाडीबोली का ऋषी
मन मा तराना
निसर्ग प्रेमी
दिल से सुहाना

बहूआयामी चरित्र
पुरस्कार का खजिना
व्यक्तिविकास का धनी
योद्धा से सुहाना

गाव माती दैवत
विज्ञान को जमाना
आध्यात्मिक पुरुष
पुरुषार्थ सुहाना

शेषराव येळेकर
सिंदीपार जिल्हा भंडारा
दि.10/06/21

Thursday, June 3, 2021

अहंकार ६५


अहंकार

नको करू मानव
अहंकार रे खुदपर
काया से मातीमोल
जाय नही धरकर 

मी अन बस मी
काहे करसे मानव
मी को अहंकारलक
डुबसे आपलो जीवन
 
जीवन पथ से
बडो कठीण रे
जप तू अहंकार
नहित गडे काटा रे

मोरो कोणीसिन
अड नही काई
कोनिकी नहाय परवा
मोरो मीच सब काई

समझले तू बातला
अहंकारी को सर
एक ना एक दिवस
झुकसे सच समोर

अहंकार का पहलू दुय्
एकलक झुकसे सर
एकलक उठसे सर
आस सचकी तू धर

सौ.उषाताई रहांगडाले

अहंकार

प्रेम कि बोली अना नम्रता
आती स्वाभाविक अलंकार
पतन होसे मनुष्य को अगर
भयेव ज़रा भी अहंकार।

काहीं काल को अहंकार
करसे ज्ञानी को भी विनाश
रिश्ता नाता मा भी आवसे
अभिमानलक खटास।

अंत विवेकको होसे
जब अपनाया येव अवगुण
घमंड भयेव तब नहीं समझती
मानवता अना सद्गुण।

प्रतिभा अना पैसाको 
नको करो अभिमान
सदुपयोग करो वित्त विद्या को
बनो महान अना किर्तिवान।

"मि"सब दून श्रेष्ट सेव
या भावना जेको मनमा
एकटोच रह जाए
उ व्यक्ति आपलो जिवनमा।
 
" मी" बलशालि येन घमंड लका
भयेतो रावन को भी विध्वंश
महाग्यानि रहकर भी दशानन
बचाय नहीं सकेव आपलो वंश।

त्याग करो "अहंकार"को
करो दया ना परोपकार
मदत करो जरूरतमंदकी
बाटत चलो ख़ुशी अना प्यार।

स्वप्नाली दुर्गेश ठाकरे


 अहंकार
  

अहंकार आदमी को 
सबसे मोठो दुश्मन, 
सबला आपल् जवर ठेवन् 
पर अहंकाराला दूर गाडन्. 

अहंकार लका मोठा मोठा 
साम्राज्य भय गया नष्ट, 
अहंकारल् आदमी की
बुद्धि होय जासे भ्रष्ट. 

येव काम मी कर सिकुसू 
या आय काबिलियत, 
पर मीच् कर सिकुसू 
या अहंकार की नियत. 

रावण, कंस, दुर्योधन को 
अहंकार नच करीस घात, 
मनला बस मा ठेवो 
करो अहंकार पर मात. 

आपल् शक्तिपर ठेवो 
हमेशा अतूट विश्वास, 
पर आपल् कमी को बी 
रव्हन् देव आभास. 

राम कृष्णला होतो 
आपल् शक्तिपर विश्वास, 
आपल् कार्यल् संसार मा 
बन गया सबसे खास. 

                      - चिरंजीव बिसेन
                                  गोंदिया


विषय:- अहंकार

सबदून अनमोल
मोरो अहंकार
राजा भोज को वंशज
बार बार एक पुकार

धाकड को सिनो
शेर की दहाड
देवू मुछ पर ताव
भागे कवै गिधाड

माँ गड़काली कुलदेवी
खून क्षत्रिय 
भूजा देसे ललकार
नहाय मनमा भय

अहंकार से मोला
मोरो पोवारी भाषा को
जन जन की मुख मा सजे
असी अभिलाषा को

अहंकार मोरो
स्वाभिमान परिपूर्ण
समाज साठी जगू
तब जीवन होये पूर्ण


शेषराव येळेकर
सिंदीपार जिल्हा भंडारा


                   अहंकार
                
काम,क्रोध,मद,मत्सर,
लोभ,माया सय बैरी आती
बैरी जास्तच बढेलका
होसे अहंकार की उत्पत्ती।। १।।

अहंकार का अनेक रुप
कोनीला सुंदरता को अहंकार
कोनीला धनदौलत को
कोनी मोजण बस्या उपकार।। २।।

रावण होतो बुध्दीमान
होती ओकोजवर सोनोकी लंका 
अहंकार लक नाश भएव
जब चोरकर लेगीस सीतामाता।। ३।।

कंस ना दुर्योधन तसाच म-या
जब अहंकार ना घेरीस उनला 
नास भयगयेव उनको
शांती नही भेटी उनक मनला।। ४।।

दुय दिवस की जीन्दगानी 
सब् झूट से मोहमाया 
बोली भाषा शुध्द ठेवो 
बसमा ठेवो मनको धावा ।। ५।।

अहंकार ला बेसन टाकोको 
शुध्द ठेवो आचारबिचार
सुखी होयजाए जिवन ना
नैया होय्जाए भवसागर पार.।। ६।।
           

डी पी राहांगडाले 
   गोंदिया 


                        
 छोडो अहंकार
(षडाक्षरी)

अहंकार सदा
आव "मीच" कसे
होयके अंधरा
डोरा मीचकंसे ||१|

लुभाय सबला
प्रशंसा चाव्हंसे
उठ नहीं सको
असोच पाडंसे ||२||

सबमा मी श्रेष्ठ
अहंकार वृत्ती
जासे मती अना
होसे अधोगती ||३||

भूल पड जासे
इंसानियतकी
पडंसे आदत
बुरी नियतकी ||४||

खुद परीवार
समाजको नाश
अहंकार होसे
गरोमाको पाश ||५||

छोडो अहंकार
कमावो प्रतिभा
आये जीवनला
सुंदरशी शोभा ||६||

डॉ. प्रल्हाद हरीणखेडे "प्रहरी"
डोंगरगाव/ उलवे, नवी मुंबई
मो. ९८६९९९३९०७


मातीमाच जगनो सें
मातीमाच सें मरण
मिथ्या अहंकार करके मानव
अंतमा पछतान की धन

अहंम भाव तं खोटो
भ्रम आय मनको
होसे माणुसकी खतम
पतन विवेक ज्ञान को

माणुसला डुबावंसें अहंकार
अति मीपण कि सफलता
अहंकार बिगाडसे रिश्ता 
सें पाप दुःख को निर्माता

छोड संपत्ती सत्ता को मोह
नही काम आवं अंतसमय मा
नोको करू जीवन मातीमोल
गर्व का घर भया खाली जगमा

अहंकार पर कोमलता भारी
बनो करुणामय उपकारी
रहो सबजन मिलजुलकर 
दुबारा नही मिलं या जिंदगी प्यारी

                              शारदा चौधरी 
                                   भंडारा



.   अभंग
      विनास

नोको देऊ देवा, योव अहंकार
जीवन उद्धार,होय? मग।।

अहंकारी होतो, लंकाको रावण
भयव हनन, अहंकार।‌।

वेद शास्त्र देसे, येकीया गवाही
गर्व की वाहवाही, होऊनही।।

हिरन्यकश्यप,मीच कव्ह देव
विष्णुच भयोव,नरसिंह।।

अहंकारी वृत्ती,विनास करसे
विनाश आनसे,जीवनमा।।

मी मी को उच्चार,संबंच करुसु
सबला पालुसु, अहंकार।।

नही चलं काही,रावका रंकंही
भया हे सपाही,गतीहिन।।

नहि कोनी मोठो,संबंच समान
नहीं अपमान, जीवनमा।।

समाज की सेवा, दिनरात करो
जीवन उद्धरो,समाजमा।।

नावगा लौकीक, प्रेम लं भेटसे
तन अमरहोसे, सेवाकरो।‌।


वाय सी चौधरी
गोंदिया

धन को, रूप को, गुन को 
कायको का आय अहंकार,
एन भरम मा नोको जिओ,
एवत आय मोठो विकार.

काजक आय या माया,
मेहनत की बस छाया.
येन जगत मा आइन,
कई-कई बहादुर राया.
येव इंधारो आय मन को, 
कई सेत एका परकार.

गत देखो  रावण- कंस की,
अगाज़ होती इनको दंश की.
समय की बलिहारी त देखो,
गति बिलायी इनको वंश की.
डखरत होतींन टोंड जिनका,
उनको लच उठी चित्कार.

काही करे वहम नहीं मर्,
मगज को भरम नहीं मर्.
हामी त कई बार मरया,
काही करें अहम नहीं मर्.
बेमउत मारनो से येला त,
बस नाम जपो ओंकार.

तुमेश पटले "सारथी"
केशलेवाड़ा (बालाघाट)

कृष्ण अना गोपी

मी बी राधा बन जाऊ बंसी बजय्या, रास रचय्या गोकुलको कन्हैया लाडको नटखट नंदलाल देखो माखनचोर नाव से यको!!१!! मधुर तोरो बंसीकी तान भू...